आधार कार्ड नहीं है तो पीएम-दक्ष योजना में कैसे मिलेगा प्रशिक्षण? केंद्र सरकार ने बताए पहचान के नए नियम
केंद्र सरकार ने पहचान सत्यापन से जुड़े प्रावधान तय किए हैं। अब सवाल है कि प्रशिक्षण केंद्रों पर यह सुविधा कितनी आसानी से मिलेगी।
आधार नहीं है तो क्या करना होगा?
केंद्र सरकार की पीएम-दक्ष योजना में पात्र लोगों को रोजगार से जुड़ा कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है। इस योजना में पहचान सत्यापन के लिए आधार से जुड़ी व्यवस्था निर्धारित की गई है। जिन लोगों के पास आधार नंबर नहीं है उनके लिए भी विकल्प उपलब्ध हैं। ऐसे आवेदकों को सबसे पहले आधार नामांकन के लिए आवेदन करना होगा।
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के दौरान दूसरे मान्य दस्तावेजों से भी पहचान साबित की जा सकेगी। हालांकि इसके लिए आवेदक को योजना की पात्रता और दूसरी जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य आधार नहीं होने वाले पात्र लोगों को पहचान सत्यापन का दूसरा विकल्प देना है।
क्या है पीएम-दक्ष योजना?
पीएम-दक्ष केंद्र सरकार की कौशल प्रशिक्षण योजना है। इसका उद्देश्य वंचित वर्गों के लोगों को रोजगार से जोड़ना है। योजना के तहत पात्र लोगों को अलग-अलग कामों का प्रशिक्षण दिया जाता है। इससे उन्हें नौकरी पाने और अपना रोजगार शुरू करने में मदद मिल सकती है। योजना सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय से जुड़ी है। इसका लाभ लेने के लिए आवेदकों को तय पात्रता पूरी करनी होती है।
आधार सत्यापन फेल हुआ तो क्या होगा?
कई बार आधार से पहचान सत्यापित करने में तकनीकी परेशानी आ सकती है। ऐसे मामलों में आवेदकों के लिए दूसरे दस्तावेजों का विकल्प रखा गया है। अगर आधार आधारित सत्यापन सफल नहीं होता तो पात्र व्यक्ति दूसरी पहचान दिखा सकता है। इसके लिए सरकार की तय सूची में शामिल दस्तावेज स्वीकार किए जा सकेंगे। हालांकि कौन सा दस्तावेज मान्य होगा यह आवेदक की उम्र और श्रेणी पर निर्भर करेगा। सभी लोगों के लिए एक जैसे दस्तावेज जरूरी नहीं होंगे।
कौन से दस्तावेज दिखाने होंगे?
आधार कार्ड सत्यापन नहीं होने पर सरकार ने पहचान साबित करने के लिए कई विकल्प बताए हैं। इनमें मतदाता फोटो पहचान पत्र और राशन कार्ड शामिल हैं। भारतीय पासपोर्ट भी पहचान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा दसवीं या बारहवीं की मार्कशीट भी मान्य दस्तावेजों में शामिल है। कुछ मामलों में सरकारी चिकित्सा पहचान पत्र का इस्तेमाल भी किया जा सकेगा। सक्षम अधिकारी से जारी निर्धारित प्रमाण पत्र भी पहचान साबित करने का विकल्प हो सकता है। दस्तावेजों की स्वीकार्यता आवेदक की उम्र और तय शर्तों के अनुसार होगी।
आधार नामांकन केंद्र नहीं मिला तो?
नई व्यवस्था में संबंधित विभागों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। जहां आधार नामांकन की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी वहां जरूरी व्यवस्था करनी होगी। इसका मतलब है कि आवेदक को केवल अपने स्तर पर ही परेशानी का समाधान नहीं करना होगा। संबंधित विभाग को भी आधार नामांकन की सुविधा उपलब्ध कराने में अपनी भूमिका निभानी होगी। यह व्यवस्था खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
बच्चों के लिए क्या हैं नियम?
पहचान संबंधी प्रावधानों में आठ साल से कम उम्र के बच्चों के लिए अलग व्यवस्था बताई गई है। उनकी पहचान साबित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज इस्तेमाल हो सकते हैं।
इसके अलावा माता-पिता या कानूनी संरक्षक की सहमति से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। हालांकि बच्चों के लिए पहचान संबंधी व्यवस्था और पीएम-दक्ष में प्रशिक्षण की पात्रता अलग विषय हैं। आठ साल से कम उम्र के बच्चों को इस योजना में प्रशिक्षण मिलेगा। ऐसा दावा उपलब्ध जानकारी में नहीं किया गया है।
प्रशिक्षण केंद्रों की क्या जिम्मेदारी होगी?
