फैन क्लब से मुख्यमंत्री की दावेदारी तक, 15 साल में थलपति विजय ने कैसे जीता तमिलनाडु?
तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय ने फरवरी 2024 में TVK यानी तमिलागा वेट्री कझगम पार्टी की स्थापना की। यह महज एक फिल्म स्टार का चुनावी शौक नहीं था। उनकी पार्टी ने 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने का इतिहास रचा है।
इस जीत के पीछे एक लंबी और सोची-समझी तैयारी थी जो करीब 15 साल पहले ही शुरू हो चुकी थी। Vijay Makkal Iyakkam की 2009 में हुई शुरुआत ही विजय की राजनीतिक यात्रा की असली नींव थी। TVK का पहला चुनाव, पहली बड़ी जीत ने 59 साल पुरानी DMK-AIADMK की सत्ता पर एकाधिकार को तोड़ दिया।
फैन क्लब से जन आंदोलन तक
विजय को उनके निर्देशक-पिता एस.ए. चंद्रशेखर ने फिल्मों की दुनिया से परिचित कराया था। धीरे-धीरे व्यावसायिक फिल्मों में परिवार के विषयों पर काम करते हुए उन्होंने अपना एक खास दर्शक वर्ग बनाया।
जैसे-जैसे उनकी फैन फॉलोइंग बढ़ी, उन्होंने 2009 में VMI यानी विजय मक्कल इयक्कम की औपचारिक शुरुआत की थी। इसका मकसद प्रशंसकों को जोड़ना और कल्याण के काम को एक संगठित रूप देना था।
VMI के तहत तमिलनाडु भर में 85 हजार से ज्यादा फैन क्लब इकाइयां बनाई गईं। इन इकाइयों ने मुफ्त कैंटीन चलाई, कंप्यूटर बांटे, अध्ययन केंद्र खोले और ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित किए। यह सिनेमाई स्टारडम को सामाजिक जिम्मेदारी में बदलने की कोशिश थी।
आपदाओं में मदद से कमाया विश्वास
VMI ने 2011 में चक्रवात थाने, 2015 में चेन्नई बाढ़ और 2018 में चक्रवात गाजा के दौरान बड़े पैमाने पर राहत अभियान चलाए थे। यह केवल कैमरे के सामने की मदद नहीं थी। लोगों ने देखा कि यह संगठन वास्तव में जमीन पर काम करता है।
2022 में केरल में बाढ़ आई तो विजय ने अपने फैन क्लब जिला प्रमुखों के जरिए राहत सामग्री बंटवाई थी। साथ ही 70 लाख रुपए से ज्यादा की मदद दी थी।
जलीकट्टू से NEET तक खड़े रहे
जनवरी 2017 में जब जलीकट्टू प्रतिबंध के खिलाफ मरीना बीच पर बड़ा आंदोलन चल रहा था, विजय रात के अंधेरे में चेहरे पर रुमाल ढककर वहां पहुंचे थे। वे नहीं चाहते थे कि उनकी मौजूदगी मीडिया का केंद्र बन जाए। वे बस एकजुटता दिखाना चाहते थे।
उसी साल सितंबर 2017 में NEET परीक्षा में सीट न मिलने पर अरियालुर की 17 वर्षीय छात्रा अनिता ने आत्महत्या कर ली थी। विजय खुद उनके घर गए, परिजनों से मिले और एक लाख रुपए की आर्थिक मदद दी थी। यह वह पल था जब लाखों लोगों ने विजय को एक फिल्म स्टार से कहीं ज्यादा कुछ समझना शुरू किया।
थूतुकुडी गोलीकांड और स्टरलाइट विरोध
2018 में थूतुकुडी में स्टरलाइटकॉपर प्लांट विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस गोलीबारी में 14 लोगों की जान गई थी। विजय पीड़ित परिवारों के घर तक गए थे। वे मीडिया की चकाचौंध से बचने के लिए दोपहिया वाहन पर पीछे बैठकर गए थे। इस संवेदनशीलता ने उन्हें आम जनता के और करीब किया।
राष्ट्रीय नेताओं से भी मुलाकात
विजय ने अलग-अलग विचारधाराओं के नेताओं से मुलाकात की थी। उन्होंने 2009 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से, 2011 में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे से भी मुलाकात की थी।
इसके अलावा 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी। इससे यह साफ था कि वे किसी एक खेमे से नहीं, बल्कि एक व्यापक राजनीतिक समझ के साथ आगे बढ़ रहे थे।
2011 में श्रीलंकाई तमिलों के लिए भूख हड़ताल
