राशन की 99% चीजों के बढ़े दाम, दाल,तेल, चीनी और दूध सब महंगा

Aman Vaishnav | Aug 05, 2026, 08:31 IST
राशन की 99% चीजों के बढ़े दाम
अमेरिका और ईरान के बीच जंग शुरू होने के बाद से आम आदमी की रसोई लगातार महंगी हुई है। इस दौरान दाल और तेल सबसे ज्यादा महंगे हुए हैं। उपभोक्ता विभाग के डेटा के अनुसार 16 में से 15 जरूरी खाद्य चीजों के दाम बढ़ चुके हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू हुआ था।
  • तब से रसोई का सामान लगातार महंगा हो रहा है।
  • 16 प्रमुख खाद्य वस्तुओं में से 15 के दाम बढ़े हैं।
  • सबसे ज्यादा तेजी दालों और खाद्य तेलों में देखी गई है।
  • कमजोर मानसून और वैश्विक तनाव इसकी बड़ी वजह हैं।

दालें सबसे ज्यादा महंगी हुईं

बता दें कि अगस्त तक चना दाल 86.66 रुपए किलो पहुंच गई। 28 फरवरी को यह 82.01 रुपए किलो थी। अरहर दाल भी 117.50 से बढ़कर 123.46 रुपए किलो हो गई। यह बढ़ोतरी 5.07% रही।



विशेषज्ञों के मुताबिक कमजोर मानसून इसकी बड़ी वजह है। इस साल खरीफ सीजन में दालों की बुआई करीब 7% घट सकती है। कम बुआई से उत्पादन घटने की आशंका है। यही आशंका बाजार में दाम बढ़ा रही है।



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खाद्य तेलों में भी बड़ा उछाल

सरसों तेल की कीमत 188.88 से बढ़कर 196.44 रुपए लीटर हो गई। सोया तेल और पाम तेल दोनों में करीब 4.50% का इजाफा हुआ। मूंगफली तेल भी 197.81 से 205.73 रुपए लीटर पहुंच गया है।



खाद्य तेलों में तेजी की तीन बड़ी वजहें हैं। पहली, भारत की आयात पर निर्भरता ज्यादा है। दूसरी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल के दाम बढ़े हैं। तीसरी, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव ने आयात लागत बढ़ा दी है।



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चीनी, नमक और चावल भी महंगे

सिर्फ दाल और तेल ही नहीं, बाकी सामान भी महंगा हुआ है। चीनी 47.08 से बढ़कर 49.33 रुपए किलो हो गई। यह करीब 4.78% की बढ़ोतरी है। नमक में 4.02% और चावल में 3.63% का इजाफा देखा गया है।



दूध की कीमत में मामूली बढ़ोतरी हुई। यह 58 रुपए से बढ़कर 61 रुपये लीटर हो गया। आटे के दाम में सबसे कम बदलाव आया, सिर्फ 0.59%।



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त्योहारी सीजन में और बढ़ सकते हैं दाम

बता दें कि अगस्त से त्योहारों का सीजन शुरू हो रहा है। रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव, नवरात्र और दीपावली आने वाले हैं। इन त्योहारों के दौरान दाल और तेल की मांग और बढ़ती है।



अगर वैश्विक कीमतों और आयात लागत में राहत नहीं मिलती, तो दामों पर दबाव और बढ़ेगा। इसका सीधा असर आम आदमी की रसोई और घर के बजट पर पड़ेगा।



जानकारों की राय क्या है

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह बढ़ोतरी कई वजहों का नतीजा है। कमजोर मानसून के चलते खरीफ बुआई का रकबा घटा है। इससे दालों के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है।



खाद्य तेलों में भारत की आयात निर्भरता एक बड़ी कमजोरी है। वैश्विक बाजार में पाम ऑयल की कीमतें बढ़ने से आयात महंगा हुआ है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने स्थिति और मुश्किल बना दी है।



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