नई व्यवस्था में प्रशिक्षण केंद्रों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। केंद्रों पर काम करने वाले कर्मचारियों को मान्य दस्तावेजों की जानकारी होना जरूरी है। अगर किसी आवेदक के पास आधार नहीं है तो उसे नामांकन की प्रक्रिया समझानी होगी। आधार सत्यापन सफल नहीं होने पर दूसरे दस्तावेजों का विकल्प भी बताना होगा।
इससे पात्र लोगों को बार-बार प्रशिक्षण केंद्र के चक्कर लगाने की परेशानी कम हो सकती है। हालांकि प्रशिक्षण केंद्रों के लिए शिकायत समाधान की अलग समयसीमा उपलब्ध जानकारी में नहीं बताई गई है।
गरीब और वंचित वर्गों को क्या फायदा?
पीएम-दक्ष योजना का उद्देश्य वंचित वर्गों के लोगों को कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। इसके जरिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की कोशिश की जाती है। कुछ पात्र आवेदकों के पास आधार संख्या उपलब्ध नहीं हो सकती। ऐसे लोगों के लिए पहचान की वैकल्पिक व्यवस्था मददगार साबित हो सकती है। इससे पहचान सत्यापन में आने वाली परेशानी कम होने की उम्मीद है। हालांकि प्रशिक्षण में प्रवेश मिलने के लिए योजना की सभी शर्तें पूरी करनी होंगी।
क्या बिना आधार सीधे मिलेगा प्रशिक्षण?
इस सवाल का जवाब समझना जरूरी है। नई व्यवस्था का मतलब बिना पहचान सत्यापन के प्रशिक्षण मिलना नहीं है। आधार नहीं होने पर आवेदक को नामांकन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस दौरान निर्धारित दस्तावेजों से अपनी पहचान साबित करने का विकल्प उपलब्ध रहेगा। इसके अलावा आवेदक को योजना की पात्रता भी पूरी करनी होगी। प्रशिक्षण मिलने का अंतिम फैसला लागू नियमों के अनुसार ही होगा।
आवेदन में परेशानी हो तो क्या करें?
जिन पात्र लोगों के पास आधार नहीं है उन्हें पहले नामांकन के लिए आवेदन करना चाहिए। इसके लिए नजदीकी अधिकृत आधार नामांकन केंद्र की मदद ली जा सकती है। आवेदन के बाद मिली नामांकन पावती सुरक्षित रखनी चाहिए। पहचान से जुड़े दूसरे जरूरी दस्तावेज भी तैयार रखने होंगे। अगर आधार सत्यापन में परेशानी आती है तो संबंधित विभाग या प्रशिक्षण केंद्र से जानकारी लेनी चाहिए। इससे आवेदक को उपलब्ध विकल्पों और आगे की प्रक्रिया का पता चल सकेगा।
अब सरकार के सामने क्या चुनौती?
केंद्र सरकार ने पहचान सत्यापन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बताई है। अब इसे सही तरीके से लागू करना संबंधित विभागों के लिए महत्वपूर्ण होगा। सबसे बड़ा सवाल उन लोगों को लेकर है जो दूरदराज के इलाकों में रहते हैं। क्या उन्हें समय पर आधार नामांकन और पहचान सत्यापन की सुविधा मिल पाएगी? क्या प्रशिक्षण केंद्रों पर सभी मान्य दस्तावेज स्वीकार किए जाएंगे? क्या तकनीकी परेशानी आने पर आवेदकों को जल्द समाधान मिलेगा? इन सवालों के जवाब से ही पता चलेगा कि नई व्यवस्था का पात्र लोगों को कितना फायदा मिला।
FAQs
- पीएम-दक्ष योजना में आधार कार्ड नहीं है तो क्या प्रशिक्षण मिल सकता है?
पात्र आवेदकों के लिए आधार नामांकन और वैकल्पिक पहचान सत्यापन की व्यवस्था बताई गई है। हालांकि प्रशिक्षण के लिए योजना की दूसरी शर्तें भी पूरी करनी होंगी। - आधार सत्यापन फेल होने पर कौन से दस्तावेज दिखा सकते हैं?
निर्धारित शर्तों के तहत मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज मान्य हो सकते हैं। पासपोर्ट और शैक्षणिक प्रमाण पत्र भी विकल्पों में शामिल हैं। - पीएम-दक्ष योजना का लाभ किसे मिलता है?
यह योजना निर्धारित पात्रता वाले वंचित वर्गों के लोगों के कौशल प्रशिक्षण के लिए है। इसमें प्रशिक्षण से जुड़ी पात्रता और दूसरी शर्तें लागू होती हैं।