गोआ की अनोखी दिवाली परंपरा, यहां भगवान राम नहीं श्रीकृष्ण हैं हीरो, जानें यहां क्यों जलते हैं नरकासुर के पुतले
Aman Vaishnav | Oct 18, 2025, 12:34 IST
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स्त्री के हाथों मरने का श्रापImage credit : Aman Vaishnav
पौराणिक कथा के मुताबिक, नरकासुर एक बहुत क्रूर राजा था जिसने 16 हजार स्त्रियों को कैद कर लिया था। देवताओं की प्रार्थना पर श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की मदद से उसका वध किया। क्योंकि उसे एक स्त्री के हाथों मरने का श्राप था।
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दिवाली के असली नायक श्री कृष्णImage credit : Aman Vaishnav
गोआ की दिवाली में भगवान श्री कृष्ण को मुख्य हीरो माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन श्रीकृष्ण ने दुष्ट राक्षस नरकासुर का वध किया था।
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विशाल पुतले जलाने की परंपराImage credit : Aman Vaishnav
दशहरा में जैसे रावण का पुतला जलाते हैं, वैसे ही यहां नरक चतुर्दशी की सुबह बड़े-बड़े, डरावने नरकासुर के पुतले जलाए जाते हैं।
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बुराई पर अच्छाई की जीतImage credit : Aman Vaishnav
इस पर्व को shree krishna की नरकासुर पर विजय की याद में मनाया जाता है, जो अंधकार और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
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सुबह पुतला दहन का उत्सवImage credit : Aman Vaishnav
सबेरे सूरज निकलने के साथ ही, गांव और शहर के सब लोग मिलकर डरावने नरकासुर के पुतले जलाते हैं।
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16 हजार स्त्रियों को कराया आजादImage credit : Aman Vaishnav
नरकासुर को मारने के बाद श्रीकृष्ण ने उसकी कैद से सोलह हजार स्त्रियों को आजाद कराया।
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भारत की सबसे अनोखी दिवालीImage credit : Aman Vaishnav
देशभर में Diwali को श्रीराम की वापसी के रूप में मनाता है। (दिवाली 2025) वहीं गोआ में इसका मुख्य आकर्षण नरकासुर वध दिवस' यानी नरक चतुर्दशी है।
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नरक चतुर्दशी से दिवाली शुरूImage credit : Aman Vaishnav
गोआ में इस नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली के त्यौहार से ही दिवाली शुरू हो जाती है। वहां के लोग मानते हैं कि जब तक बुराई खत्म नहीं होती, तब तक असली दिवाली नहीं मनाई जा सकती।