भारत के सबसे अमीर मंदिरों की कुल संपत्ति 9 लाख करोड़, पद्मनाभस्वामी मंदिर नंबर 1 पर
News In Short
- भारत के टॉप-10 अमीर मंदिरों की कुल संपत्ति करीब नौ लाख करोड़ रुपए आंकी गई है।
- केरल का पद्मनाभस्वामी मंदिर सबसे अमीर है। इसके पास डेढ़ हजार टन से ज्यादा सोना है।
- नकद दान में आंध्र प्रदेश का तिरुपति बालाजी मंदिर सबसे आगे है।
- इन मंदिरों की संपत्ति में सोना, जमीन, नकदी और व्यावसायिक इमारतें शामिल हैं।
- पिछले दो सालों में तिरुपति की संपत्ति में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
News In Detail
मंदिर सिर्फ आस्था नहीं, अर्थव्यवस्था भी
भारत के मंदिर केवल आस्था के केंद्र नहीं हैं। ये देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की तरह भी काम करते हैं। यहां हर दिन लाखों-करोड़ों रुपए का चढ़ावा आता है।
देश के टॉप-10 अमीर मंदिरों की कुल चल-अचल संपत्ति को जोड़ें तो यह आंकड़ा 7.5 से नौ लाख करोड़ रुपए तक पहुंचता है। यह रकम कई देशों के सालाना बजट से भी ज्यादा है।
पद्मनाभस्वामी: अमीरों का मंदिर
इन सबमें सबसे ऊपर आंध्र प्रदेश नहीं, बल्कि केरल का नाम है। तिरुवनंतपुरम का श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर देश का सबसे अमीर धार्मिक स्थल है। इसकी 99 प्रतिशत संपत्ति प्राचीन खजाने के रूप में आती है।
इस खजाने में सोने की मूर्तियां, सिक्के और हीरे-जवाहरात शामिल हैं। मंदिर में मौजूद सोने का बाजार भाव दो लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है। इस खजाने को सरकार और सुप्रीम कोर्ट के संरक्षण में रखा गया है।
मंदिर के पास ओडिशा में 60 हजार एकड़ से ज्यादा जमीन है। यह जमीन अकेले ओडिशा के 30 में से 24 जिलों में फैली हुई है। इसके अलावा छह राज्यों में भी मंदिर की संपत्ति है।
यहां श्रद्धालु रोजाना औसतन पांच से छह लाख रुपए चढ़ावा लाते हैं। इस साल 17 मार्च को एक ही दिन में चार करोड़ 88 लाख रुपए का चढ़ावा आया था।
तिरुपति: नकद दान में नंबर-1
आंध्र प्रदेश का तिरुपति बालाजी मंदिर नकद दान के मामले में सबसे आगे है। इसकी कुल अनुमानित संपत्ति तीन से 3.38 लाख करोड़ रुपए के बीच है। सालाना नकद आय पांच हजार 258 करोड़ रुपए बताई जाती है।
तिरुपति में रोजाना औसतन चार से छह करोड़ रुपए का दान आता है। मंदिर के पास 11.3 टन सोना है। पिछले दो सालों में यानी मार्च 2024 के बाद इसकी संपत्ति में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है।
स्वर्ण मंदिर और जगन्नाथ: प्राचीन और समृद्ध
पंजाब के अमृतसर में स्थित स्वर्ण मंदिर (Golden Temple) देश के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। इसकी कुल संपत्ति एतिहासिक और स्वर्ण दोनों रूपों में है। सालाना नकद आय एक हजार 260 करोड़ रुपए है। यहां रोजाना 1.5 से दो करोड़ रुपए का दान आता है। मंदिर के पास 900 किलो सोना है।
ओडिशा का जगन्नाथ मंदिर (पुरी) भी इस सूची में शामिल है। इसकी कुल संपत्ति एक लाख 20 हजार करोड़ रुपए आंकी गई है। सालाना नकद आय एक हजार से 1200 करोड़ रुपए के बीच है।
