हेड कॉन्स्टेबल रेवती की बहादुरी से नौ पुलिसकर्मियों को मिली मौत की सजा, गवाही से खुला हत्या का राज
आज हम आपको एक ऐसा मामला बताएंगे, जिसे सुनते ही आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। एक तरफ आप एक बहादुर कॉन्स्टेबल को सलाम करेंगे। वहीं दूसरी ओर पुलिस प्रशासन के बड़े अधिकारियों पर शर्म महसूस करेंगे।
यह मामला तमिलनाडु के थूथुकुडी का है, जहां 06 अप्रैल को पुलिस के नौ जवानों को दोषी ठहराया गया और मौत की सजा सुनाई गई। यह फैसला उस घटना के पांच साल बाद आया है, जब पुलिस की हिरासत में दी गई यातना से एक पिता और बेटे की जान चली गई थी।
कॉन्स्टेबल के जज्बे को सलाम
मामला कैसे सामना आया इसके पीछे की कहानी जानकर आप हैरान रह जाएंगे। दरअसल ये मामला तब सामने आया जब हेड कॉन्स्टेबल रेवती ने अपनी जान की परवाह किए बिना सही का साथ दिया।
कॉन्स्टेबल रेवती उस समय थूथुकुडी के साथनकुलम पुलिस स्टेशन में ड्यूटी पर थीं, जब पुलिसवालों ने पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स पर बुरी तरह से ज़ुल्म किया जा रहा था।
इन दोनों को 2020 में कोविड नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। आरोप था कि इन्होंने अपनी मोबाइल दुकान खोल रखी थी।
इरादे पर अडिग रही रेवती
रेवती ने सरकारी गवाह बनकर मजिस्ट्रेट के सामने उस रात की पूरी कहानी सुनाई। इस दौरान उन्हें अपनी सुरक्षा, परिवार और नौकरी की चिंता थी, लेकिन उन्होंने सच का साथ देने का फैसला लिया। आरोपी सीनियर अधिकारी और प्रभावशाली थे। जबकि रेवती एक जूनियर कॉन्स्टेबल थीं, फिर भी वह अपने इरादे पर अडिग रही।
ये एक साहसिक कदम था, जिससे यह मामला आगे बढ़ सका। इसी बदौलत हमें आज इस बहादुर कॉन्स्टेबल की हिम्मत को सलाम करने का मौका मिला।
क्या आप मेरे बच्चों की सुरक्षा कर सकते हैं- रेवती
जब न्यायिक मजिस्ट्रेट एम.एस. भरथिदासन इस मामले की जांच करने पहुंचे, तो कॉन्स्टेबल रेवती ने उनसे एक बात कही। कहा कि सर, मैं आपको पूरी बात बताऊंगी। वो सच बताऊंगी, जिसे छिपाया जा रहा है।
इसके अलावा रेवती ने कहा कि मैं दो छोटी बच्चियों की मां हूं। क्या आप मेरी और मेरे बच्चों की सुरक्षा की गारंटी दे सकते हैं?
रेवती ने उस रात की पूरी क्रूरता का ब्योरा दिया कि कैसे उन दोनों आदमियों को बेरहमी से पीटा गया था। उन्हें गंभीर चोटें आईं थी। बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। इसके कुछ ही दिनों बाद, दोनों की मौत हो गई थी
रेवती ने बिना किसी डर के CCTV फुटेज में दिख रहे लोगों की पहचान की। साथ ही घटनास्थल पर उनकी मौजूदगी साबित करने में मदद की। यह क्रिमिनल लायबिलिटी तय करने के लिए बेहद जरूरी था। रेवती ने साहस दिखाते हुए इस मामले को सही दिशा में आगे बढ़ाया।
प्राइवेट पार्ट्स को भी जूते से रौंदा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रेवती ने गवाही दी की पुलिस अधिकारियों ने पीड़ितों के साथ जो किया वह बहुत क्रूर था। उन्होंने जो भी चीज हाथ में आई, उससे उन पर हमला किया। उनके प्राइवेट पार्ट्स को भी जूते से रौंदा।
रेवती ने मजिस्ट्रेट को बताया मैं रात के लगभग 8.50 बजे स्टेशन पहुंची थी। उसी वक्त अंदर से किसी की चीखें और रोने की आवाजें आ रही थीं। वह चिल्ला रहा था अम्मा, दर्द हो रहा है! मुझे जाने दो! प्लीज मुझे जाने दो!
