टैरिफ पर ट्रंप का फिर यू-टर्न, रूस से तेल खरीदने पर भारत-चीन समेत 5 देशों को राहत, नहीं लगेगा 100% टैरिफ
क्या था 100% टैरिफ लगाने का प्लान?
ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 पर हस्ताक्षर किए थे। इस कानून का मकसद रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बनाना था।
इसके तहत रूस से सबसे ज्यादा तेल और गैस खरीदने वाले पांच देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान था। इन देशों में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं।
इस बिल को अगस्त 2026 में अमेरिकी सीनेट ने 86 के मुकाबले 11 वोटों से पास किया था।
ट्रंप ने अब क्यों बदला फैसला?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल इन प्रतिबंधों और शुल्कों से छूट देने का फैसला किया है। उन्होंने इसके पीछे अमेरिका के राष्ट्रीय हित को वजह बताया है।
हालांकि, आदेश में यह विस्तार से नहीं बताया गया कि छूट देने के पीछे और कौन-कौन से कारण हैं। इस फैसले से साफ है कि अमेरिकी प्रशासन फिलहाल रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त व्यापारिक कार्रवाई करने से बच रहा है।
भारत को कैसे मिलेगा फायदा?
भारत अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। यदि अमेरिका भारतीय सामान पर 100% अतिरिक्त Import Tariff लगाता, तो अमेरिका में भारतीय उत्पाद महंगे हो सकते थे। इससे भारतीय निर्यातकों को नुकसान होने की आशंका थी।
अब इस प्रस्तावित शुल्क से राहत मिलने पर भारतीय कारोबारियों को फायदा होने की उम्मीद है।
इससे पहले भी रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ चुका है। साल 2025 में ट्रंप प्रशासन ने भारत से आने वाले सामान पर रूसी तेल खरीदने के कारण 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। इसके अलावा 25% पारस्परिक टैरिफ भी लागू किया गया था।
फरवरी 2026 में रूसी तेल से जुड़ा अतिरिक्त शुल्क हटा दिया गया था। वहीं, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के ढांचे के तहत पारस्परिक टैरिफ घटाकर 18% कर दिया गया था।
क्या है ग्राहम एक्ट की धारा 115?
ग्राहम एक्ट की धारा 115 अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ प्रतिबंधों और टैरिफ से छूट देने का अधिकार देती है।
इसके लिए राष्ट्रपति को अमेरिकी कांग्रेस को लिखित प्रमाणपत्र देना होता है। इसमें बताना होता है कि छूट देना अमेरिका के हित में क्यों जरूरी है।
ट्रंप ने अपने आदेश में कहा है कि वह कांग्रेस को यह प्रमाणपत्र सौंप चुके हैं। इसी आधार पर उन्होंने National Interest का हवाला देते हुए कुछ प्रतिबंधों और शुल्कों से छूट दी है।
रूस से तेल खरीदने वाले किन देशों को राहत?
इस फैसले से भारत और चीन के अलावा स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान को भी राहत मिलने की उम्मीद है। ये पांचों देश संबंधित कानून के दायरे में बताए गए हैं।
हालांकि, यह राहत इसी कानून के तहत प्रस्तावित प्रतिबंधों और शुल्कों से जुड़ी है। इसका मतलब यह नहीं है कि इन देशों के सामान पर अमेरिका के सभी दूसरे टैरिफ भी खत्म हो गए हैं।
फिलहाल ट्रंप के फैसले से रूस से तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ प्रस्तावित 100% अतिरिक्त टैरिफ लागू होने का खतरा टल गया है।