चुनावी नतीजों से पहले ममता को झटका, सुप्रीम कोर्ट का मतगणना में दखल से इनकार, फालदा सीट पर 21 को दोबारा मतदान
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के परिणाम से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक बड़ा झटका लगा है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पार्टी ने चुनाव आयोग द्वारा मतगणना केंद्रों पर केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती को चुनौती दी थी।
TMC ने चुनाव आयोग के उस फैसले का विरोध किया था, जिसमें मतगणना के पर्यवेक्षक के तौर पर केंद्रीय और पीएसयू कर्मचारियों की नियुक्ति की बात कही गई थी। TMC ने इस तैनाती को अवैध और नियमों के खिलाफ बताया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया और स्पष्ट किया कि यह नियुक्ति नियमों के खिलाफ नहीं है।
पहले हाईकोर्ट में लगाई थी याचिका
इस मामले में टीएमसी ने पहले कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, लेकिन वहां से भी उन्हें निराशा हाथ लगी। हाईकोर्ट ने कहा था कि चुनाव आयोग का यह निर्णय पूरी तरह से वैध है और इसमें कोई अवैधता नहीं है। इसके बाद, टीएमसी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, लेकिन वहां से भी उन्हें नकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए सर्कुलर को लागू करने में कोई गलत बात नहीं है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग का यह अधिकार है कि वह अपनी पसंद के कर्मचारियों को नियुक्त करे, और इसमें कोई भी समस्या नहीं होनी चाहिए।
कपिल सिब्बल ने की थी 4 आपत्तियां
इस मामले में टीएमसी की ओर से दलील पेश करने के लिए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल अदालत में मौजूद थे। उन्होंने कोर्ट में चार आपत्तियां उठाईं। उन्होंने कहा कि उन्हें जिला चुनाव अधिकारियों द्वारा 13 अप्रैल को जारी नोटिस की जानकारी 29 अप्रैल को मिली, जिससे उनके पास पर्याप्त समय नहीं था। इसके अलावा, सिब्बल ने चुनाव आयोग द्वारा दिये गए सर्कुलर को लेकर भी सवाल उठाए।
TMC का बदला हुआ रुख
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद, TMC ने अपना रुख बदल लिया और अब चुनाव आयोग से इस सर्कुलर को सख्ती से लागू करने की मांग की है। इस पर चुनाव आयोग ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि वह इस दिशा-निर्देश का पूरी तरह पालन करेगा।
4 मई को आने हैं नतीजे
बंगाल में सियासी पारा सातवें आसमान पर है। 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग खत्म होने के बाद अब सबकी नजरें 4 मई पर हैं। हालांकि, कुछ जगहों पर जैसे मगराहाट और डायमंड हार्बर में दोबारा वोटिंग कराई गई है। ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने यह कड़ा कदम उठाया।
अब देखना यह होगा कि 4 मई को जब बक्से खुलेंगे, तो बंगाल की जनता ने किसे अपना सिरमौर चुना है। लेकिन फिलहाल के लिए, कानूनी लड़ाई में टीएमसी को बैकफुट पर आना पड़ा है। यह फैसला बीजेपी और चुनाव आयोग के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया है।
फालता सीट पर 29 अप्रैल को हुई वोटिंग रद्द
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की फालता सीट पर 29 अप्रैल को हुई वोटिंग को रद्द कर दिया है। यहां दूसरे फेज के चुनाव में EVM में गड़बड़ी और हिंसा की रिपोर्ट्स आई थीं। चुनाव आयोग ने सभी 285 पोलिंग बूथों पर 21 मई को फिर से वोटिंग कराने का आदेश दिया है, और इसका परिणाम 24 मई को घोषित किया जाएगा। इस विधानसभा क्षेत्र के एक बूथ पर भाजपा के बटन के पास टेप भी पाया गया था, जिसे लेकर विवाद हुआ था।
15 बूथों पर हुआ 90% मतदान
वहीं, पश्चिम बंगाल के मगराहाट पश्चिम और डायमंड हार्बर विधानसभा क्षेत्रों में 15 बूथों पर दोबारा मतदान हुआ। यहां लगभग 90% मतदान दर्ज किया गया। इस दौरान साउथ 24 परगना में TMC और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प भी हुई, लेकिन सुरक्षाबलों ने स्थिति को काबू कर लिया। फालता में वोटरों ने TMC कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप भी लगाया है।
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