दस साल में UPI बना दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट प्लेटफार्म
भारत में डिजिटल पेमेंट्स की दुनिया में क्रांति लाने वाले UPI (Unified Payments Interface) ने 10 साल पहले अपनी शुरुआत की थी। इसे भारतीय रिजर्व बैंक की देखरेख में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 11 अप्रैल 2016 को लॉन्च किया।
आज यह दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बन चुका है। इस प्रणाली की शुरुआत ने न केवल भारत में डिजिटल लेन-देन को सरल बनाया, बल्कि इसे पूरी दुनिया के लिए एक रोल मॉडल बना दिया है।
भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी बना
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और NPCI ने मिलकर 11 अप्रैल 2016 को एक नई क्रांति की नींव रखी थी। उस समय कई विरोधियों ने कहा था कि भारत जैसे देश में यह सिस्टम कभी नहीं चलेगा।
लोगों को लगता था कि गरीब और कम पढ़े-लिखे लोग मोबाइल से पैसे कैसे भेजेंगे? लेकिन मोदी सरकार के इस 'डिजिटल विजन' ने दुनिया के बड़े-बड़े एक्सपर्ट्स को भी हैरान कर दिया है। आज यूपीआई भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी (Backbone) बन चुका है।
आंकड़ों की बाजीगरी: 12,000 गुना लंबी छलांग
अगर हम सरकारी रिपोर्ट और वित्त मंत्रालय के आंकड़ों पर नजर डालें, तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। साल 2016-17 में जब यह शुरू हुआ था, तब महज 2 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए थे, लेकिन साल 2025-26 आते-आते यह संख्या बढ़कर 24,162 करोड़ के पार चली गई है। यानी ट्रांजेक्शन की संख्या में लगभग 12,000 गुना की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सिर्फ संख्या ही नहीं, बल्कि पैसों के लेनदेन का मूल्य भी 7 हजार करोड़ से बढ़कर 314 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
ग्लोबल लीडर बना भारत: दुनिया भी मान रही है लोहा
आज भारत का यूपीआई सिर्फ देश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सात समंदर पार भी अपनी धक जमा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने खुद माना है कि ट्रांजेक्शन के मामले में यह दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम है। अब आप फ्रांस के एफिल टावर के पास हों या सिंगापुर के बाजार में, आप अपने फोन से पेमेंट कर सकते हैं। यह दिखाता है कि भारत अब टेक्नोलॉजी के मामले में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है।
आम आदमी की ताकत और वित्तीय समावेशन
यूपीआई ने बैंकिंग को हर घर और हर गरीब तक पहुंचा दिया है। पहले बैंक के चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन अब सब कुछ अंगूठे के एक क्लिक पर है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े शोरूम तक, हर जगह 'QR Code' ही असली राजा है। इसने न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई है, बल्कि आम जनता का समय और पैसा दोनों बचाया है। यह सच में डिजिटल लोकतंत्र का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है।
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