डोनाल्ड ट्रंप ने फिर उठाया वोटर फ्रॉड का मुद्दा, जांच में नहीं मिला था कोई सबूत
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वोटर फ्रॉड का मामला उठाया है। ट्रंप ने आरोप लगाते हुए कहा है कि 2020 US presidential election में बड़ी गड़बड़ी हुई थी। हालांकि इस मामले को लेकर अदालतों में सुनवाई भी की गई थी। मामले की जांच के बाद एजेंसियों को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे राष्ट्रपति चुनाव में वोटर फ्रॉड की पुष्टि हो सके।
2020 में बाइडेन की जीत के बाद ट्रंप प्रशासन के न्याय विभाग और सुरक्षा एजेंसियों ने चुनाव की समीक्षा की थी। अधिकारियों ने चुनाव को निष्पक्ष सुरक्षित और विश्वसनीय बताया था। इसके बावजूद ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में यह मुद्दा फिर उठा रहे हैं।
इस बीच ट्रंप ने इस मुद्दे से जुड़े अधिकारियों और सहयोगियों को महत्वपूर्ण पद दिए हैं। इनमें कई लोग उनके चुनावी धांधली के दावों का समर्थन कर चुके हैं। हालांकि उनके कई नामांकित अधिकारियों ने 2020 चुनाव के विजेता पर सीधा जवाब नहीं दिया।
जीत से किया इनकार
राष्ट्रीय खुफिया निदेशक पद के लिए ट्रंप के उम्मीदवार जे क्लेटन से सीनेटर मार्क केली ने पूछा कि 2020 का चुनाव किसने जीता। जवाब में क्लेटन ने कहा कि बाइडेन को सबसे अधिक इलेक्टोरल वोट मिले और वह विजेता बने। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार करने से इनकार किया कि बाइडेन चुनाव जीते थे।
सहयोगियों को चुकानी पड़ी कीमत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी वोटर फ्रॉड (Donald Trump voter fraud claim) को लेकर धांधली का आरोप लगाते रहे हैं। ट्रंप के अधिकारियों को इन आरोपों के चलते मानहानि का सामना करना पड़ा है।
चुनाव विशेषज्ञों की राय
चुनाव विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले छह वर्षों की जांचों में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला। अदालतों के फैसलों और खुफिया रिपोर्टों में भी व्यापक धांधली या विदेशी हस्तक्षेप की पुष्टि नहीं हुई।
अटॉर्नी जनरल विलियम का बयान
ट्रंप के तत्कालीन अटॉर्नी जनरल विलियम बार ने भी कहा था कि चुनाव परिणाम बदलने लायक कोई बड़ी धांधली नहीं हुई। वहीं, अमेरिकी साइबर सुरक्षा एजेंसी के तत्कालीन प्रमुख क्रिस क्रेब्स ने 2020 के चुनाव को अमेरिकी इतिहास के सबसे सुरक्षित चुनावों में से एक बताया था। इसके बाद ट्रंप ने उन्हें पद से हटा दिया था।
सत्ता में लौटते ही जांच कराई
डोनाल्ड ट्रंप ने 2025 में राष्ट्रपति बनने के बाद 2020 चुनाव की जांच कराई। जांच के दौरान जॉर्जिया के फुल्टन काउंटी और एरिजोना के मैरिकोपा काउंटी से मतदान रिकॉर्ड जब्त किए गए। इन दोनों क्षेत्रों का नाम 2020 चुनाव विवादों में आया था। दोबारा जांच में एजेंसियों को कोई नया सबूत नहीं मिला।
मीडिया संस्थानों पर गिरी गाज
चुनाव में धांधली का आरोप लगाने की कीमत सिर्फ ट्रंप के अधिकारियों को नहीं चुकानी पड़ी। बल्कि इसका खामियाजा मीडिया संस्थानों को भी चुकाना पड़ा। फॉक्स न्यूज ने वोटिंग मशीन कंपनियों से जुड़े मानहानि के मुकदमे को निपटाने के लिए 787.5 मिलियन डॉलर का भुगतान किया था। वहीं न्यूजमैक्स और वन अमेरिका न्यूज ने भी ऐसे मामलों में समझौते किए हैं। यह विवाद अमेरिका की राजनीति में बहस का विषय बना हुआ है। अब तक की आधिकारिक जांचों और न्यायिक फैसलों में 2020 चुनाव में व्यापक धांधली की पुष्टि नहीं हुई है।
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