पेट्रोल-डीजल के दाम घटने की टूटी उम्मीद, 9% के पार पहुंची थोक महंगाई
समझें क्या है पूरा मामला...
- जून में थोक महंगाई बढ़कर 9.87% हो गई।
- पिछले साल इसी महीने यह माइनस 0.4% थी।
- अमेरिका-ईरान युद्ध से कच्चे तेल के दाम फिर बढ़े हैं।
- इससे ईंधन, केमिकल और मेटल जैसी चीजें महंगी हुई हैं।
- साथ ही कमजोर मानसून से देश में बुवाई भी आधे से कम हुई है।
थोक महंगाई क्यों बढ़ी
सरकार ने खुदरा महंगाई के बाद अब थोक महंगाई के आंकड़े भी जारी किए हैं। जून में थोक महंगाई दर 9.87% दर्ज हुई। वहीं पिछले साल जून में यह दर माइनस 0.4% थी। यानी एक साल में इसमें 10.27% की बढ़ोतरी हुई है।
इसकी सबसे बड़ी वजह ईरान-अमेरिका युद्ध है। इस युद्ध के चलते कच्चे तेल के दाम फिर बढ़ गए हैं। शांति समझौते के बाद कच्चा तेल गिरकर 70 डॉलर तक आ गया था। लेकिन लड़ाई दोबारा शुरू होते ही यह 85 डॉलर के आसपास पहुंच गया है।
किन चीजों के दाम बढ़े
कच्चे तेल के महंगे होने का सीधा असर कई उद्योगों पर पड़ा है। ईंधन और बिजली के दाम 27.4% तक बढ़ गए हैं। केमिकल, रबर और प्लास्टिक जैसे सामान भी महंगे हुए हैं। इसके अलावा बेसिक मेटल और इलेक्ट्रिकल मशीनरी के दाम में भी उछाल आया है।
थोक महंगाई में कारखाने में बने उत्पादों की हिस्सेदारी 63% से ज्यादा होती है। पेट्रोल-डीजल बनाने की लागत एक साल में 46% से ज्यादा बढ़ी है। वहीं कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की लागत में भी 34% से अधिक का इजाफा हुआ है।
पेट्रोल-डीजल पर असर
कच्चे तेल के दाम फिर बढ़ने से आम लोगों को झटका लगा है। पेट्रोल डीजल के दाम घटने की उम्मीद अब कमजोर पड़ गई है। जानकारों का मानना है कि अगले कुछ महीनों तक थोक महंगाई 10% से ऊपर ही बनी रह सकती है।
कमजोर मानसून का असर
दूसरी ओर महंगाई के साथ-साथ अब मानसून की कमजोरी भी चिंता बढ़ा रही है। बैंक ऑफ बड़ौदा के अनुसार देश में अब तक सिर्फ 48.1% क्षेत्र में ही बुवाई हो पाई है।
पिछले साल इसी अवधि तक 57.7% क्षेत्र में बुवाई हो चुकी थी। मौसम विभाग ने बीते 12 वर्षों के सबसे कमजोर मानसून की आशंका जताई है।
किन फसलों पर सबसे ज्यादा असर
मक्के की बुवाई में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है। यह पिछले साल के मुकाबले 18.8% कम रही। अरहर की बुवाई में भी 18.6% की कमी आई है। तिलहन और मोटे अनाज की बुवाई में भी 17% से ज्यादा गिरावट दर्ज हुई है। धान की बुवाई सबसे कम प्रभावित रही, जिसमें सिर्फ 3.3% की कमी आई है।
13 जुलाई तक देश में बारिश सामान्य से 19.3% कम रही है। इसका असर जलाशयों के जलस्तर पर भी पड़ा है, जो औसत से नीचे बना हुआ है। कुल खरीफ बुवाई पिछले तीन साल में सबसे कम रही है।
आगे क्या रहेगा असर
महंगाई और कमजोर मानसून, दोनों मिलकर आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। अगर बुवाई कम रहती है तो आगे चलकर फसलों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। इससे खाद्य महंगाई पर भी दबाव बन सकता है।
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