साईं बाबा और शिरडी की दौलत
महाराष्ट्र के शिर्डी साईं बाबा मंदिर की संपत्ति तीन हजार करोड़ रुपए बताई गई है। इसकी सालाना आय 500 से 600 करोड़ रुपए के बीच है। मंदिर के पास 400 किलो सोना है।
यहां रोजाना एक से 1.5 करोड़ रुपए का दान आता है। इस मंदिर में देश के सबसे ज्यादा श्रद्धालु आते हैं।
उत्तर भारत के बड़े मंदिर
उत्तर प्रदेश में दो बड़े मंदिर इस सूची में हैं। अयोध्या का श्रीराम मंदिर अभी नया होने के बाद भी छह से नौ हजार करोड़ रुपए की संपत्ति वाला बन गया है। यहां (श्रीराम मंदिर अयोध्या) 327 करोड़ रुपए सालाना नकद आय होती है। रोजाना 50 से 60 लाख रुपए का दान आता है।
वाराणसी का श्री काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple) भी इस सूची में है। इसकी कुल संपत्ति तीन हजार करोड़ रुपए है। सालाना नकद आय 100 से 125 करोड़ रुपए है।
वैष्णो देवी और मुंबई के सिद्धिविनायक
जम्मू स्थित वैष्णो देवी मंदिर की कुल संपत्ति दो हजार 500 करोड़ रुपए बताई गई है। यहां 250 से 300 करोड़ रुपए की सालाना नकद आय होती है। रोजाना 50 से 60 लाख रुपए का दान आता है।
मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर (Siddhivinayak Temple) 800 करोड़ रुपए की संपत्ति वाला है। इसकी वार्षिक नकद आय 133 करोड़ रुपए है। रोजाना 35 से 40 लाख रुपए का दान मिलता है।
गुजरात का सोमनाथ मंदिर
गुजरात का सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple) भी इस सूची में आता है। इसकी अनुमानित संपत्ति 1100 करोड़ रुपए है। सालाना नकद आय 40 से 55 करोड़ रुपए के बीच है। मंदिर के पास 160 किलो सोना बताया जाता है।
भारतीय मंदिरों की अनुमानित संपत्ति और आय | ||
| धर्मस्थल (मंदिर और स्थान) | कुल अनुमानित संपत्ति (चल-अचल) | सालाना कुल आय |
| पद्मनाभस्वामी मंदिर, केरल | 1,50,000 - 2,50,000 करोड़ रुपए | 15 - 25 करोड़ रुपए |
| तिरुपति बालाजी, आंध्र प्रदेश | 3,00,000 - 3,38,000 करोड़ रुपए | 5,258 करोड़ रुपए |
| स्वर्ण मंदिर, अमृतसर | अमूल्य (ऐतिहासिक और स्वर्ण) | 1,260 करोड़ रुपए |
| जगन्नाथ मंदिर, पुरी | 1,20,000 करोड़ रुपए | 1,000 - 1,200 करोड़ रुपए |
| साईं बाबा मंदिर, शिर्डी | 3,000 करोड़ रुपए | 500 - 600 करोड़ रुपए |
| श्रीराम मंदिर, अयोध्या | 6,000 - 9,000 करोड़ रुपए | 327 करोड़ रुपए |
| वैष्णो देवी मंदिर, जम्मू | 2,500 करोड़ रुपए | 250 - 300 करोड़ रुपए |
| सिद्धिविनायक मंदिर, मुंबई | 800 करोड़ रुपए | 133 करोड़ रुपए |
| काशी विश्वनाथ, वाराणसी | 3,000 करोड़ रुपए | 100 - 125 करोड़ रुपए |
| सोमनाथ मंदिर, गुजरात | 1,100 करोड़ रुपए | 40 - 55 करोड़ रुपए |
सोने का हिसाब-किताब
अगर सोने की बात करें तो टॉप-3 धर्मस्थलों के पास सबसे ज्यादा सोना है। पद्मनाभस्वामी के पास 1.5 हजार टन, तिरुपति के पास 11.3 टन और स्वर्ण मंदिर के पास 900 किलो सोना है।
