पेट्रोल पर साढ़े 3 रुपए, डीजल पर 1.50 रुपए घटा विंडफॉल टैक्स, मिलेगी राहत!
केंद्र सरकार ने स्वतंत्रता दिवस की आधी रात बड़ा फैसला लिया। पेट्रोल एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स साढ़े तीन रुपए घटाया गया। डीजल पर यह टैक्स डेढ़ रुपए कम हुआ है। एविएशन फ्यूल एक्सपोर्ट पर भी टैक्स में कटौती की गई है। यह फैसला बढ़ती क्रूड कीमतों के बीच लिया गया है।
केंद्र सरकार ने स्वतंत्रता दिवस की रात एक अहम फैसला लिया है। पेट्रोल-डीजल और एविएशन फ्यूल के एक्सपोर्ट पर लगने वाला विंडफॉल टैक्स घटा दिया गया है। इससे तेल कंपनियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
टैक्स में कितनी कटौती
सरकार के आदेश के मुताबिक कई बदलाव किए गए हैं। डीजल एक्सपोर्ट पर ड्यूटी 25.5 रुपए से घटाकर 24 रुपए प्रति लीटर हुई है। पेट्रोल पर ड्यूटी साढ़े तीन रुपए से सीधे जीरो कर दी गई है।
एटीएफ (ATF – Aviation Turbine Fuel) पर टैक्स भी घटाया गया है। पहले यह 22 रुपए प्रति लीटर था। अब इसे घटाकर 19.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है। यानी एटीएफ पर ढाई रुपए की कटौती हुई है।
क्यों लिया गया यह फैसला
इस साल मार्च में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा था। इससे कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट आई थी। तभी सरकार ने दोबारा विंडफॉल टैक्स लागू किया था।
विंडफॉल टैक्स पहली बार जुलाई 2022 में लगाया गया था। उस समय कच्चे तेल की कीमतें अचानक बढ़ गई थीं। तेल कंपनियों को असाधारण मुनाफा हो रहा था। इसी वजह से यह टैक्स लगाया गया था। दो साल बाद इसे हटा भी दिया गया था।
क्रूड कीमतों में उछाल
अमेरिका और ईरान के बीच अभी भी तनाव बना हुआ है। इसका असर दुनिया भर की क्रूड कीमतों पर पड़ा है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फिलहाल 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है।
बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। मकसद है तेल कंपनियों को थोड़ी राहत देना।
हर दो हफ्ते होती है समीक्षा
भारत सरकार एक्सपोर्ट लेवी की नियमित समीक्षा करती है। यह समीक्षा हर दो हफ्ते में होती है। इसका आधार क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम उत्पादों के इंटरनेशनल रेट होते हैं।
इससे शुल्क को अंतरराष्ट्रीय कीमतों के हिसाब से समायोजित किया जाता है। रिफाइनिंग मार्जिन में बदलाव का भी ध्यान रखा जाता है।
आम जनता पर क्या असर
यह जानना जरूरी है कि विंडफॉल टैक्स सीधे आपकी गाड़ी के तेल से नहीं जुड़ा। यह टैक्स सिर्फ बड़ी तेल कंपनियों पर लगता है। जैसे ओएनजीसी (ONGC – Oil and Natural Gas Corporation) या रिलायंस जैसी कंपनियां।
ये कंपनियां तेल निकालती हैं और विदेश में बेचती हैं। उनके अतिरिक्त मुनाफे पर ही यह टैक्स लगाया जाता है। इसलिए टैक्स घटने से आम आदमी के लिए पेट्रोल-डीजल तुरंत सस्ता नहीं होगा।
फिर भी यह फैसला तेल कंपनियों के लिए राहत भरा है। आने वाले समय में इसका असर बाजार पर दिख सकता है।
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