मिडिल ईस्ट तनाव से बाजारों के हाल बेहाल, खरीदारी में गिरावट, सिर्फ जरूरी सामान खरीद रहे लोग

Aman Vaishnav | Apr 22, 2026, 10:17 IST
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव का सीधा असर अब आम लोगों की जेब पर दिखने लगा है। कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतों ने प्लास्टिक, एफएमसीजी और पर्सनल केयर जैसे सेक्टरों की लागत बढ़ा दी है। इससे लोग अब सिर्फ जरूरी सामान खरीदने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

News In Short

  • कच्चे तेल की कीमत 90-95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है, इससे लागत में बढ़ोतरी हो गई है।
  • एफएमसीजी सेक्टर में बिक्री की वृद्धि घटकर 4% हो गई है।
  • परिवार अब जरूरी सामान खरीदने को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।
  • महंगाई से गरीब परिवारों की हालत खराब हो रही है, वहीं ऊंची आय वाले भी सतर्क हो रहे हैं।
  • डिमांड में गिरावट देखने मिल रही है।

News In Detail

मिडिल ईस्ट जंग का असर अब भी जारी

मिडिल ईस्ट (अमेरिका- ईरान) के तनाव ने कच्चे तेल को 90-95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया है। इसके चलते प्लास्टिक दाने महंगे हो गए हैं। इससे पैकेजिंग की लागत बढ़ गई है।



पेंट, पर्सनल केयर और बोतलबंद पानी बनाने वाली कंपनियों पर इसका सीधा दबाव देखने को मिल सकता है। कंपनियां अब अपना घाटा कम करने के लिए कीमतों में 5% बढ़ोतरी कर सकती हैं।



मांग में आई भारी गिरावट

सीएमआईई की रिपोर्ट के अनुसार मार्च तिमाही में बाजार की सेहत काफी खराब रही है। पिछले साल जो एफएमसीजी सेक्टर 12% की दर से बढ़ रहा था। वह 4% पर आ गया है।



बेवरेजेज और चॉकलेट जैसे सेक्टर में तो गिरावट और भी ज्यादा दर्ज की गई है। मांग में आई यह सुस्ती आने वाले समय में आर्थिक मंदी का संकेत है।



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गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति

महंगाई ने सबसे ज्यादा चोट सालाना एक लाख से कम कमाने वाले परिवारों पर की है। मार्च में इन परिवारों की आर्थिक स्थिति का सूचकांक 15% तक नीचे गिर गया है।



रसोई गैस की कीमत में 60 रुपए की बढ़त ने आग में घी का काम किया है। इस कारण इन गरीब परिवारों की खरीदारी कम हो गई है और उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी है।



अमीर परिवारों की खरीदारी में गिरावट

फरवरी में उपभोक्ता भावना सूचकांक 2.6% बढ़ा था जो मार्च में घटकर मात्र 0.2% रह गया है। भविष्य की अनिश्चितता को देखते हुए अमीर परिवारों ने भी अब अपने हाथ खींच लिए हैं।



लोग अब नया निवेश करने या बड़ी खरीदारी करने से काफी ज्यादा डर रहे हैं। बाजार में छाई यह खामोशी व्यापार जगत के लिए बड़ी चिंता का विषय है।



होम केयर प्रोडक्ट्स की बिक्री में गिरावट

उपभोक्ताओं के व्यवहार में भी अब एक बड़ा बदलाव साफ तौर पर देखा जा रहा है। प्रीमियम साबुन और महंगे होम केयर प्रोडक्ट्स की बिक्री में भी भारी गिरावट देखी गई है।



अब लोग केवल जरूरी राशन पर ही पैसा खर्च कर रहे हैं। टीवी, फ्रिज और एसी जैसे बड़े उपकरणों की बिक्री भी काफी कम हुई है।



डेरी और पैकेज्ड फूड भी चिंताजनक

इस तिमाही में शहरी बाजारों की हालत ग्रामीण बाजारों की तुलना में अधिक खराब दिखी है। जहां ग्रामीण क्षेत्रों में 5% की ग्रोथ रही वहीं शहरों में यह सिर्फ 1% थी।



होम केयर सेक्टर में तो -2.7% की माइनस ग्रोथ दर्ज की गई है जो चौंकाने वाली है। डेरी और पैकेज्ड फूड में भी पहले जैसी बढ़त अब नहीं दिखाई दे रही है।



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