ईरान-इजराइल युद्ध के बीच ट्रंप का टैरिफ बम: स्टील पर 25%, दवाओं पर 100% का लगाया भारी टैक्स

Amresh Kushwaha | Apr 03, 2026, 08:56 IST
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ट्रंप ने विदेशी ब्रांडेड दवाओं पर 100% और स्टील-एल्युमीनियम जैसे मेटल उत्पादों पर 25% टैरिफ का ऐलान किया। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने टैरिफ रद्द होने और 166 अरब डॉलर वापसी की मार के बाद ट्रंप ने यह नई नीति लागू की है।

News In Short

  • ट्रंप ने विदेश में बनी ब्रांडेड दवाओं पर 100% टैरिफ का आदेश दिया है।
  • स्टील, एल्युमीनियम और तांबे पर शुल्क 50% से घटाकर 25% किया गया है।
  • बड़ी फार्मा कंपनियों को नए नियम मानने के लिए 120 दिन मिले हैं।
  • यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया के लिए टैरिफ सीमा 15% रखी गई है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने पुराने टैरिफ गैरकानूनी बताए, 166 अरब डॉलर वापस करने पड़े थे।

News In Detail

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी व्यापार नीति में बड़ा उलटफेर किया है। उन्होंने विदेशी ब्रांडेड दवाओं पर 100% तक का भारी आयात शुल्क लगाने का आदेश दिया है। साथ ही स्टील, एल्युमीनियम और तांबे जैसे धातु उत्पादों के टैरिफ नियमों में भी बड़ा बदलाव किया गया है।



दवाओं पर लागाया 100% टैरिफ

ट्रंप का साफ संदेश है। विदेशी दवा कंपनियों को या तो अमेरिका में अपना उत्पादन शुरू करना होगा, या फिर भारी टैक्स चुकाना होगा। जो कंपनियां आंशिक रूप से भी अमेरिका में उत्पादन शिफ्ट करेंगी, उन पर 20% टैरिफ लगेगा। वहीं, जो कंपनियां इस आदेश को नहीं मानेंगी, उन पर पूरे 100% की दर से शुल्क वसूला जाएगा।



यूरोपीय संघ (European Union), जापान और दक्षिण कोरिया जैसे करीबी व्यापारिक साझेदारों के लिए यह सीमा 15% रखी गई है। यह थोड़ी राहत जरूर है, पर दबाव बरकरार है।



बड़ी कंपनियों को 120 दिन, छोटी को 180 दिन

ट्रंप प्रशासन ने बड़ी फार्मा कंपनियों को नए नियम लागू करने के लिए 120 दिन का वक्त दिया है। छोटे निर्माताओं को 180 दिनों की मोहलत मिली है। इस अवधि के बाद ही सबसे ऊंची टैरिफ दरें लागू होंगी। सरकार का कहना है कि यह एक तरह का रीसेट बटन है। इससे पुराने व्यापारिक घाटे की भरपाई होगी और अमेरिकी बाजार को विदेशी कंपनियों की मनमानी से बचाया जाएगा।



मेटल टैरिफ में क्या-क्या बदला?

स्टील, एल्युमीनियम और तांबे पर लगने वाले टैक्स के नियम भी पूरी तरह बदल गए हैं। कई मेटल उत्पादों पर शुल्क 50% से घटाकर 25% कर दिया गया है। जिन उत्पादों में धातु की मात्रा 15% से कम है, उन्हें टैक्स से पूरी तरह छूट दी गई है।



यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि घरेलू उद्योगों को सस्ता कच्चा माल मिले और देश का बुनियादी ढांचा मजबूत हो। बिजली ग्रिड और औद्योगिक उपकरणों पर शुल्क को 50% से घटाकर 15% कर दिया गया है। इसके अलावा, टैरिफ अब धातु की मात्रा पर नहीं बल्कि अमेरिकी ग्राहक के पूरे भुगतान मूल्य पर लगेगा। इससे अंडर-रिपोर्टिंग यानी जानबूझकर आयात मूल्य कम दिखाने की चालाकी बंद होगी।



उद्योग जगत ने क्या कहा?

स्टील इंडस्ट्री ने इस फैसले का खुलकर स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह घरेलू उत्पादन के लिए संजीवनी है। दूसरी तरफ, व्यापारिक संगठनों ने चिंता जताई है। उनके मुताबिक अचानक टैक्स बढ़ने से स्वास्थ्य सेवाओं की लागत बढ़ सकती है। ऊर्जा संकट के कारण पहले से महंगाई का दबाव है। इन नए टैरिफ का असर सीधे आम जनता की जेब पर पड़ सकता है।



साल 2025 से जुड़ी है टैरिफ की जड़ें

इस पूरे मामले की जड़ पिछले साल में है। ट्रंप ने लिबरेशन डे (Liberation Day) यानी मुक्ति दिवस के नाम पर आईईईपीए (IEEPA - International Emergency Economic Powers Act) कानून के तहत दुनियाभर पर भारी टैरिफ लगा दिए थे। इससे कई देश नाराज हो गए और मामला अदालत तक पहुंचा था।



सुप्रीम कोर्ट ने पलटा फैसला, भरना पड़ा 166 अरब का नुकसान

इसी साल फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के उन पुराने टैरिफ को गैरकानूनी करार दे दिया। इसके बाद सरकार को उन कंपनियों और देशों को करीब 166 अरब डॉलर वापस करने पड़े जिनसे यह टैक्स वसूला गया था। यह झटका बड़ा था। अब इसी नुकसान की भरपाई और अपनी नीति को नया रूप देने के लिए ट्रंप यह नए नियम लेकर आए हैं।



भारत पर इन नए टैरिफ का क्या असर होगा?

अमेरिका का यह टैरिफ फैसला वैश्विक व्यापार को सीधे प्रभावित करता है। भारत समेत कई देश अमेरिका को दवाएं, स्टील और एल्युमीनियम निर्यात करते हैं। इन नए शुल्कों से भारतीय दवा उद्योग और धातु निर्यातकों पर असर पड़ सकता है। भारत की कई फार्मा कंपनियां अमेरिकी बाजार में जेनेरिक दवाएं बेचती हैं। 100% तक के अमरीकी टैरिफ से उनकी प्रतिस्पर्धा क्षमता कमजोर हो सकती है।



अब सबकी नजर इस बात पर है कि विदेशी कंपनियां इन कड़े नियमों के सामने झुकती हैं या अमेरिकी बाजार में कीमतों का नया दौर शुरू होता है।



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