अमेरिका-ईरान युद्ध खत्म? ट्रंप ने Congress को चिट्ठी लिखी, ईरान की नेवी-एयरफोर्स तबाह
Iran America War Update:ईरान और अमेरिका के बीच 28 फरवरी से जारी सैन्य संघर्ष पर आखिरकार विराम लग गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संसद को आधिकारिक पत्र लिखकर इस युद्ध के खात्मे का ऐलान कर दिया है।
ट्रंप का दावा है कि अप्रैल की शुरुआत से ही दोनों देशों के बीच गोलीबारी बंद है, जिसके चलते 'वॉर पावर्स रिजोल्यूशन' की 60 दिनों की समयसीमा का मुद्दा अब बेमानी हो गया है। हालांकि, ईरान के बातचीत के प्रस्तावों और अमेरिकी सेना की मौजूदगी को लेकर अभी भी राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं।
ट्रंप बोले- जंग अब खत्म हो गई
अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी 2026 को बड़ा सैन्य संघर्ष शुरू हुआ था। ट्रंप ने अमेरिकी संसद को चिट्ठी लिखकर कहा कि यह जंग अब खत्म हो गई है। वॉर पावर्स रिजोल्यूशन की 60 दिन की समयसीमा 01 मई को पूरी हो गई है।
ईरान ने पाकिस्तान के जरिए बातचीत का प्रस्ताव भेजा लेकिन ट्रंप ने उसे नामंजूर कर दिया। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका धमकी बंद करे तो वे बात करने को तैयार हैं।
ट्रंप की चिट्ठी में क्या था?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाउस स्पीकर माइक जॉनसन और सीनेट के वरिष्ठ नेता चक ग्रासली को एक आधिकारिक पत्र भेजा था। इसमें उन्होंने लिखा था कि 28 फरवरी 2026 से शुरू हुई शत्रुता अब खत्म हो चुकी है।
पोलिटिको की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने साफ कहा कि 07 अप्रैल 2026 के बाद से दोनों देशों के बीच कोई गोलीबारी नहीं हुई है।
यह चिट्ठी उस बहस को खत्म करने की कोशिश थी जिसमें पूछा जा रहा था कि क्या इस सैन्य कार्रवाई के लिए अमेरिकी संसद यानी कांग्रे की मंजूरी जरूरी थी। हालांकि ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि ईरान से खतरा पूरी तरह टला नहीं है और अमेरिकी सेना उस इलाके में मौजूद रहेगी।
वॉर पावर्स रिजोल्यूशन क्या है?
1973 में बना वॉर पावर्स रिजोल्यूशन एक अमेरिकी कानून है। इसके तहत राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई की जानकारी कांग्रेस को देने के बाद 60 दिनों के भीतर उसे खत्म करना होता है। कांग्रेस मंजूरी न दे तो कार्रवाई जारी नहीं रख सकते हैं।
ट्रंप प्रशासन ने 02 मार्च को कांग्रेस को इस सैन्य अभियान की औपचारिक जानकारी दी थी। इस हिसाब से 60 दिन की समयसीमा 01 मई को खत्म हो गई है। लेकिन व्हाइट हाउस का तर्क है कि अप्रैल की शुरुआत में युद्धविराम (america iran war update) होने के बाद यह समयसीमा अपने आप रुक गई है।
डेमोक्रेट नेताओं ने उठाए सवाल
इस पूरे मामले पर अमेरिका में राजनीतिक हलचल मच गई है। कई डेमोक्रेट नेताओं का कहना है कि ट्रंप कानून से बचने की कोशिश कर रहे हैं। सीनेटर टिम केन और एडम शिफ ने कहा कि सिर्फ बमबारी रोक देने से युद्ध खत्म नहीं माना जा सकता। उनका तर्क है कि अमेरिकी सेना अभी भी उस इलाके में सक्रिय है, इसलिए 60 दिन की समयसीमा खत्म नहीं हुई।
ईरान के प्रस्ताव पर ट्रंप का जवाब
ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता से गुरुवार रात अमेरिका को एक प्रस्ताव भेजा। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इसे तुरंत खारिज कर दिया। फ्लोरिडा के एक कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा, "वे समझौता करना चाहते हैं, लेकिन मैं इससे संतुष्ट नहीं हूं।" सीएनएन (CNN) के मुताबिक उन्होंने यह भी कहा कि जंग जल्दबाजी में खत्म नहीं होगी ताकि तीन साल बाद फिर वही समस्या खड़ी न हो।
ट्रंप ने ईरान की आंतरिक स्थिति को भी कमजोर बताया। उन्होंने कहा कि तेहरान के नेता आपस में ही एकमत नहीं हैं, इसलिए कोई ठोस समझौता सामने नहीं आ पा रहा। यही वजह है कि बातचीत पटरी पर नहीं आ पा रही।
ईरान की सैन्य ताकत पर ट्रंप का दावा
ट्रंप ने दावा किया कि इस संघर्ष (ईरान अमेरिका जंग अपडेट) के बाद ईरान की सैन्य ताकत काफी कमजोर हो गई है। उनके अनुसार ईरान के पास अब कोई नौसेना और कोई वायु सेना नहीं बची है। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कहा कि वे ईरान को पूरी तरह तबाह नहीं करना चाहते।
उन्होंने कहा कि क्या हम जाकर उसे पूरी तरह बर्बाद कर दें या समझौते की कोशिश करें? मैं मानवीय आधार पर ऐसा नहीं करना चाहूंगा। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर बातचीत विफल रही तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रहेगा।
ईरान ने क्या कहा?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि वे अमेरिका के साथ दोबारा बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन शर्त यह है कि अमेरिका धमकी भरी भाषा बंद करे। प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, अराघची ने तुर्किये, कतर, सऊदी अरब, मिस्र, इराक और अजरबैजान के अपने समकक्षों को मौजूदा हालात की जानकारी दी।
अराघची ने यह भी कहा कि ईरान ने यह युद्ध शुरू नहीं किया था और उसकी सेना किसी भी नए हमले का जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने माना कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई बातचीत में ईरान ने ईमानदारी से हिस्सा लिया। लेकिन अमेरिका पर भरोसा कम है क्योंकि पहले भी उसने अपने वादे पूरे नहीं किए।
आगे क्या होगा?
अभी दोनों देशों के बीच कोई पक्की डील नहीं हुई है। ट्रंप ने कूटनीति और सैन्य कार्रवाई दोनों विकल्प खुले रखे हैं। ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका के रुख से खुश नहीं है। ऐसे में यह तनाव अभी और कितना खिंचेगा, यह देखने वाली बात होगी।
ये खबरें भी पढ़िए...
अमेरिका ईरान जंग: ट्रंप ने फिर ठुकराया ईरान का जंग रोकने का प्रस्ताव, परमाणु मुद्दे पर नाखुश
अमेरिका इस दिन देगा 166 अरब डॉलर टैरिफ रिफंड, भारत को करोड़ों का हो सकता है फायदा
नोबेल शांति पुरस्कार: 287 नाम शॉर्टलिस्ट, ट्रंप का नाम भी हो सकता शामिल
घर लौट आओ, भारत को आपकी जरूरत है, Zoho के फाउंडर की अमेरिका में बसे भारतीयों से अपील