25 लाख के बकाए पर भी माना जाएगा विलफुल डिफाल्टर, अब नहीं बच सकेंगे जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वाले

Pratibha Rana | Sept 22, 2023, 24:00 IST
25 लाख के बकाए पर भी माना जाएगा विलफुल डिफाल्टर, अब नहीं बच सकेंगे जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वाले
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गुरुवार (21 सितंबर) को जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वालों (विलफुल डिफाल्टर) से जुड़े मानदंडों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है।

NEW DELHI. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गुरुवार (21 सितंबर) को जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वालों (विलफुल डिफाल्टर) से जुड़े मानदंडों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। नए मानदंडों के तहत ऐसे व्यक्ति को भी विलफुट डिफाल्टर माना जाएगा, जिस पर 25 लाख से अधिक की राशि बकाया है और भुगतान करने की क्षमता होने के बावजूद वह इससे आनाकानी कर रहा है। केंद्रीय बैंक ने इस मामले पर तैयार मसौदे पर जनता की राय मांगी है।



मसौदे में क्या है कड़ी शर्तें



केंद्रीय बैंक ने इस संबंध में तैयार किए गए मसौदे पर आमलोगों से राय मांगी है। मसौदे में कहा गया है कि जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वाले रीस्ट्रक्चरिंग यानी लोन पुनर्गठन के पात्र नहीं होंगे और किसी अन्य कंपनी के बोर्ड में शामिल नहीं हो सकेंगे। मसौदे में यह भी कहा गया है कि एक बार विलफुल डिफाल्टर घोषित होने के बाद कर्जदाता उसके खिलाफ कहीं से भी वसूली के लिए उधारकर्ता और गारंटर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकेगा। उधारकर्ता के खाते के एनपीए होने के छह महीने के भीतर उसे विलफुल डिफाल्टर की श्रेणी में लाना होगा।



पहले नहीं थी कोई समयसीमा



इससे पहले आरबीआई के पास विलफुल डिफाल्टर की पहचान करने की कोई विशेष समयसीमा नहीं थी। आरबीआई ने गैर वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को भी इस तरह के मापदंडों का उपयोग करके विलफुल डिफाल्टर की पहचान करने की मंजूरी देने की बात कही है। आरबीआई ने मसौदे में इस बात का भी सुझाव दिया है कि बैंकों को एक समीक्षा समिति का भी गठन करना चाहिए और कर्जधारक को लिखित में अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिनों का समय देना चाहिए। जरूरत पड़े तो उसे व्यक्तिगत सुनवाई का भी मौका देना चाहिए।



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