इन 10 मंदिरों में कुल मिलाकर बाजार भाव के हिसाब से चार लाख 50 हजार करोड़ रुपए तक का सोना है। साथ ही एक लाख 41 हजार करोड़ रुपए की नकदी-एफडी (Fixed Deposit) है। तीन लाख 76 हजार करोड़ रुपए की जमीन और व्यावसायिक इमारतें भी शामिल हैं।
भारत के प्रमुख मंदिरों का अनुमानित सोना | |
| धर्मस्थल | अनुमानित सोना |
| पद्मनाभस्वामी मंदिर | 1,500 टन |
| तिरुपति बालाजी | 11.3 टन |
| वैष्णो देवी मंदिर | 1.2 टन |
| स्वर्ण मंदिर | 900 किलो |
| काशी विश्वनाथ | 940 किलो |
| साईं बाबा मंदिर (शिरडी) | 400 किलो |
| सिद्धिविनायक मंदिर (मुंबई) | 160 किलो |
| जगन्नाथ मंदिर (पुरी) | 130 किलो |
| सोमनाथ मंदिर | 160 किलो |
| श्रीराम मंदिर (अयोध्या) | 50-60 किलो |
टॉप-3 में नकद दान की वृद्धि धीमी
एक बात हैरान करने वाली है। टॉप-3 धर्मस्थलों की कुल संपत्ति मार्च 2024 के बाद काफी बढ़ी है। वहीं इनके बड़ने की वजह नकद दान नहीं है।
इन मंदिरों में नकद दान में महज पांच से 12 प्रतिशत की ही बढ़ोतरी हुई है। जबकि पद्मनाभस्वामी की संपत्ति उस वक्त सोने के भाव के करीब 65 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम के आसपास थी। आज 1.50 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंचने से संपत्ति का मूल्य दोगुना से ज्यादा हो गया है।
FAQ
- भारत का सबसे अमीर मंदिर कौन सा है और उसके पास क्या-क्या है?
भारत का सबसे अमीर मंदिर केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित पद्मनाभस्वामी मंदिर है। इसकी कुल अनुमानित संपत्ति 1.50 लाख से 2.50 लाख करोड़ रुपए के बीच है। मंदिर के खजाने में 1.5 हजार टन से अधिक सोना, हीरे-जवाहरात और सोने की मूर्तियाँ हैं। मंदिर के पास ओडिशा के 24 जिलों में 60 हजार एकड़ से ज्यादा जमीन भी है। इस खजाने का 99 प्रतिशत हिस्सा प्राचीन संपदा के रूप में है और इसे सुप्रीम कोर्ट के संरक्षण में रखा गया है। - तिरुपति बालाजी मंदिर की संपत्ति इतनी तेज क्यों बढ़ी है?
तिरुपति बालाजी मंदिर की संपत्ति मार्च 2024 के बाद 35 प्रतिशत तक बढ़ी है। इसकी मुख्य वजह नकद दान नहीं, बल्कि सोने की कीमतों में तेज उछाल है। मंदिर के पास 11.3 टन सोना है। जब सोने का भाव बढ़ता है, तो मंदिर की कुल संपत्ति का मूल्य भी उसी अनुपात में बढ़ जाता है। इसके अलावा जमीन और इमारतों की कीमतें भी बढ़ी हैं। नकद दान में केवल 5 से 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। - भारत के इन अमीर मंदिरों की संपत्ति का हिसाब-किताब कौन रखता है?
भारत के अमीर मंदिरों की संपत्ति का प्रबंधन अलग-अलग तरीकों से होता है। कुछ मंदिर राज्य सरकारों के अधीन हैं जैसे तिरुपति की देखरेख तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) बोर्ड करता है। पद्मनाभस्वामी मंदिर सुप्रीम कोर्ट और एक उच्च स्तरीय कमेटी की निगरानी में है। काशी विश्वनाथ ट्रस्ट उत्तर प्रदेश सरकार के अंतर्गत काम करता है। इन सभी की संपत्ति के आंकड़े मंदिर ट्रस्टों के ऑडिट, विश्व स्वर्ण परिषद, टीटीडी बोर्ड और राज्य सरकारों के डेटा पर आधारित हैं।
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