दुनिया की पहली पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन तैयार, अब शरीर खुद खत्म करेगा कैंसर
समझें क्या है पूरा मामला...
- अमेरिकी कंपनियों मॉडर्ना और मर्क ने मेलेनोमा के लिए नई वैक्सीन बनाई है।
- यह दुनिया की पहली पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन मानी जा रही है।
- वैक्सीन मरीज के ट्यूमर से तैयार होती है, इसलिए हर मरीज के लिए अलग होती है।
- यह कोविड वैक्सीन वाली mRNA तकनीक पर आधारित है।
- ट्रायल के तीसरे और अंतिम चरण में नतीजे बेहद उत्साहजनक मिले हैं।
स्किन कैंसर के सबसे खतरनाक रूप मेलेनोमा से जूझ रहे मरीजों के लिए यह राहत भरी खबर है। मॉडर्ना और मर्क ने मिलकर एक नई वैक्सीन तैयार की है।
यह वैक्सीन कैंसर सर्जरी के बाद बीमारी को दोबारा लौटने से रोकने में मदद करेगी। ट्रायल के नतीजों ने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है।
क्या है यह नई वैक्सीन
यह वैक्सीन दुनिया की पहली पर्सनलाइज्ड यानी व्यक्तिगत कैंसर वैक्सीन मानी जा रही है। इसका मतलब है कि यह हर मरीज के लिए अलग तरीके से बनाई जाती है।
वैज्ञानिक मरीज के ट्यूमर का जेनेटिक कोड पढ़ते हैं। इसी आधार पर उसकी अपनी वैक्सीन तैयार होती है।
यह वैक्सीन उन मरीजों को दी जाती है जिनका मेलेनोमा सर्जरी से पहले ही हटाया जा चुका है। यानी यह बीमारी रोकने वाली नहीं, बल्कि इलाज के बाद इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन है।
ज्यादातर वैक्सीन बीमारी से पहले दी जाती हैं, लेकिन यह वैक्सीन इससे अलग तरीके से काम करती है।
कोविड वाली तकनीक से बनी वैक्सीन
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वैक्सीन के लीड साइंटिस्ट डॉ. माइकल हैं। वे मेमोरियल स्लोन केटरिंग अस्पताल में मेलेनोमा मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट हैं। उनके मुताबिक यह वैक्सीन उसी mRNA (मैसेंजर राइबोन्यूक्लिक एसिड – Messenger Ribonucleic Acid) तकनीक से बनी है, जिससे कोविड वैक्सीन बनी थी।
डॉ. पोस्टो का कहना है कि mRNA थैरेपी अब सिर्फ प्रयोग नहीं, बल्कि हकीकत बनती दिख रही है। उनके मुताबिक कोविड वैक्सीन की सफलता ने इस तकनीक पर भरोसा और मजबूत कर दिया है।
वैक्सीन कैसे काम करती है
यह वैक्सीन शरीर के इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरोधक तंत्र को नई ट्रेनिंग देती है। यह सिस्टम को सिखाती है कि कैंसर कोशिकाओं को कैसे पहचानें।
वैक्सीन का निशाना कैंसर कोशिकाओं की सतह पर मौजूद असामान्य प्रोटीन होते हैं, जिन्हें नियोएंटीजन कहा जाता है।
इम्यून सिस्टम इन नियोएंटीजन को पहचानकर सीधे कैंसर कोशिकाओं पर हमला कर देता है। इससे स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना सिर्फ कैंसर कोशिकाएं खत्म होती हैं। हर मरीज के ट्यूमर में यह प्रोटीन अलग होते हैं, इसलिए हर वैक्सीन भी अलग बनानी पड़ती है।
ट्रायल के नतीजे इतने खास क्यों
मेलेनोमा वैक्सीन ट्रायल का तीसरा और फाइनल फेज बड़ा मौका माना जा रहा है। कंपनी के मुताबिक इसकी सफलता दर बेहद ऊंची है। यह इम्यूनोथैरेपी के साथ मिलाकर टेस्ट की गई है। जिन मरीजों की मेलेनोमा सर्जरी पहले ही हो चुकी थी, उन्हीं पर यह ट्रायल किया गया।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह नतीजे मेलेनोमा रिसर्च के लिए निर्णायक पल हैं। मेलेनोमा तेजी से फैलने वाला स्किन कैंसर है और यह पिगमेंट बनाने वाली कोशिकाओं से शुरू होता है। यही वजह है कि स्किन कैंसर से होने वाली मौतों में इसका योगदान सबसे ज्यादा है।
भारत बन सकता है सबसे बड़ा निर्माता
यह वैक्सीन भारत में कब तक उपलब्ध होगी यह भारत के नियामकों पर निर्भर करेगा। कंपनी वैक्सीन डेटा इसी साल या अगले साल तक एफडीए (FDA – Food and Drug Administration) के पास जमा कर सकती है। एफडीए की समीक्षा में कुछ महीने लग सकते हैं।
डॉ. पोस्टो का मानना है कि भारत दुनिया में वैक्सीन और दवाओं का सबसे बड़ा निर्माता है। उन्हें उम्मीद है कि भारत स्किन कैंसर मरीजों की मदद के लिए यह मौका जरूर भुनाएगा। इससे भारत की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को भी फायदा मिल सकता है।
वैक्सीन कब तक मरीजों तक पहुंचेगी
मॉडर्ना के प्रेसिडेंट स्टीफन होज के मुताबिक हाई-रिस्क स्किन कैंसर सर्जरी करा चुके हजारों मरीजों को 2027 तक इसका फायदा मिलना शुरू हो सकता है। क्लीनिकल ट्रायल के नतीजे इस साल प्रतिष्ठित पीयर-रिव्यू जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं।
अब अमेरिकी नियामक एफडीए इसकी समीक्षा करेगा। उम्मीद है कि कुछ महीनों में मंजूरी मिल सकती है। इसके बाद ही यह साफ होगा कि आम मरीजों तक यह वैक्सीन कब पहुंचेगी।
मरीजों के लिए क्यों है यह उम्मीद की किरण
मेलेनोमा दूसरे अंगों तक तेजी से पहुंच सकता है, इसलिए इसका इलाज (कैंसर इलाज) मुश्किल माना जाता रहा है। सर्जरी के बाद भी इसके दोबारा लौटने का खतरा बना रहता है। ऐसे में यह नई वैक्सीन मरीजों के लिए बड़ी राहत बन सकती है।
FAQ
- पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन क्या है?
यह एक ऐसी वैक्सीन है जो हर मरीज के ट्यूमर के जेनेटिक कोड के आधार पर अलग से बनाई जाती है। यह सर्जरी के बाद दी जाती है ताकि कैंसर दोबारा न लौटे। इसे मॉडर्ना और मर्क ने मिलकर विकसित किया है। - पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन काम कैसे करती है?
ह वैक्सीन इम्यून सिस्टम को कैंसर कोशिकाओं की सतह पर मौजूद नियोएंटीजन पहचानना सिखाती है। इसके बाद शरीर खुद ही कैंसर कोशिकाओं को ढूंढकर खत्म करता है। - पर्सनलाइज्ड वैक्सीन भारत में कब उपलब्ध होगी?
इसका फैसला भारत के नियामकों की समीक्षा प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। पहले इसे अमेरिकी नियामक एफडीए की मंजूरी मिलनी है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि भारत इस मौके का फायदा उठाकर वैक्सीन निर्माण में भी आगे आएगा।
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