SIR विवाद पर SC की टिप्पणी : वोटर लिस्ट से नाम हटने पर खत्म नहीं होगी नागरिकता

Sandeep Kumar | Jul 17, 2026, 20:11 IST
वोटर लिस्ट से नाम हटने पर खत्म नहीं होगी नागरिकता
SIR प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि मतदाता सूची में नाम नहीं होने से नागरिकता खत्म नहीं होती। नागरिकता तय करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • SIR में वोटर लिस्ट से नाम हटाने का मामला है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता पर अहम टिप्पणी की।
  • वोटर लिस्ट और नागरिकता को अलग बताया गया।
  • चुनाव आयोग को नागरिकता तय करने का अधिकार नहीं है।
  • पश्चिम बंगाल SIR मामले में अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।

SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट

वोटर लिस्ट स्पेशल रिवीजन (Special Intensive Revision) यानी SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहम टिप्पणी की। अदालत ने साफ कहा कि वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने से किसी व्यक्ति की नागरिकता खत्म नहीं होती।



सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिकता खत्म करने के लिए अलग कानूनी प्रक्रिया होती है। केवल मतदाता सूची से नाम हटना नागरिकता समाप्त होने का आधार नहीं है।



यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। अदालत ने कहा कि कानून की स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है।



नागरिकता तय नहीं करेगा आयोग

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिकता निर्धारण का अधिकार चुनाव आयोग (Election Commission of India) के पास नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग की भूमिका मतदाता सूची के प्रबंधन और निगरानी तक सीमित है। यदि किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं किया जाता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह नागरिक नहीं है। नागरिकता से जुड़े मामलों में संबंधित मंत्रालय और तय कानूनी प्रक्रिया के अनुसार फैसला लिया जाता है।



SIR और वोटर लिस्ट

एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) का उद्देश्य मतदाता सूची की समीक्षा करना है। इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने की कार्रवाई की जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR प्रक्रिया का नागरिकता खत्म करने से सीधा संबंध नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि किसी ट्रिब्यूनल द्वारा नाम शामिल नहीं करने का फैसला आने पर मामला नागरिकता निर्धारण के लिए संबंधित मंत्रालय को भेजा जा सकता है।



पश्चिम बंगाल मामले पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रहा है। याचिका में विधानसभा क्षेत्र के आधार पर जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई है। अदालत ने इस याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी। सुप्रीम कोर्ट इससे पहले भी कह चुका है कि नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का काम नहीं है।



वायरल वीडियो पर विवाद

हाल ही में झारखंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में दावा किया गया था कि SIR फॉर्म भरने के नाम पर पैसे मांगे जा रहे हैं। दावे के अनुसार नागरिकता बचाने के नाम पर लोगों से 50 से 100 रुपए तक लिए जा रहे थे। हालांकि ऐसे मामलों में जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि केवल SIR प्रक्रिया से नागरिकता समाप्त नहीं होती।



राशन मामले में राहत

सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य मामले में याचिकाकर्ता को राहत के लिए हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता दी। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि वोटर लिस्ट से नाम हटने के खिलाफ अपील का फैसला आने तक सब्सिडी वाला राशन जारी रखा जाए। अदालत ने कहा कि इस मामले में उचित राहत कलकत्ता हाईकोर्ट दे सकता है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।



अपील पर फैसला देने निर्देश

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि वोटर लिस्ट से नाम हटने के बाद भी व्यक्ति कुछ सरकारी लाभों का हकदार हो सकता है। उन्होंने संबंधित अपीलीय प्राधिकरण को निर्देश दिया कि याचिका पर जल्द फैसला किया जाए। कोर्ट ने कहा कि संभव हो तो दो महीने के भीतर अपील का निपटारा किया जाए। यदि शिकायत का समाधान नहीं होता है तो याचिकाकर्ता हाईकोर्ट जा सकता है।



कानून में क्या स्थिति है

भारतीय कानून में नागरिकता और मतदाता सूची अलग-अलग विषय हैं। मतदाता सूची में नाम होना मतदान का अधिकार तय करता है। वहीं नागरिकता का निर्धारण नागरिकता कानून के अनुसार होता है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी इसी अंतर को स्पष्ट करती है। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति की नागरिकता केवल वोटर लिस्ट की स्थिति से तय नहीं की जा सकती।



FAQ

  1. SIR प्रक्रिया क्या है?
    SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) मतदाता सूची की समीक्षा प्रक्रिया है। इसमें वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने की जांच की जाती है।
  2. क्या चुनाव आयोग नागरिकता तय कर सकता है?
    नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का अधिकार नहीं है। आयोग केवल मतदाता सूची के प्रबंधन और निगरानी का काम करता है।

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