त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनखड़ की संदिग्ध मौत, पुलिस मुख्यालय में मिला शव, सुसाइड की आशंका
समझें क्या है पूरा मामला...
- त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनखड़ पुलिस मुख्यालय में अचेत हालत में पाए गए।
- अधिकारी उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए।
- वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
- पुलिस की शुरुआती जांच में इसे सुसाइड बताया जा रहा है।
बता दें कि अनुराग धनखड़ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के रहने वाले थे। वह 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी थे। पुलिस के अनुसार सोमवार, 20 जुलाई की सुबह जब वह पुलिस मुख्यालय में अचेत अवस्था में मिले, तो वहां मौजूद अधिकारियों में हड़कंप मच गया।
अधिकारियों ने बिना देर किए उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। लेकिन डॉक्टरों की टीम उन्हें बचा नहीं सकी। जांच में जुटी टीम के मुताबिक यह मामला आत्महत्या का लग रहा है। हालांकि पुलिस अभी हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है।
फिलहाल उनका शव अगरतला के गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल में रखा गया है। पुलिस और फॉरेंसिक टीम घटनास्थल पर सबूत जुटा रही हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारणों की पुष्टि हो सकेगी।
एक लंबा और अनुभवी करियर
बता दें कि अनुराग धनखड़ का पुलिस करियर काफी विस्तृत रहा है। वह 1984 के सिख विरोधी दंगों की जांच के लिए बनी SIT के प्रमुख भी रह चुके थे। यह जिम्मेदारी उनकी काबिलियत का बड़ा सबूत मानी जाती है।
साल 2003-04 में उन्होंने UN के कोसोवो मिशन में भी सेवाएं दी थीं। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पुलिस सेवा की छवि को मजबूत करने वाला काम था।
इसके बाद 2005 से 2013 तक वह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहे। इस दौरान उन्होंने CBI में SP और DIG के पद संभाले।
साल 2013 से 2016 तक उन्हें त्रिपुरा में IG लॉ एंड ऑर्डर की जिम्मेदारी मिली। फिर 2016 से 2023 तक वह दोबारा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए। इस दौरान उन्होंने BPR&D, CISF और CBI में काम किया।
त्रिपुरा में डीजीपी तक का सफर
सितंबर 2023 में अनुराग धनखड़ त्रिपुरा में ADGP बने। इसके बाद उन्हें कानून-व्यवस्था और इंटेलिजेंस दोनों की जिम्मेदारी सौंपी गई। अपने अनुभव और काम के दम पर वह बाद में त्रिपुरा के डीजीपी बनाए गए।
शिक्षा और विशेषज्ञता
अनुराग धनखड़ सिर्फ प्रशासनिक अनुभव में ही नहीं, बल्कि शिक्षा में भी आगे थे। उन्होंने फूड टेक्नोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन किया था। इसके अलावा पुलिस मैनेजमेंट में मास्टर्स डिग्री और साइबर क्राइम में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी हासिल किया था।
वह फ्रॉड मामलों की जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित विशेषज्ञ भी माने जाते थे। अपने करियर के दौरान उन्हें पुलिस मेडल और राष्ट्रपति पुलिस पदक जैसे सम्मान भी मिल चुके थे।
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