ईरान में घुसकर 'सर्जिकल स्ट्राइक': कमांडोज ने ईरानी पहाड़ों से अमेरिकी पायलट का किया ऐतिहासिक रेस्क्यू
News in Short
- ईरान ने अमेरिका का F-15 जेट गिराया, जिसके बाद घायल पायलट पहाड़ों में छिप गया।
- पायलट ने अपनी ट्रेनिंग के दम पर 36 घंटे तक ईरानी सेना को चकमा दिया।
- CIA ने अफवाह फैलाकर ईरान को भटकाया और गुप्त तकनीक से पायलट की लोकेशन खोजी।
- अमेरिकी कमांडोज ने भारी गोलीबारी और हवाई सुरक्षा के बीच जांबाज पायलट को सुरक्षित निकाला।
- तकनीक बचाने के लिए अमेरिका ने अपने ही फंसे हुए दो विमानों को खुद उड़ा दिया।
News in Detail
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी अब खौफनाक मोड़ ले चुकी है। शुक्रवार को ईरान ने अमेरिका का एक ताकतवर F-15 स्ट्राइक ईगल विमान मार गिराया। इस विमान के गिरने के बाद दो अमेरिकी पायलट ईरान में फंस गए। एक पायलट को तो जल्द ही सुरक्षित निकाल लिया गया था। लेकिन दूसरा अफसर, जो वेपन सिस्टम संभालता था, वह बुरी तरह घायल हो गया। वह ईरान के कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत के पथरीले पहाड़ों में छिप गया। उसके पास सिर्फ एक पिस्तौल थी और बचने की उम्मीदें बहुत ही कम थीं।
36 घंटे का वो खौफनाक मंजर और CIA की चालाकी
घायल एयरमैन ने अपनी ट्रेनिंग का इस्तेमाल कर खुद को गुफाओं में छिपाया। उधर ईरानी सेना (IRGC) के जवान उसे शिकारी कुत्तों की तरह ढूंढ रहे थे। उस पर ईरान ने बड़ा इनाम भी घोषित कर दिया था ताकि कोई उसे पकड़वा दे। तब मैदान में उतरी दुनिया की सबसे शातिर जासूसी एजेंसी CIA और बड़ा खेल खेला। उन्होंने ईरान में यह अफवाह फैला दी कि पायलट को निकाला जा चुका है। इस झूठ से ईरानी सेना का ध्यान भटक गया और उनकी दिशा बदल गई। इसी बीच CIA ने बीकन सिग्नल से उसकी असली लोकेशन का पता लगा लिया।
स्पेशल कमांडो और आसमान से बरसती आग
लोकेशन मिलते ही राष्ट्रपति ट्रम्प ने बिना देरी किए हमले की मंजूरी दे दी। शनिवार को दर्जनों अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के उस इलाके को घेर लिया। स्पेशल कमांडो की टीम नीचे उतरी तो वहां भारी गोलीबारी शुरू हो गई। अमेरिकी रीपर ड्रोन्स ने ऊपर से ईरानी सेना पर बमबारी शुरू कर दी। रेस्क्यू टीम ने घायल जाबाज को दुश्मन के जबड़े से सुरक्षित बाहर निकाला। हालांकि, इस मिशन में अमेरिका के दो ट्रांसपोर्ट विमान एक जगह फंस गए थे। सैनिकों ने उन्हें खुद ही उड़ा दिया ताकि तकनीक दुश्मन के हाथ न लगे।
ट्रम्प बोले- यह तो असली इतिहास है
इस जांबाज मिशन के सफल होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसी और खतरनाक रेस्क्यू ऑपरेशन करार दिया। ट्रम्प ने कहा कि हमारे सैनिकों ने साबित कर दिया कि हम अपराजेय हैं। उन्होंने बताया कि पायलट अब कुवैत के अस्पताल में सुरक्षित इलाज करा रहा है। पहली बार दुश्मन के इलाके के अंदर घुसकर दो-दो पायलट बचाए गए हैं। यह ऑपरेशन अमेरिका की सैन्य ताकत और उसकी तकनीक का एक बड़ा सबूत है। पूरे अमेरिका में अब इस मिशन की कामयाबी का जश्न मनाया जा रहा है।
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