किसान परिवार से निकले IAS तुकाराम मुंढे की दुनिया में चर्चा, न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया रॉक स्टार
समझें क्या है पूरा मामला
- न्यूयॉर्क टाइम्स ने तुकाराम मुंढे को अपने फ्रंट पेज पर जगह दी है।
- फूड सेफ्टी नियम सख्ती से लागू करने के लिए उन्हें 'रॉक स्टार' बताया।
- मुंढे महाराष्ट्र एफडीए के कमिश्नर और 2005 बैच के IAS अधिकारी हैं।
- उन्होंने एक्स पर रिपोर्ट का जवाब देते हुए गुड गवर्नेंस पर अपनी बात रखी।
- मुंढे ने NDTV YUVA-2026 के मंच पर भी अपनी बात रखी।
न्यूयॉर्क टाइम्स की हेडलाइन में मुंढे की चर्चा
यह रिपोर्ट एक दमदार हेडलाइन के साथ छापी गई है। अखबार की हेडलाइन में मुंढे को रॉक स्टार बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, सख्ती की वजह से वे लोगों के हीरो बन गए हैं। अखबार में छपे आर्टिकल में मुंबई और महाराष्ट्र में हुई फूड सेफ्टी छापेमार कार्रवाई का जिक्र है। ये छापे गंदे रेस्टोरेंट किचन, फूड प्रोसेसर और मशहूर खाने-पीने की जगहों पर पड़े हैं।
मुंढे की फूड सेफ्टी कार्रवाई से ग्राहक खुश
रिपोर्ट के मुताबिक, आम ग्राहक उनके सख्त रवैये की तारीफ करते हैं। दूसरी तरफ रेस्टोरेंट मालिक और लापरवाह संस्थान एक्शन से परेशान हैं। इसकी वजह मुंढे की सख्त जीरो-टॉलरेंस नीति बताई गई है। जीरो-टॉलरेंस यानी नियम तोड़ने पर तुरंत एक्शन लिया जाता है।
आईएएस तुकाराम मुंढे ने क्या जवाब दिया
न्यूयॉर्क टाइम्स की स्टोरी पर मुंढे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जवाब दिया। उन्होंने कहा, गुड गवर्नेंस हेडलाइन बनाने के बारे में नहीं है। यह बदलाव लाने के बारे में है। फूड सेफ्टी का असल मकसद लोगों की सुरक्षा करना है। साथ ही स्टैंडर्ड बनाए रखना और जनता का भरोसा जीतना है।
उन्होंने आगे लिखा कि नियम निष्पक्ष, निडर और एक जैसे तरीके से लागू हों, तो संस्थाओं पर भरोसा बढ़ता है। लोगों को यकीन होने लगता है कि सिस्टम काम करता है। उनके मुताबिक, न्यूयॉर्क टाइम्स महाराष्ट्र की ऐसी ही एक कहानी पेश करता है।
कौन हैं तुकाराम मुंढे
तुकाराम मुंढे 2005 बैच के आईएएस अधिकारी और महाराष्ट्र एफडीए के कमिश्नर हैं। वे बीड जिले के किसान परिवार से आते हैं। उन्होंने पिता के साथ खेतों में काम किया और बाजार में सब्जी भी बेची है। इसी दौरान पढ़ाई करके वे IAS बने।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 20 साल के करियर में उनका 25 बार तबादला हो चुका है। इसके बावजूद उन्होंने अपने काम के तरीके में कोई बदलाव नहीं किया। उनकी पहचान बिना डरे काम करने की है।
NDTV YUVA-2026 के मंच पर क्या बोले मुंढे
NDTV YUVA-2026 के मंच पर मुंढे ने कई मुद्दों पर बात की। इनमें करियर और कार्रवाई शामिल थे। उनसे सवाल हुआ कि उन्हें किसका डर सबसे ज्यादा है। उन्हें कई ऑप्शन दिए गए थे, जिसमें नेता, अधिकारी, पत्नी या ट्रांसफर ऑर्डर था।
तुकाराम मुंढे की युवाओं को सलाह
मुंढे ने सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी का मतलब पब्लिक सर्विस है, इससे ज्यादा या कम कुछ नहीं। इसे नौकरी की तरह नहीं, बल्कि एक रोल की तरह देखना होगा। अपना रोल समझना और उसे सराहना जरूरी है।
यह खबर क्यों जरूरी है
हर इंसान रोज बाहर का खाना किसी न किसी रूप में खाता है। इसलिए फूड सेफ्टी सीधे लोगों की सेहत से जुड़ा मामला है। जब कोई अधिकारी नियमों को निष्पक्ष और निडर ढंग से लागू करता है, तो आम लोगों का सिस्टम पर भरोसा बढ़ता है। यह खबर बताती है कि सख्ती और जनता की सुरक्षा के बीच रिश्ता है। साथ ही यह सवाल भी उठता है कि अकेले एक अधिकारी पर सिस्टम कितना टिक सकता है।
FAQs
- तुकाराम मुंढे कौन हैं?
वे 2005 बैच के IAS अधिकारी और महाराष्ट्र एफडीए के कमिश्नर हैं। वे बीड जिले के एक किसान परिवार से आते हैं। - न्यूयॉर्क टाइम्स ने तुकाराम मुंढे को रॉक स्टार क्यों कहा?
फूड सेफ्टी नियम सख्ती से लागू करने के लिए। मुंबई और महाराष्ट्र में गंदे रेस्टोरेंट किचन और फूड प्रोसेसर पर उनकी छापेमार कार्रवाई की वजह से अखबार ने यह लिखा। - तुकाराम मुंढे ने युवाओं को क्या सलाह दी?
उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी का मतलब पब्लिक सर्विस है। इसे नौकरी नहीं, एक रोल की तरह देखना चाहिए।