जो मैंने किया वह सच में गलती थी! इस बीच, सब-इंस्पेक्टर बालाकृष्णन की आवाज सुनाई दी। SI स्टेशन के बाहर था और चिल्ला रहा था तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई स्टेशन के अंदर हंगामा करने की? क्या तुम्हें लगता है तुम कोई बड़े आदमी हो?
कपड़े उतारकर हाथ बांधें
रेवती ने आगे बताया कि जब मैं वहां पहुंची, तो वे उस व्यक्ति को बुरी तरह पीट रहे थे। इससे वह खून से लथपथ हो गया था। जब दोनों आदमी यातना सहन नहीं कर पाए और बेहोशी की हालत में पहुंच गए थे।
इसके बाद रेवती ने जयराज (मृत पिता) से पूछा कि क्या उन्हें कुछ चाहिए और उन्हें कॉफी दी, लेकिन अधिकारियों ने उसे झटका देकर गिरा दिया।
एक समय ऐसा भी आया जब उन दोनों के कपड़े उतारकर उन्हें नंगा कर दिया गया और हाथ बांध दिए गए। इस भयानक क्रूरता को और न देख पाने के कारण रेवती कमरे से बाहर चली गई।
रेवती को दी चुप रहने की धमकी
साथी अधिकारियों ने उसे चेतावनी दी कि वह चुप रहे, लेकिन रेवती जो उस समय लगभग 37 साल की थीं उसने बोलने का फैसला किया। यह एक बहुत ही असाधारण कदम था। खासकर एक ऐसी फोर्स में जहां किसी कर्मी का अपने साथियों के खिलाफ गवाही देना बहुत कम होता है।
रेवती को डराया-धमकाया गया। साथ ही माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि मजिस्ट्रेट को जांच कक्ष के बाहर गार्ड तैनात करना पड़ा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि रेवती अपना बयान दे सकें।
इसके बाद भी पुलिसकर्मी थाने के बाहर जमा हो गए। टिप्पणियां करने लगे और कार्यवाही में रुकावट डालने की कोशिश की। इतना डर था कि रेवती शुरू में अपने बयान पर दस्तखत करने से हिचकिचा रही थीं। सुरक्षा का बार-बार भरोसान मिलने के बाद ही रेवती ने दस्तखत किए थे।
हाई कोर्ट ने रेवती को दी सुरक्षा
न्यायमूर्ति भरथिदासन ने बताया कि रेणु रेवती ने बयान देने के समय थाना परिसर पुलिस से घिरा हुआ था और वहां की हालत ठीक नहीं थी। रेवती मोबाइल से घटनाओं को रिकॉर्ड कर रही थीं। पुलिस अदालत के कर्मचारियों को भी धमका रही थी।
शुरुआत में रेवती की गवाही को बड़े पैमाने पर समर्थन मिला था। फिर भी वह डरी हुई थी। 2020 में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि, वह नहीं चाहती कि सीनियर अधिकारी उन्हें परेशान करें।
मद्रास हाई कोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने उन्हें सुरक्षा दी। इसके साथ ही रेवती और उनके पति की सुरक्षा के लिए दो पुलिस कॉन्स्टेबल तैनात किए गए।
2020 में एक सुनवाई के दौरान मद्रास हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने उन्हें फोन पर बुलाया और कुछ मिनटों तक बात की। साथ ही कोर्ट ने उन्हें सुरक्षा का पूरा भरोसा दिलाया।
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