Tata Trusts Healthcare Plan: देशभर में खुलेंगे नॉट-फॉर-प्रॉफिट अस्पताल, गरीब मरीजों के इलाज पर रहेगा फोकस
टाटा ट्रस्ट्स अस्पताल नेटवर्क का मॉडल
टाटा ट्रस्ट्स के अस्पताल नेटवर्क का मॉडल क्रॉस-सब्सिडी (Cross-subsidy) पर आधारित होगा। इसका मतलब है कि जो मरीज इलाज का खर्च उठा सकते हैं, उनसे मिलने वाली आर्थिक मदद का इस्तेमाल गरीब मरीजों के इलाज में किया जाएगा। इससे गरीब मरीजों को भी बेहतर डॉक्टर, दवाएं और स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी
खर्च नहीं, नतीजे होंगे पैमाना
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने काम करने का तरीका साफ किया है। उन्होंने कहा कि समूह ऐसे संस्थान बनाएगा, जो लंबे समय तक लोगों के काम आएं। ट्रस्ट्स की एनुअल रिपोर्ट 2025-26 में उन्होंने बताया कि काम की सफलता सिर्फ खर्च से नहीं मापी जाएगी। इसके बजाय, यह देखा जाएगा कि लोगों की जिंदगी में कितना बदलाव आया। साथ ही, यह बदलाव कितने समय तक बना रहा।
सबसे बड़ा बनने की होड़ पर चेतावनी
हेल्थकेयर के लिए नई रणनीति क्या
टाटा ट्रस्ट्स ने स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर बनाने के लिए पांच साल की योजना बनाई है। यह योजना 2026 से 2031 तक चलेगी। इसके तहत करीब 75 ब्लॉकों में रहने वाले 25 लाख लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य है। ब्लॉक जिले का एक प्रशासनिक हिस्सा होता है। इस योजना में 100 से ज्यादा सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत किया जाएगा।
कैंसर के इलाज में एक साल की उपलब्धि
नोएल टाटा ने कहा कि ट्रस्ट्स गंभीर बीमारी से जूझ रहे परिवारों की मदद करेगा। इसके लिए कैंसर के इलाज की सुविधाएं भी बढ़ाई जाएंगी। कोशिश होगी कि मरीजों को उनके घर के पास इलाज मिल सके। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में ट्रस्ट्स के कैंसर केयर कार्यक्रमों के तहत बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज हुआ।
इस दौरान ओपीडी में एक लाख छह हजार 626 परामर्श दिए गए। कीमोथेरेपी के 24 हजार 874 सेशन हुए और दो हजार 879 सर्जरी की गईं। ये आंकड़े इलाज का दायरा बताते हैं। लेकिन नोएल टाटा के मुताबिक, असली कामयाबी यह है कि इलाज से मरीजों और उनके परिवारों की जिंदगी में कितना बदलाव आया।
देश में युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने पर जोर
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन ने कहा कि कई युवा बेहतर अवसरों के लिए विदेश जाते हैं। उन्हें भारत में भी ऐसे मौके मिलने चाहिए। इसके लिए देश में ऐसे संस्थान बढ़ाने की जरूरत है, जहां युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलें।
टाटा ट्रस्ट्स ने कई संस्थानों को शुरू करने में मदद की है। इनमें भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) और टाटा मेमोरियल अस्पताल शामिल हैं। ट्रस्ट्स आगे भी ऐसे संस्थानों को बढ़ावा देगा।
इसके लिए ट्रस्ट्स दूसरे सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर काम कर सकता है। इससे काम की जिम्मेदारी बांटने और ज्यादा लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
मदद करने का तरीका बदल रहा
बता दें नोएला ने रतन टाटा के बाद ट्रस्ट्स के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। उनके मुताबिक, भारत में लोगों की मदद करने का तरीका बदल रहा है। अब एंटरप्रेन्योर्स की नई पीढ़ी सामाजिक कामों में ज्यादा दिलचस्पी ले रही है। वे इन कामों से बड़े बदलाव लाना चाहते हैं।
ऐसे में पुराने संस्थानों को भी अपने काम का असर दिखाना होगा। उन्हें बताना होगा कि उनके प्रयासों से लोगों को कितना फायदा हुआ। साथ ही, उन्हें अपने काम के लिए जवाबदेह भी होना होगा। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की कुल 66% हिस्सेदारी है। टाटा संस, टाटा समूह की प्रमुख कंपनियों की होल्डिंग कंपनी है। यानी यह ऐसी कंपनी है, जिसके पास दूसरी कंपनियों के शेयर होते हैं।
FAQs
- टाटा ट्रस्ट्स अस्पताल नेटवर्क का मॉडल किस पर आधारित है?
टाटा ट्रस्ट्स अस्पताल नेटवर्क का मॉडल क्रॉस-सब्सिडी पर आधारित है, जिसमें इलाज का खर्च उठा सकने वाले मरीजों से मिलने वाली आर्थिक मदद का इस्तेमाल गरीब मरीजों के इलाज में किया जाएगा। - टाटा ट्रस्ट्स की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए योजना क्या है?
टाटा ट्रस्ट्स ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए 2026 से 2031 तक की एक पांच साल की योजना बनाई है, जिसके तहत लगभग 75 ब्लॉकों में रहने वाले 25 लाख लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य है। - टाटा ट्रस्ट्स कैंसर के इलाज में किस तरह की सुविधाएं बढ़ाने की योजना बना रहा है?
टाटा ट्रस्ट्स कैंसर के इलाज की सुविधाएं बढ़ाने की योजना बना रहा है ताकि गंभीर बीमारी से जूझ रहे परिवारों को उनके घर के पास इलाज मिल सके।