UPI Charges: क्या अब यूपीआई पेमेंट्स के लिए देने होंगे पैसे? जानिए सरकार का नया प्लान

Sanjay Dhiman | Apr 19, 2026, 18:19 IST
Photograph: (the sootr)
यूपीआई ट्रांजैक्शन पर चार्ज को लेकर केंद्र सरकार की नई प्लानिंग क्या है? जानिए आम आदमी पर इसका क्या असर पड़ेगा और कौन से ट्रांजैक्शन फ्री रहेंगे।

आजकल, UPI (Unified Payments Interface) भारत के हर छोटे-बड़े लेनदेन का हिस्सा बन चुका है। चाय की दुकान से लेकर मॉल तक, हर जगह यूपीआई से पेमेंट हो रहे हैं। 2016 में शुरू हुआ ये सिस्टम अब भारत के साथ-साथ विदेशों में भी अपनी पहचान बना चुका है।



लेकिन क्या अब इस मुफ्त सेवा का दौर खत्म हो जाएगा? क्या यूपीआई पेमेंट्स पर कुछ शुल्क भी लगेगा? चर्चा है कि क्या यह हमेशा मुफ्त रहेगा या सरकार की कोई नई प्लानिंग है।



क्या है यूपीआई की मुफ्त वाली व्यवस्था?

यूपीआई का सबसे बड़ा फायदा यही था कि ये पूरी तरह से मुफ्त था। 1 जनवरी 2020 से, सभी यूपीआई ट्रांजैक्शंस पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) जीरो था, यानी कि व्यापारी या ग्राहक दोनों को कोई शुल्क नहीं देना पड़ता था। सरकार ने इसके लिए बैंकों को 2000 करोड़ रुपए की सब्सिडी भी दी थी।



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क्या मुफ्त व्यवस्था को खत्म किया जाएगा?

हाल ही में एक संसदीय समिति ने चेतावनी दी है कि ये मुफ्त व्यवस्था लंबी अवधि तक नहीं चल सकती। रिपोर्ट के मुताबिक, 2000 करोड़ रुपए की सब्सिडी से सिर्फ 11% लागत ही पूरी होती है। अगर सिस्टम से कमाई नहीं होगी, तो नई तकनीक, सुरक्षा, और छोटे शहरों में विस्तार पर असर पड़ेगा।



सरकार का नया प्लान: "टियर रेवेन्यू मॉडल"

समिति ने एक "टियर रेवेन्यू मॉडल" की सलाह दी है। इसका मतलब ये है कि छोटे लेन-देन, जैसे कि आम आदमी के ट्रांजैक्शन, मुफ्त रहेंगे। लेकिन बड़ी कंपनियों या बड़े ट्रांजैक्शंस पर शुल्क लिया जा सकता है।



सरकार क्या कदम उठा सकती है?

सरकार ने संकेत दिए हैं कि अगर भविष्य में जरूरत पड़ी तो कुछ विशेष यूपीआई पेमेंट्स पर शुल्क लागू किया जा सकता है। इसका मतलब है कि छोटे व्यापारी और आम लोग अभी भी बिना किसी परेशानी के यूपीआई पेमेंट्स का इस्तेमाल कर सकेंगे।



बड़े पेमेंट्स पर शुल्क: क्या होगा असर?

अगर कोई बड़ा ट्रांजैक्शन हुआ, तो उस पर सरकार शुल्क लगा सकती है। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने भी इस पर सहमति जताई है। मतलब, अगर आप बड़े पेमेंट्स करते हैं, तो भविष्य में आपको कुछ शुल्क देना पड़ सकता है।



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क्या यह यूपीआई की सफलता पर खतरा

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि बिना शुल्क के सिस्टम लंबे समय तक चलना मुश्किल है। लेकिन आम जनता के लिए यह चिंता की बात नहीं है, क्योंकि 90% छोटे लेन-देन मुफ्त रहेंगे। इससे छोटे व्यापारियों और आम लोगों को राहत मिलेगी।



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