2009 में विजय ने श्रीलंकाई तमिलों के साथ एकजुटता जताने के लिए चेन्नई में भूख हड़ताल की थी। 2011 में उन्होंने नागपट्टिनम में एक बड़ी भूख हड़ताल आयोजित की थी। इसमें श्रीलंकाई नौसेना द्वारा तमिलनाडु के मछुआरों पर बार-बार होने वाले हमलों के खिलाफ केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की गई थी।
VMI से TVK तक का सफर
अक्टूबर 2021 के स्थानीय निकाय चुनाव में VMI से जुड़े 169 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा, जिनमें से 115 जीते। यह नतीजा एक संकेत था। विजय को अहसास हुआ कि उनका जनाधार अब वोट में बदल सकता है।
फरवरी 2024 में विजय ने TVK यानी तमिलागा वेट्री कझगम की घोषणा की थी। उन्होंने तय किया था कि पार्टी बिना किसी गठबंधन के सभी 234 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी।
TVK की पहली बड़ी कांफ्रेंस अक्टूबर 2024 में विक्रवंदी में हुई जिसमें करीब 8 लाख लोग जुटे। इसने पार्टी की ताकत का अंदाजा दे दिया था।
पहला चुनाव और TVK की ऐतिहासिक जीत
2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में TVK ने 108 सीटें जीतीं और सबसे बड़ी पार्टी बनी। DMK 59 और AIADMK 47 सीटों पर सिमट गई। 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटें चाहिए थीं।
तमिलनाडु में पहली बार त्रिशंकु विधानसभा बनी। TVK सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन बहुमत से 10 सीट दूर है। विजय ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को पत्र लिखकर सरकार बनाने का दावा पेश किया है।
1977 में MGR (M.G. Ramachandran) के बाद पहली बार किसी अभिनेता की पार्टी ने अपने पहले ही चुनाव में यह कामयाबी हासिल की।
थलपति की जीत में भोपाल का युवक
तमिलनाडु में विजय थलपति की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम की जीत के बाद भोपाल के कपिल साहू चर्चा में आ गए हैं। पूरे चुनाव के दौरान कैमरे से दूर रहने वाले कपिल ही थे जिन्होंने विजय की जीत की पूरी रणनीति तैयार की थी।
कैसे हुई विजय की जीत
कपिल पिछले साल विजय की टीम से जुड़े थे और सबसे पहले उन्होंने संगठन पर ध्यान दिया था। उन्होंने विजय के फैन क्लब को एक राजनीतिक टीम में बदल दिया।
पहले ये फैन क्लब सिर्फ विजय को सपोर्ट करते थे, लेकिन कपिल ने इन्हें अब बूथ स्तर पर जिम्मेदारी दे दी। हर सीट का डेटा ध्यान से देखा गया और रणनीति बनाई गई। जमीनी फीडबैक के आधार पर लगातार बदलाव किए गए। इसके बाद विजय की जीत संभव हो पाई।
12 लोगों की टीम बनाकर काम शुरु किया
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कपिल भोपाल के नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट से पढ़े हैं। कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने डेटा और ग्राउंड मैनेजमेंट को अपना करियर बना लिया था।
शुरुआत उन्होंने प्रशांत किशोर की संस्था आई-पैक से की थी। फिर उन्होंने 12 लोगों की एक टीम बनाई और काम शुरू किया।
चेहरे से नहीं भरोसे पर चलता है कैंपेन
कपिल ने बताया कि तमिलनाडु में 50 साल से दो ही पार्टियां सत्ता में थीं। लोगों में थकान और एंटी-इनकंबेंसी (पुरानी सरकार के खिलाफ भावना) साफ दिख रही थी। हमें बस उस भावना को मातरम यानी बदलाव की दिशा में बदलना था।
कपिल ने कहा किकोई भी कैंपेन सिर्फ चेहरे से नहीं चलता, वह भरोसे पर चलता है। विजय के पास 25-30 साल की मेहनत से जो भरोसा बना था, वही हमारी सबसे बड़ी ताकत थी।
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