Wipro में धर्म परिवर्तन और शेख से शादी का दबाव, महिला ने कंपनी पर की FIR
ऐसे समझें पूरा मामला...
- Wipro में धार्मिक उत्पीड़न का गंभीर आरोप।
- हिंजवडी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज।
- दुबई में शेख से शादी का दबाव बनाया गया।
- पीड़िता ने नौकरी वापसी की मांग रखी।
- कंपनी पर कानूनी नोटिस भेजा गया।
पुणे की हिंजवडी IT हब में एक बार फिर कार्यस्थल उत्पीड़न का मामला सामने आया है। Wipro की पूर्व महिला कर्मचारी ने मतांतरण (Religious Conversion) के लिए दबाव, यौन शोषण और जबरन इस्तीफे के गंभीर आरोप लगाए हैं। यह मामला नासिक के TCS विवाद की याद दिलाता है और IT सेक्टर में महिला सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करता है।
Wipro पर धार्मिक उत्पीड़न के आरोप
आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Wipro Technologies एक बड़े विवाद में घिर गई है। पुणे के हिंजवडी में तैनात रही पूर्व महिला कर्मचारी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने हिंजवडी पुलिस स्टेशन में विधिवत शिकायत दर्ज कराई है।
साथ ही कंपनी को कानूनी नोटिस भी भेजा गया है। महिला का कहना है कि उन पर मतांतरण (Religious Conversion) के लिए लगातार दबाव बनाया गया। कंपनी में कार्यस्थल भेदभाव (Workplace Discrimination) की भी शिकायत की गई है। यह मामला IT जगत में महिला सुरक्षा पर सवाल उठाता है।
नासिक TCS जैसा है यह मामला
यह विवाद नासिक में TCS कंपनी के मामले से मिलता-जुलता है। उस मामले में भी धार्मिक दबाव और उत्पीड़न के आरोप लगे थे। पुणे का यह मामला IT सेक्टर के लिए एक बड़ा झटका है।
पीड़िता ने बताया कि हिंदू महिलाओं को जानबूझकर निशाना बनाया जाता है। उन्हें मांगें मानने या नौकरी छोड़ने के बीच चुनना पड़ता है। पिछले दस महीनों में उन्होंने जो झेला वह असहनीय था। इसीलिए उन्होंने यह कदम उठाना जरूरी समझा।
कंपनी प्रबंधन पर गंभीर सवाल
पीड़िता ने Wipro के प्रबंधन (Management) पर भी उंगली उठाई है। उनका कहना है कि शिकायत करने पर मामले को दबा दिया जाता है। कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेते।
कॉर्पोरेट भेदभाव (Corporate Discrimination) का यह चेहरा बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि हर बार मुद्दा उठाने पर उसे रफा-दफा कर दिया गया। यह कार्यस्थल पर महिलाओं की असुरक्षा को दर्शाता है। प्रबंधन की यह चुप्पी ही सबसे बड़ी समस्या है।
दुबई में शादी और शेख का प्रस्ताव
पीड़िता ने दुर्व्यवहार की जो कहानी बताई वह चौंकाने वाली है। उन्होंने बताया कि सहकर्मी शाहीन रफीक ने नौकरी के पहले दिन से परेशान किया। उसने कंट्री हेड रामकुमार से संबंध बनाने के लिए दबाव दिया। इसके बदले दुबई में ट्रांसफर का लालच दिया गया।
दुबई में किसी शेख से शादी कराने की भी बात कही गई। महिला यौन शोषण (Sexual Harassment) के इस जाल में फंसाने की कोशिश की गई। यह मामला कार्यस्थल अपराध (Workplace Crime) की गंभीर श्रेणी में आता है।
FIR और पुलिस जांच की स्थिति
पीड़िता ने बताया कि उन्होंने हिंजवडी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने उन्हें FIR के लिए बुलाया है। जांच के बाद औपचारिक FIR दर्ज होगी।
24 अप्रैल 2026 को एक बार फिर यह मुद्दा उठाया गया था। यह उनके जबरन इस्तीफे के बाद की घटना है। पीड़िता ने बर्खास्तगी का कारण बताने की माँग की थी। पुलिस का कहना है कि मामले की पूरी जाँच होगी।
पीड़िता की मांग, नौकरी वापस दो
पीड़िता की मुख्य मांग बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि उनकी बर्खास्तगी (Wrongful Termination) पूरी तरह गैरकानूनी थी। उन्हें उनकी नौकरी वापस मिलनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने कॉर्पोरेट सुधार की भी मांग रखी है। उनका मानना है कि हर निजी कंपनी में महिला सुरक्षा तंत्र होना चाहिए। महिला अधिकार (Women's Rights) की रक्षा के लिए संस्थागत व्यवस्था जरूरी है। यह मांग पूरे IT सेक्टर के लिए एक जरूरी सबक है।
IT सेक्टर में महिला सुरक्षा की जरूरत
यह मामला केवल Wipro तक सीमित नहीं है। पूरे IT उद्योग में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। POSH Act (Prevention of Sexual Harassment) के बावजूद ऐसी घटनाएं हो रही हैं।
कंपनियों में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की भूमिका कमजोर नजर आ रही है। पुणे और नासिक दोनों मामले यही बताते हैं। समाज और सरकार को मिलकर इस दिशा में काम करना होगा। महिला कर्मचारी सुरक्षित माहौल की मांग करती हैं, यह उनका अधिकार है।
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