Vaishno Devi Landslide: एमपी के श्रद्धालुओं की मौत का जिम्मेदार कौन?, कहां हुई श्राइन बोर्ड से चूक

Sanjay Dhiman | Aug 29, 2025, 11:46 IST
Photograph: (the sootr)
26 अगस्त को वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर हुए हादसे में 35 लोगों की मौत हुई, जिसमें दो लोग मध्यप्रदेश से थे। मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद यात्रा जारी रखी गई, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की चूक के कारण यह हादसा हुआ।

26 अगस्त को Vaishno Devi यात्रा मार्ग पर हुए दिल दहला देने वाले हादसे के बाद अब यहां की व्यवस्था संभालने वाले श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं। इस घटना में मध्यप्रदेश के दो लोगों सहित कुल 35 लोगों की मौत हुई थी। अभी भी एमपी के कई यात्री यहां लापता बताए जा रहे हैं।



इस हादसे के बाद यह तथ्य भी सामने आया है कि मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर सहित पूरे यात्रा क्षेत्र के लिए मौसम की कड़ी चेतावनी जारी की थी, लेकिन इस चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए यात्रा जारी रखी गई। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या श्राइन बोर्ड की चूक के कारण यह हादसा हुआ।



मौसम विभाग ने यह दी थी चेतावनी

मौसम विभाग ने 25 और 26 अगस्त के लिए जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश और लैंडस्लाइड का अलर्ट जारी किया था। सरकार ने भी स्कूल-कॉलेजों को बंद करने का आदेश दिया था और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की थी। इसके बावजूद, श्राइन बोर्ड ने वैष्णो देवी यात्रा जारी रखने का निर्णय लिया। अगर यात्रा रोक दी जाती तो शायद इतने अधिक लोग हादसे का शिकार नहीं होते।



बलदेव ठाकुर, जो कटरा की पुष्पांजलि पंचायत के निवासी हैं, इस हादसे के बारे में बताते हैं, "हमने कई बार श्राइन बोर्ड से आग्रह किया था कि भारी बारिश को देखते हुए यात्रा को रोक दिया जाए, लेकिन वे सुनने को तैयार नहीं थे।"



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मध्यप्रदेश के दो श्रद्धालुओं की हुई मौत, दो लापता

जम्मू-कश्मीर के वैष्णो देवी धाम मार्ग पर पांच दिन पहले हुए लैंडस्लाइड में मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के भी सात श्रद्धालु शामिल है। यह श्रद्धालु लैंडस्लाइड की चपेट में आ गए। इनमें से दो की मौत हो गई, तीन घायल है और दो अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।



यह सात श्रद्धालु मंदसौर जिले की मल्हारगढ़ विधानसभा के छोटे से गांव भीलखेड़ी निवासी बताए जा रहे हैं। यह घटना न केवल पीड़ित परिवारों के लिए भारी सदमा है, बल्कि पूरे गांव के लिए भी शोक का कारण बन गई है।



हादसे का शिकार हुए गांव के सात श्रद्धालु

23 अगस्त को भीलखेड़ी गांव से सात श्रद्धालु पिपलिया स्टेशन से वैष्णो देवी के दर्शन के लिए रवाना हुए थे। यात्रा के दौरान मंगलवार दोपहर को कटरा के अर्धकुमारी क्षेत्र में भारी बारिश के कारण पहाड़ी खिसक गई। इससे भूस्खलन हुआ और कई श्रद्धालु मलबे में दब गए। इस भूस्खलन हादसे में 32 लोगों की जान चली गई और 20 लोग घायल हुए। इस हादसे में गांव के भी सात लोग शामिल थे, जिनमे से दो लोगों की मौत हो गई।



घटना में दो श्रद्धालुओं, फकीरचंद (50) और रतनबाई (65) की मृत्यु हो गई है। वहीं, सोहनबाई (47), देवीलाल (45), और ममता (30) गंभीर रूप से घायल हैं, और इनका इलाज कटरा के अस्पताल में जारी है। परमानंद (29) और अर्जन (28) अब भी लापता हैं, जिनका कोई सुराग नहीं मिल सका है।



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हादसे का समय और स्थिति

26 अगस्त की दोपहर लगभग 3 बजे, अर्धकुंवारी के पास लैंडस्लाइड हुआ। इस दौरान मलबा और पत्थर तीर्थयात्रियों के ट्रैक पर गिर पड़े, जिससे कई लोग दब गए। शुरुआत में 6 मौतों की जानकारी आई, लेकिन बाद में मृतकों की संख्या बढ़कर 35 हो गई। इसके अलावा, 20 से अधिक लोग घायल हो गए हैं।



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सीएम और विधायक ने उठाए सवाल

श्री माता वैष्णो देवी (रियासी) सीट के विधायक बलदेव राज शर्मा ने भी इस पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा, "रेड अलर्ट की एडवाइजरी को नजरअंदाज किया गया, और इस कारण यह हादसा हुआ।" उन्होंने श्राइन बोर्ड पर आरोप लगाया कि यदि यात्रा रोक दी जाती तो इतने लोग अपनी जान नहीं गंवाते।



जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस पर सवाल उठाया और कहा, "मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी दी थी, तो फिर यात्रा क्यों जारी रही?"



वैष्णो देवी धाम मार्ग पर हुए हादसे और श्राइन बोर्ड की

जिम्मेदारी को ऐसे समझें



मौसम विभाग का अलर्ट और यात्रा की अनुमति: मौसम विभाग ने 25-26 अगस्त के लिए भारी बारिश और लैंडस्लाइड का अलर्ट जारी किया था, फिर भी श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने यात्रा को जारी रखा, जिससे 35 श्रद्धालु अपनी जान गंवा बैठे।

हादसे की घटना: 26 अगस्त को अर्धकुंवारी के पास लैंडस्लाइड हुआ, जिसमें मलबा और पत्थर तीर्थयात्रियों पर गिरे, जिससे 35 लोगों की मौत और 20 से अधिक लोग घायल हो गए।

विधायकों और नेताओं की प्रतिक्रिया: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और विधायक बलदेव राज शर्मा ने श्राइन बोर्ड की लापरवाही पर सवाल उठाए, यह कहते हुए कि यात्रा बंद करने की चेतावनी के बावजूद यात्रा जारी रखी गई।

फंसे हुए यात्री और सुरक्षा इंतजाम: हादसे के बाद यात्रा को रोका गया, और कटरा में फंसे यात्रियों के लिए होटल एसोसिएशन ने मुफ्त में रुकने की व्यवस्था की। यात्री सुरक्षित स्थानों पर भेजे जा रहे हैं।

श्राइन बोर्ड की जिम्मेदारी और सुधार की आवश्यकता: इस घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि श्राइन बोर्ड को अधिक सख्त सुरक्षा उपाय और निगरानी लागू करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं न हों।

हादसे के बाद रोकी गई यात्रा

वैष्णो देवी धाम में लैंडस्लाइडहादसे के बाद यात्रा को रोक दिया गया, जिससे कई श्रद्धालु कटरा में फंस गए। कटरा होटल एसोसिएशन ने ऐलान किया कि वे फंसे हुए यात्रियों को मुफ्त में रुकने की सुविधा देंगे। इसके अलावा, यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की व्यवस्था की जा रही थी।



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लैंडस्लाइड के कारण फंसे है कई यात्री

लैंडस्लाइड के कारण कई यात्री फंसे हुए हैं। बताया जा रहा है कि लैंडस्लाइड के बाद जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पूरी तरह से बंद हो गया है। इसे खोलने के लिए प्रशासन और सेना बीते तीन दिनों से प्रयास कर रही है।



हाइवे बंद हो जाने के कारण पांच सौ से अधिक यात्री और वाहन यहां फंसे हुए हैं। इन्हें निकालने के लिए प्रयास लगातार जारी हैं। इसी बीच, यात्री अपने लापता साथियों की तलाश में भटकते हुए देखे जा रहे हैं। कई श्रद्धालु अभी भी ऐसे हैं, जिनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है।



Vaishno Devi landslide: Landslide Kills One, Injures Several on Old Shrine Track


यह हुआ था 26 अगस्त को Vaishno Devi यात्रा में

जम्मू के कटरा स्थित प्रसिद्ध वैष्णो देवी धाम में 26 अगस्त को लैंडस्लाइड ने भारी तबाही मचाई। यह हादसा मंगलवार को दोपहर 3 बजे हुआ, जब अर्धकुमारी मंदिर के पास पुराने ट्रैक पर चट्टानें गिरने लगीं। इस घटना में अब तक 35 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें अधिकांश श्रद्धालु थे।



प्रशासन का कहना है कि मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ सकती है, रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है। एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्य में लगातार लगी हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई यात्रियों के अभी मलबे में दबे होने की आशंका है।



FAQ

  1. क्या श्राइन बोर्ड ने वैष्णो देवी यात्रा को रोकने का सही निर्णय लिया था?
    मौसम विभाग ने पहले ही भारी बारिश और लैंडस्लाइड का अलर्ट जारी किया था, फिर भी यात्रा को नहीं रोका गया। कई लोग मानते हैं कि अगर यात्रा रोक दी जाती, तो इतने अधिक लोग अपनी जान नहीं गंवाते। यह श्राइन बोर्ड की लापरवाही का परिणाम था।
  2. क्या यात्रा रोकने से दुर्घटना टाली जा सकती थी?
    यदि यात्रा को उस वक्त रोका जाता, जब मौसम विभाग की चेतावनी जारी की गई थी, तो यह संभावना है कि हादसा टल सकता था। उस समय यात्रा जारी रखने का निर्णय चूक साबित हुआ।
  3. श्राइन बोर्ड को कौन जिम्मेदार ठहराएगा?
    कई लोग मानते हैं कि श्राइन बोर्ड को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। बोर्ड के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

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