उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: टीनेज लिव-इन कपल को UCC रजिस्ट्रेशन का आदेश

Anjali Dwivedi | Jun 14, 2026, 15:38 IST
लिव-इन के लिए UCC जरूरी
उत्तराखंड हाईकोर्ट में यूसीसी के लिव-इन रजिस्ट्रेशन नियमों को चुनौती दी गई है। किशोर जोड़ों की सुरक्षा और निजता के अधिकार पर कोर्ट में सुनवाई जारी है।

उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 को UCC (Uniform Civil Code) लागू होने के बाद लिव-इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो गया है। इसके खिलाफ नैनीताल हाईकोर्ट में युवाओं की याचिका पर सुनवाई जारी है। इसी बीच, कोर्ट ने धमकियों का सामना कर रहे एक टीनेज कपल को बड़ी राहत दी है।



अदालत ने पुलिस को इस लिव-इन कपल को सुरक्षा देने का आदेश दिया है। साथ ही, कोर्ट ने उन्हें यूसीसी नियमों के तहत रजिस्ट्रेशन कराने को भी कहा है। यह कपल बालिग होने के बाद आपस में कानूनी रूप से शादी करना चाहता है।



क्या है पूरा मामला

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे एक टीनेज कपल को बड़ी राहत दी है। लड़की के परिवार से मिल रही धमकियों के बाद यह कपल सुरक्षा की मांग लेकर कोर्ट पहुंचा था।



कोर्ट ने दोनों को पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दिया है और साथ ही UCC नियमों के तहत तय समय में अपने रिश्ते का रजिस्ट्रेशन कराने को भी कहा है। कपल ने बताया कि वे करीब एक महीने से साथ रह रहे हैं और शादी की कानूनी उम्र पूरी होने के बाद विवाह करना चाहते हैं।



UCC में लिव-इन पर क्या है नियम

उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जहां यूसीसी लागू हुआ है। इस कानून के तहत लिव-इन में रहने वाले हर जोड़े को साथ रहना शुरू करने के 30 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से हो सकता है।



इस कानून में सिर्फ महिला और पुरुष के बीच के रिश्ते को मान्यता दी गई है। जोड़े में से कोई भी नाबालिग नहीं होना चाहिए। अगर दोनों में से कोई 18 साल से कम उम्र का है तो रजिस्ट्रेशन नहीं होगा।



साथ ही जो जोड़ा एक महीने से ज्यादा साथ रहे और रजिस्ट्रेशन न कराए, उसे तीन महीने की जेल या 10 हजार रुपए जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। गलत जानकारी देने पर 25 हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान भी है।



हाईकोर्ट में याचिका क्यों आई

महाराष्ट्र और उत्तराखंड के रानीखेत से एक जोड़े ने नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। उनका कहना था कि अनिवार्य रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया असंवैधानिक है और निजता के अधिकार का उल्लंघन करती है।



याचिकाकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि रजिस्ट्रेशन फॉर्म में जो व्यक्तिगत जानकारी मांगी जाती है वह जरूरत से ज्यादा है। उन्होंने यह भी कहा कि लिव-इन रजिस्ट्रेशन फॉर्म शादी के रजिस्ट्रेशन से भी ज्यादा जटिल है।



मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति की खंडपीठ ने इस मामले को अन्य समान याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है। सरकार से छह सप्ताह में जवाब मांगा गया है।



21 साल से कम उम्र के जोड़ों पर क्या असर

पहले यूसीसी के तहत रजिस्ट्रार को यह अधिकार था कि अगर जोड़े में कोई 21 साल से कम उम्र का हो तो उसके माता-पिता को सूचना दे। यह प्रावधान निजता के लिहाज से काफी विवादित रहा है।



नए बदलावों के बाद माता-पिता को सूचना देने की यह अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। यह बदलाव युवा जोड़ों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।



यूसीसी का विरोध और समर्थन

उत्तराखंड हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील ने लिव-इन रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता को निजता में दखल बताया। उनका कहना था कि देश के संविधान निर्माताओं ने ऐसी व्यवस्था की कल्पना नहीं की थी।



उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस प्रावधान का बचाव ने कहा कि अनिवार्य रजिस्ट्रेशन से श्रद्धा वालकर जैसे दुखद हादसों को रोका जा सकता है। उनका तर्क था कि इससे लिव-इन में रहने वाली महिलाओं को सुरक्षा मिलेगी।



यूसीसी को चुनौती का भविष्य

27 जनवरी 2026 को यूसीसी ने एक साल पूरे किए। इस मौके पर उत्तराखंड सरकार ने यूसीसी संशोधन अध्यादेश 2026 लागू किया। इसमें प्रशासनिक और दंड संबंधी सुधार शामिल किए गए।



कोर्ट में चल रही सुनवाई के नतीजे तय करेंगे कि आगे यूसीसी के विवादित प्रावधान किस रूप में लागू रहेंगे। यह मामला पूरे देश के लिए एक नजीर बन सकता है।



FAQ

  1. उत्तराखंड में लिव-इन रजिस्ट्रेशन न कराने पर क्या होगा?
    उत्तराखंड यूसीसी के तहत साथ रहना शुरू करने के 30 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन जरूरी है। न कराने पर तीन महीने की जेल या 10 हजार रुपये जुर्माना हो सकता है। नोटिस मिलने के बाद भी न कराने पर छह महीने की जेल या 25 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
  2. क्या 18 साल से कम उम्र के जोड़े लिव-इन में रह सकते हैं?
    नहीं, उत्तराखंड यूसीसी में स्पष्ट है कि नाबालिग यानी 18 साल से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति का लिव-इन रजिस्ट्रेशन नहीं होगा। ऐसे जोड़े का रजिस्ट्रेशन खारिज कर दिया जाएगा। यूसीसी के अनुसार यह प्रावधान बाल संरक्षण के लिए है।
  3. उत्तराखंड हाईकोर्ट में यूसीसी को किसने चुनौती दी?
    महाराष्ट्र और उत्तराखंड के रानीखेत से एक जोड़े ने याचिका दाखिल की। उनका कहना है कि अनिवार्य रजिस्ट्रेशन संविधान के अनुच्छेद 21 यानी निजता के अधिकार का उल्लंघन है। कई अन्य याचिकाएं भी इससे जोड़ी गई हैं और सुनवाई जारी है।

ये खबरें भी पढ़ें...



हैरी बॉक्सर कैसे बन रहा लॉरेंंस गैंग में बड़ा चेहरा, जानिए पूरी इनसाइड कहानी



पतंजलि में तैयार होंगे प्रशासनिक अफसर, शुरू होगी सिविल सर्विसेज एकेडमी



मोदी सरकार के 12 साल: धर्मेंद्र प्रधान ने गिनाईं उपलब्धियां, दिया भविष्य का संदेश



इंडिया गठबंधन की मीटिंग में राहुल गांधी का बड़ा बयान: प्रतिरोध ही भविष्य





Tags:
  • Uniform Civil Code
  • हाई कोर्ट
  • उत्तराखंड
  • लिव-इन रिलेशनशिप
  • उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी