संसद में आज वंदे मातरम विधेयक लाएंगे अमित शाह, अपमान पर मिलेगी तीन साल जेल
समझें क्या है पूरा मामला
- केंद्र सरकार मानसून सत्र में नया विधेयक लाने जा रही है।
- यह विधेयक वंदे मातरम को कानूनी सुरक्षा देने के लिए है।
- अमित शाह सोमवार को इसे राज्यसभा में पेश करेंगे।
- अपमान करने पर तीन साल तक जेल हो सकती है।
- अभी यह सुरक्षा केवल राष्ट्रगान को हासिल है।
केंद्र सरकार मानसून सत्र में एक अहम विधेयक पेश करने जा रही है। यह विधेयक राष्ट्रीय गीत से जुड़ा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को राज्यसभा में यह विधेयक लाएंगे। यह विधेयक वंदे मातरम को कानूनी सुरक्षा देने के लिए लाया जा रहा है। इसका नाम राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 रखा गया है। अभी तक यह सुरक्षा केवल राष्ट्रगान जन गण मन को मिली हुई है। नए विधेयक से वंदे मातरम को भी राष्ट्रगान जैसा दर्जा मिल सकता है। अगर कोई जानबूझकर वंदे मातरम का अपमान करेगा तो सजा हो सकती है।
क्या है नए विधेयक में
प्रस्तावित कानून के तहत वंदे मातरम का अपमान करना अपराध माना जाएगा। दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल हो सकती है। इसके साथ जुर्माना भी लगाया जा सकता है। कोर्ट चाहे तो जेल और जुर्माना दोनों सजा भी दे सकता है। यह वही सजा है, जो अभी राष्ट्रगान के अपमान पर मिलती है। मौजूदा कानून के तहत राष्ट्रगान के दौरान बाधा डालना पहले से अपराध है। अब यही नियम वंदे मातरम पर भी लागू करने की तैयारी है। विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल पहले ही मंजूरी दे चुका है।
9 जुलाई का आदेश भी जुड़ा
इस विधेयक से पहले गृह मंत्रालय ने एक अहम आदेश भी जारी किया था। 9 जुलाई को राज्यों को एक पत्र भेजा गया था। इसमें सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम बजाने का निर्देश दिया गया था। आदेश के मुताबिक वंदे मातरम को राष्ट्रगान से पहले बजाना होगा। यह आदेश सभी राज्य सरकारों को भेजा गया है। माना जा रहा है कि यह विधेयक इसी दिशा में अगला कदम है।
अभी क्या है कानूनी स्थिति
फिलहाल राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण कानून केवल राष्ट्रगान की रक्षा करता है। इस कानून में राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने का नियम है। इसके अपमान या बाधा डालने पर सजा का भी प्रावधान है। लेकिन वंदे मातरम को अभी तक यह सुरक्षा नहीं मिली है। जबकि वंदे मातरम को देश का राष्ट्रगीत माना जाता है। नया विधेयक इसी कानूनी कमी को दूर करने की कोशिश है। पास होने पर वंदे मातरम को राष्ट्रगान, तिरंगा और संविधान जैसा दर्जा मिलेगा।
20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा सत्र
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। इसी सत्र के दौरान गृह मंत्री अमित शाह विधेयक राज्यसभा में पेश करेंगे। सदन की सूची में यह विधेयक पहले ही दर्ज किया जा चुका है। विधेयक पास होने के लिए दोनों सदनों की मंजूरी जरूरी होगी। लोकसभा और राज्यसभा, दोनों जगह इस पर चर्चा हो सकती है। विपक्ष इस मुद्दे पर अपनी राय जरूर रखेगा, ऐसी उम्मीद जताई जा रही है।
पहले भी हो चुकी है बहस
संसद में वंदे मातरम को लेकर पहले भी बहस हो चुकी है। हाल में राज्यसभा में गीत के 150 साल पूरे होने पर बहस हुई थी। इस दौरान कई नेताओं ने अपने विचार रखे थे। इस दौरान अमित शाह ने विपक्ष पर भी निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि तुष्टिकरण की राजनीति ने देश का बंटवारा कराया। शाह के मुताबिक वंदे मातरम को बांटने से यह राजनीति शुरू हुई थी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस दावे का जवाब भी दिया था। खरगे ने कहा था कि यह गीत आजादी की लड़ाई का प्रतीक रहा है। इस बहस ने वंदे मातरम के मुद्दे को फिर सुर्खियों में ला दिया था।
आगे क्या हो सकता है
अगर संसद से यह विधेयक पास होता है तो कानून बन जाएगा। इसके बाद वंदे मातरम को राष्ट्रीय प्रतीकों जैसी पूरी कानूनी सुरक्षा मिलेगी। सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसका महत्व और बढ़ जाएगा। विपक्षी दल इस पर अपनी प्रतिक्रिया संसद में दर्ज करा सकते हैं। आने वाले दिनों में इस विधेयक पर संसद में बड़ी बहस संभव है। जनता और राजनीतिक दलों की नजर अब मानसून सत्र पर टिकी है। फिलहाल यह विधेयक अभी संसद में पेश ही होना बाकी है। इसके पास होने में अभी कुछ समय लग सकता है। मानसून सत्र के दौरान इस पर हर दिन नई जानकारी आ सकती है। जैसे ही विधेयक पेश होगा, इसकी पूरी जानकारी सामने आएगी। तब तक इस मुद्दे पर देशभर में चर्चा जारी रहने की उम्मीद है। राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़ा यह मामला आने वाले समय में अहम बना रहेगा।
वंदे मातरम को लेकर देश में लंबे समय से भावनात्मक जुड़ाव रहा है। यह गीत आजादी की लड़ाई के दौरान लोगों का हौसला बढ़ाता रहा है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने यह गीत बंगाल में लिखा था। बाद में यह पूरे देश में स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बन गया। कई आंदोलनकारियों को इस गीत को गाने पर जेल भी जाना पड़ा था। आजादी के बाद इसे राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया। लेकिन कानूनी सुरक्षा के मामले में यह राष्ट्रगान से पीछे रहा। नया विधेयक इसी अंतर को खत्म करने की दिशा में एक कदम है।
जरूरी FAQ
वंदे मातरम विधेयक में क्या प्रावधान है?
राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत वंदे मातरम का जानबूझकर अपमान करना अपराध माना जाएगा। दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना, या दोनों सजा हो सकती है। यह वही सुरक्षा है जो अभी राष्ट्रगान जन गण मन को हासिल है।
यह विधेयक संसद में कब पेश होगा?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह यह विधेयक मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में पेश करेंगे। मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। कानून बनने के लिए इसे लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों से पास होना जरूरी होगा।
अभी वंदे मातरम को लेकर क्या कानूनी स्थिति है?
फिलहाल राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण कानून केवल राष्ट्रगान को कानूनी सुरक्षा देता है। वंदे मातरम को अभी यह दर्जा नहीं मिला है, हालांकि इसे देश का राष्ट्रगीत माना जाता है। इससे पहले 9 जुलाई को गृह मंत्रालय ने राज्यों को सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम बजाने का निर्देश भी दिया था।
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