वोटिंग में धांधली रोकने की PIL पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को भेजा नोटिस

Amresh Kushwaha | Apr 13, 2026, 14:49 IST
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सुप्रीम कोर्ट ने मतदान से पहले बायोमेट्रिक और चेहरे की पहचान अनिवार्य करने की मांग वाली PIL पर केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और राज्यों को नोटिस भेजा है। 4 हफ्ते में जवाब मांगा गया है।

News In Short

  • सुप्रीम कोर्ट में वोटिंग से पहले बायोमेट्रिक पहचान अनिवार्य करने की PIL दायर हुई है।
  • कोर्ट ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और सभी राज्यों को नोटिस भेजा है।
  • 4 हफ्ते के भीतर जवाब देने का आदेश दिया गया है।
  • याचिका में प्रॉक्सी वोटिंग, घोस्ट वोटिंग और रिश्वतखोरी रोकने की मांग है।
  • CJI ने कहा कि आगामी और भविष्य के चुनावों के लिए इस पर जांच जरूरी है।

News In Detail

बायोमेट्रिक वोटिंग की मांग क्यों?

देश में हर चुनाव के साथ फर्जी मतदान, प्रॉक्सी वोटिंग और घोस्ट वोटिंग की शिकायतें सामने आती हैं। इन्हीं समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका यानी PIL दाखिल की गई है। याचिका में मांग है कि मतदान से पहले हर वोटर की बायोमेट्रिक और चेहरे की पहचान यानी फेस रिकग्निशन जरूरी किया जाए।



सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार, भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। सभी से चार हफ्ते के भीतर जवाब मांगा गया है।



याचिकाकर्ता ने क्या कहा?

याचिका वकील और सामाजिक कार्यकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने दाखिल की है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग के पास इस व्यवस्था को लागू करने की पूरी शक्ति है। वहीं, इसके लिए राज्यों का सहयोग भी जरूरी होगा।



उपाध्याय ने माना कि आने वाले चुनावों में यह व्यवस्था लागू करना शायद संभव न हो। वहीं, उन्होंने तर्क दिया कि भविष्य के चुनावों के लिए इसे जरूर अपनाया जाना चाहिए। इससे प्रॉक्सी वोटिंग और मतदाताओं को लालच देने जैसी गड़बड़ियों पर रोक लग सकती है।



याचिका में 20 मार्च 2026 की तारीख का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता को पता चला कि चुनाव आयोग के तमाम उपायों के बावजूद रिश्वतखोरी, अनुचित प्रभाव, फर्जी वोटिंग और घोस्ट वोटिंग की घटनाएं लगातार जारी हैं। इससे आम जनता का चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर हो रहा है।



SC ने जताई बड़े बदलाव की चिंता

सुनवाई के दौरान सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने अहम बात कही है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को लागू करने के लिए नियमों में बड़े पैमाने पर बदलाव करने होंगे। साथ ही इस पर भारी खर्च भी आएगा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि चुनाव आयोग के पास जरूरी अधिकार तो हैं, लेकिन व्यवहार में इसे लागू करना आसान नहीं होगा।



CJI ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश ने साफ किया कि आने वाले तत्काल चुनावों के लिए इस याचिका पर कोई राहत नहीं दी जा सकती। वहीं, उन्होंने कहा कि अगले संसदीय या राज्य चुनावों के लिए इस तरह की व्यवस्था अपनाना सही होगा या नहीं, इसकी जांच जरूरी है। इसीलिए नोटिस जारी किया गया है।



CJI ने यह भी कहा कि अगर राज्य सरकारें सहयोग नहीं करतीं या वित्त मंत्रालय बजट पास नहीं करता, तो याचिकाकर्ता दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।



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