दुनिया के सबसे अमीर लोग बच्चों को नहीं बना रहे अपनी संपत्ति का हकदार! रिपोर्ट में सामनें आई वजह
समझें क्या है पूरा मामला
- दुनिया के कई जाने-माने अरबपतियों ने अपनी संपत्ति बच्चों के नाम न करने का फैसला किया है।
- मार्क जुकरबर्ग और बिल गेट्स जैसे दिग्गज इस लिस्ट में सबसे आगे हैं।
- इन अमीरों का मानना है कि बच्चों को खुद अपनी मेहनत से आगे बढ़ना चाहिए।
- यह सारी संपत्ति बड़े चैरिटेबल ट्रस्ट और सामाजिक कार्यों में खर्च की जाएगी।
- आने वाले दो दशकों में दुनिया में सबसे बड़ी धन संपत्ति का ट्रांसफर होने वाला है।
अरबपतियों का बच्चों को संपत्ति न देने का फैसला
आज के समय में दुनिया के सबसे अमीर लोग एक अनोखा रास्ता चुन रहे हैं। वे अपनी मेहनत की कमाई अपने बच्चों को देने के बजाय समाज की भलाई के लिए दे रहे हैं। आने वाले बीस वर्षों में दुनिया का सबसे बड़ा धन ट्रांसफर होने वाला है।
लेकिन कई जाने-माने अरबपतियों ने साफ कर दिया है कि उनका पैसा उनके बच्चों को नहीं मिलेगा। मेटा के मालिक मार्क जुकरबर्ग से लेकर पैटागोनिया के फाउंडर तक इस लिस्ट में शामिल हैं। उनका मानना है कि बच्चों को विरासत में पैसा मिलने से उनकी खुद की मेहनत करने की इच्छा खत्म हो जाती है।
मार्क जुकरबर्ग और प्रिसिला चैन का बड़ा कदम
मार्क जुकरबर्ग ने फेसबुक यानी मेटा कंपनी की शुरुआत हॉस्टल के एक छोटे कमरे से की थी। आज उनके पास अरबों डॉलर की संपत्ति का बड़ा हिस्सा मौजूद है। लेकिन उन्होंने और उनकी पत्नी ने अपनी 99 फीसदी संपत्ति दान करने का फैसला किया है।
जब उनकी पहली बेटी हुई थी, तभी उन्होंने इस नेक काम की घोषणा कर दी थी। वे इस पैसे का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज में समानता लाने के लिए कर रहे हैं। उनका मानना है कि आने वाली पीढ़ी के लिए बेहतर दुनिया बनाना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
लॉरेन पॉवेल जॉब्स और बिल गेट्स की अनोखी सोच
स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स भी इसी रास्ते पर चल रही हैं। उन्होंने साफ कहा है कि वे बच्चों के लिए कोई पुरानी बड़ी संपत्ति छोड़कर नहीं जाना चाहती हैं। वे पर्यावरण और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए अरबों रुपये दान कर चुकी हैं।
दूसरी तरफ माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर बिल गेट्स ने भी यही नियम अपनाया है। उनका कहना है कि बच्चों को बहुत सारा पैसा देना उनके लिए किसी फायदे की बात नहीं होती है। उनके बच्चे अपनी जिंदगी का रास्ता खुद अपनी मेहनत से ही तलाशेंगे।
वारेन बफेट और इवान चॉइमार्ड का कड़ा फैसला
दिग्गज निवेशक वारेन बफेट की कुल संपत्ति भी आज बहुत ज्यादा है। उनका मानना है कि सिर्फ सही परिवार में जन्म लेने की वजह से बच्चों को करोड़ों रुपये देना समाज के खिलाफ है। वे चाहते हैं कि उनके बच्चे अपने दम पर दुनिया में अपनी जगह बनाएं।
पेटागोनिया ब्रांड के मालिक इवान चॉइमार्ड ने भी अपनी पूरी कंपनी एक ट्रस्ट को सौंप दी है। दिलचस्प बात यह है कि उनके बच्चों ने खुद कहा था कि वे इस संपत्ति के वारिस नहीं बनना चाहते हैं। वे सब मिलकर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ जंग में अपना योगदान दे रहे हैं।
आखिर क्या है वजह
- बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना: उनका मानना है कि बहुत ज्यादा पैसा मिलने से बच्चे खुद मेहनत करने और सफलता हासिल करने के लिए प्रेरित नहीं होंगे।
- अपनी पहचान बनाने का मौका: वे चाहते हैं कि बच्चे माता-पिता की दौलत या पहचान के बजाय अपनी मेहनत से अपना मुकाम बनाएं।
- पैसे के गलत असर से बचाना: बिना मेहनत के मिला बहुत ज्यादा पैसा बच्चों में आलस, अहंकार या गलत आदतें पैदा कर सकता है।
- समाज के लिए पैसा इस्तेमाल करना: बिल गेट्स और वॉरेन बफेट जैसे अमीर लोग अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी कम करने और दूसरी सामाजिक जरूरतों के लिए देना चाहते हैं।
- परोपकार को बढ़ावा देना: ‘द गिविंग प्लेज’ के जरिए कई अरबपति अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा सामाजिक कार्यों में लगाने की प्रतिबद्धता जता चुके हैं।