यूपीआई के 10 साल में 12 हजार गुना बढ़ा लेन-देन, 11 देशों में पहुंचा भारतीय डिजिटल पेमेंट
समझें क्या है पूरा मामला...
- यूपीआई यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस को 10 साल पूरे हो गए हैं।
- वित्त वर्ष 2016-17 में सिर्फ 2 करोड़ ट्रांजैक्शन होते थे।
- अब वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा 24 हजार 162 करोड़ तक पहुंच गया है।
- यूपीआई अब 741 बैंकों और 11 देशों तक फैल चुका है।
- इसी बीच देश में एटीएम की संख्या घट रही है और नकदी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
यूपीआई के 10 साल पूरे
बता दें कि यूपीआई की शुरुआत 11 अप्रैल 2016 को हुई थी। तब सिर्फ 21 बैंक इससे जुड़े थे। 25 अगस्त 2016 को इसे आम जनता के लिए लॉन्च किया गया था।
शुरुआती साल में लेनदेन बहुत कम था। वित्त वर्ष 2016-17 में सिर्फ 2 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे, जिनकी कीमत महज ₹0.07 लाख करोड़ थी।
दस साल में यह तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में 24 हजार 162 करोड़ ट्रांजैक्शन दर्ज हुए। इनकी कुल कीमत 314 लाख करोड़ रुपए रही। यानी ट्रांजैक्शन की संख्या करीब 12 हजार गुना और रकम 4 हजार गुना से ज्यादा बढ़ी।
अब 11 देशों में यूपीआई
आज यूपीआई से 741 बैंक जुड़ चुके हैं। एक महीने में औसतन 2 हजार 365.8 करोड़ ट्रांजैक्शन होते हैं। इनकी मासिक रकम करीब 29.87 लाख करोड़ रुपए रहती है।
यूपीआई अब भूटान, नेपाल, सिंगापुर, यूएई, फ्रांस, श्रीलंका, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव तक पहुंच गया है। इन देशों में यूपीआई स्वीकार्यता या रेमिटेंस की सुविधा उपलब्ध है।
डिजिटल पेमेंट का दबदबा
वित्त वर्ष 2025-26 में देश के कुल डिजिटल भुगतान में यूपीआई की हिस्सेदारी 85 फीसदी रही। साल 2024 में दुनिया के रियल टाइम पेमेंट में भी यूपीआई की हिस्सेदारी 49 फीसदी दर्ज हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यूपीआई पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए।
एटीएम घटे, कैश बढ़ा
यूपीआई की तेज ग्रोथ के बीच एक उलटी तस्वीर भी सामने आई है। पिछले तीन साल में देश में करीब 5 हजार एटीएम कम हो गए हैं।
रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक जून 2023 में एटीएम की संख्या 2.59 लाख के अपने उच्चतम स्तर पर थी। अब यह घटकर 2.54 लाख रह गई है। इससे पहले जुलाई 2021 से मार्च 2023 के बीच एटीएम की संख्या करीब 19 हजार बढ़ी थी।
एटीएम घटने के बीच देश में नकदी की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। 15 जून तक सर्कुलेशन में करेंसी 43.17 लाख करोड़ रुपए के सबसे ऊंचे स्तर पर थी।
यह सालाना आधार पर 12.2 फीसदी की बढ़ोतरी है। जानकारों के अनुसार, एटीएम घटने की बड़ी वजह डिजिटल पेमेंट का बढ़ता प्रयोग है।
रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, यूपीआई ट्रांजैक्शन वैल्यू में हर 1 रुपए में डेबिट कार्ड के इस्तेमाल की हिस्सेदारी 2021 से 25 के बीच 14 पैसे कम हुई है।
सरकारी बनाम प्राइवेट बैंक
जानकारी के अनुसार सरकारी बैंकों की ऑनसाइट एटीएम संख्या 78 हजार 777 से घटकर 77 हजार 33 रह गई।
ऑफसाइट यानी ब्रांच से बाहर के एटीएम भी 59 हजार 646 से घटकर 57 हजाार 661 रह गए। वहीं प्राइवेट बैंकों ने ऑनसाइट एटीएम 41 हजार 426 से बढ़ाकर 45 हजार 438 कर दिए। लेकिन इन बैंकों ने भी ऑफसाइट एटीएम 35 हजार 549 से घटाकर 34 हजार 446 कर दिए।
FAQ
- यूपीआई कब लॉन्च हुआ था?
यूपीआई को 11 अप्रैल 2016 को 21 बैंकों के साथ पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया था। आम जनता के लिए यह 25 अगस्त 2016 को लॉन्च हुआ। अब यह 741 बैंकों और 11 देशों तक पहुंच चुका है। - देश में एटीएम की संख्या क्यों घट रही है?
डिजिटल पेमेंट बढ़ने से एटीएम पर निर्भरता कम हो रही है। बैंकों के लिए एटीएम का मेंटेनेंस महंगा और मुनाफा कम हो गया है। इसी वजह से पिछले तीन साल में करीब 5 हजार एटीएम घट गए। - बाजार में कितनी नकदी सर्कुलेशन में है?
15 जून तक देश में ₹43.17 लाख करोड़ की करेंसी सर्कुलेशन में थी। यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। सालाना आधार पर यह बढ़ोतरी 12.2 फीसदी रही।
ये खबरें भी पढ़िए...
RBI का नया प्रस्ताव: अब 10 महीने नहीं, 3 महीने में मिलेगा सस्ते लोन का फायदा!
अब दस हजार रुपए भेजते ही करना होगा एक घंटा इंतजार, RBI ला रहा है नया नियम
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, डिजिटल अरेस्ट की जांच अब CBI करेगी, RBI को भी दिया नोटिस
यूपीआई ट्रांजैक्शन लिमिट: शुल्क लगा तो क्या थमेगी भारत की डिजिटल क्रांति?