वंदे मातरम न गाने पर क्या जेल होगी? सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

Sumit Kumar | Sept 22, 2026, 17:48 IST
सुप्रीम कोर्ट ने वंदे मातरम विवाद पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। Photograph: (The Sootr)
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वंदे मातरम से जुड़े विवाद पर सुनवाई की। कोर्ट ने गीत को 2 या 6 स्टैंजा (छंदों) तक सीमित करने पर विचार करने से तो इनकार कर दिया, लेकिन इस बात पर विचार करने पर सहमति जताई कि क्या इसे न गाना दंडनीय अपराध हो सकता है या नहीं।

Supreme Court On Vande Mataram Controversy: सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार (22 सितंबर) को वंदे मातरम को लेकर सुनवाई हुई। अदालत ने इस बात पर विचार करने से तो साफ इंकार कर दिया कि राष्ट्रीय गीत को दो स्टैंजा (छंदों) तक सीमित रखा जाए या छह स्टैंजा तक बढ़ाया जाए, लेकिन कोर्ट इस बात की समीक्षा करने के लिए तैयार हो गया है कि क्या राष्ट्रीय गीत न गाने को किसी तरह का दंडनीय अपराध बनाया जा सकता है या नहीं।



इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच कर रही है। बेंच ने ऐतिहासिक 'बिजो इमैनुएल मामले' का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि उस वक्त तय हुआ यह कानून आज भी प्रभावी है कि राष्ट्रगान न गाने पर किसी भी नागरिक को सजा नहीं दी जा सकती।



सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

सर्वोच्च अदालत ने इस जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। हालांकि इस शुरुआती चरण में सरकार को कोई औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया गया है। बेंच ने यह भी टिप्पणी की कि अगर कानून के तहत किसी दंड का प्रावधान किया जाता है, तो उसकी वैधता की जांच भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत नागरिकों को मिले धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों के दायरे में की जानी चाहिए।



क्या है 2026 का नया कानून?

इस नए कानून के तहत 'राष्ट्रीय गीत' (Vande Mataram) को भी राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम के दायरे में शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत अगर कोई व्यक्ति राष्ट्रीय गान या राष्ट्रीय गीत के गायन में जानबूझकर बाधा डालता है या उसमें खलल पैदा करता है, तो उसे 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजाएं मिल सकती हैं। इसके अलावा, इसी साल गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी आदेशों के तहत सरकारी व आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सभी छह छंदों (स्टैंजा) को गाना अनिवार्य किया गया है, जिसकी तय अवधि 3 मिनट 10 सेकंड है।



किसने दायर की है यह जनहित याचिका?

यह याचिका मशहूर कर्नाटक संगीत गायक टी.एम. कृष्णा द्वारा दाखिल की गई है। उन्होंने अदालत में उस कानूनी व्यवस्था को चुनौती दी है जो वंदे मातरम् के सभी छह छंदों को गाने को अनिवार्य बनाने की बात करती है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस गीत के अंतिम चार स्टैंजा में स्पष्ट रूप से हिंदू देवी-देवताओं की आराधना और भक्ति का भाव झलकता है। उनका मानना है कि इसे अनिवार्य बनाना भारत के धर्मनिरपेक्ष (Secular) ढांचे के खिलाफ है।



इसके अलावा, याचिका में उस संशोधन को भी चुनौती दी गई है जिसके जरिए 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम' के दायरे में वंदे मातरम् को शामिल किया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह प्रावधान पूरी तरह से मनमाना है, व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर पाबंदी लगाता है और एक खास बहुसंख्यक धार्मिक संदेश को बढ़ावा देता है। याचिका में राष्ट्रीय गीत को दो से बढ़ाकर छह स्टैंजा किए जाने और इसके गान को अनिवार्य बनाते हुए सजा तय करने के फैसले पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।



सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने किया याचिका का विरोध

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस याचिका का तीव्र विरोध किया। उन्होंने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जिन लोगों को देश के संविधान और कानून के शासन पर भरोसा नहीं है तथा जिनकी मानसिकता नक्सलवादी सोच से प्रेरित है, उन्हें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रीय गीत के ऐतिहासिक योगदान को नहीं भूलना चाहिए और इस पर इस तरह के सवाल उठाने से बचना चाहिए।



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