World Laughter Day: जोकर से जाकिर तक, कितनी बदली कॉमेडी?
हमारे देश में कॉमेडी की यात्रा भी किसी रोलरकोस्टर राइड से कम नहीं रही है। पहले सर्कस में जोकर के एक्सप्रेशन्स और उछल-कूद को देखने के लिए गांव भर के लोग एक साथ जमा होते थे, जबकि अब लोग दोस्तों और साथियों के साथ कॉमेडी मूवीज और स्टैंडअप शो में जाने का प्लान बनाते हैं।
कभी कुछ फिल्मों ने अपने जोक्स और कॉमेडी के कारण कल्ट क्लासिक का दर्जा प्राप्त किया, तो कभी उन्हें अपने मजाक के कारण विरोध का सामना भी करना पड़ा। तो चलिए World Laughter Day के मौके पर इस यात्रा को एक साथ देखते हैं।
सर्कस के जोकर और स्लैपस्टिक कॉमेडी
हमारे देश में पहले सर्कस का चलन था। सर्कस और उसके कलाकार एक गांव से दूसरे गांव में सफर करते हुए लोगों का मनोरंजन करते थे। सर्कस में जोकर वो पहला कॉमेडी पात्र थे, जो अपने रंगीन चेहरे और गड़बड़ी भरी हरकतों से दर्शकों को हंसी से लोटपोट कर देते थे। उनका कॉमेडी का तरीका बहुत ही बुनियादी और शारीरिक था।
कॉमेडी के इस पहले रूप ने फिल्मों और टेलीविजन पर काफी प्रभाव डाला। सर्कस में जोकर अपनी शारीरिक हरकतों और मजेदार गिरने-उठने से लोगों को हंसाते थे। इनकी हंसी-ठहाकों में कोई शब्द नहीं होते थे, बस स्लैपस्टिक कॉमेडी (शारीरिक हंसी) और मिमिक्री के जरिए लोगों को हंसी का एहसास होता था।
थिएटर में ठहाकों की गूंज का दौर
1950 और 60 के दशक में बॉलीवुड फिल्मों में भी कॉमेडी का तड़का लगने लगा। फिल्म निर्माता अपनी फिल्मों में हास्य जोड़ने लगे थे, ताकि दर्शकों को हंसी का अनुभव हो सके। यहीं से कॉमेडी ने बॉलीवुड में अपनी जगह पक्की कर ली।
जॉनी वॉकर और महमूद जैसे अभिनेता कॉमेडी के चेहरे बन गए। उनकी शानदार टाइमिंग और मजेदार किरदारों ने उन्हें हमेशा के लिए दर्शकों के दिलों में बसाया। इसके बाद कॉमेडी (कॉमेडी फिल्म) ने बॉलीवुड में अपने लिए एक अलग कैटेगरी बना ली। 'चुपके चुपके' (1975) और 'पड़ोसी' (1968) जैसी फिल्में अपने हास्यपूर्ण अंदाज से दर्शकों को खूब हंसा चुकी थीं।
सिटकॉम से स्टैंड-अप तक
1990 के दशक में जब टेलीविजन ने घर-घर में दस्तक दी, तो कॉमेडी को एक नया प्लेटफॉर्म मिला। अब हर घर में लोग कॉमेडी शो देखकर हंसी के ठहाके लगाते थे। 'हम पांच' और 'श्रिमान श्रिमाती' जैसे शोज ने हंसी का नया खजाना दिया।
2000 के बाद 'कॉमेडी सर्कस', 'द कपिल शर्मा शो' और 'छोटे मियां' जैसे शोज ने भारत में टेलीविजन पर कॉमेडी को नया मुकाम दिया। कपिल शर्मा, कृष्णा अभिषेक और सुदेश लहरी जैसे कॉमेडियन्स ने दर्शकों को हंसी के समुद्र में डुबो दिया।
भारत के टॉप स्टैंडअप कॉमेडियन
यूट्यूब और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स: कॉमेडी की नई क्रांति
जब से इंटरनेट और यूट्यूब का दौर आया, तब से भारतीय कॉमेडी का चेहरा पूरी तरह बदल गया। हर किसी को अपनी कॉमेडी ऑनलाइन दिखाने का मौका मिल गया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने नई दिशा दी।
TVF (द वायरल फीवर), AIB जैसे चैनल्स और आशिष चंचलानी और भुवन भाम जैसे यूट्यूबर्स ने कॉमेडी का नया चेहरा पेश किया। इन चैनल्स ने मजेदार स्केचेस और सामाजिक मुद्दों पर व्यंग्य के जरिए कॉमेडी को नया रंग दिया।
हालांकि यहीं भारतीय कॉमेडी इतिहास की शायद सबसे बड़ी कॉन्ट्रोवर्सी भी हुई। करण जौहर, रणवीर सिंह और अर्जुन कपूर के साथ किया गया एक 'रोस्ट' विवाद का कारण भी बना। इसमें इस्तेमाल की गई अश्लील भाषा और गंदे जोक्स के कारण कई एफआईआर दर्ज हुईं। सोशल मीडिया पर हफ्तों तक चली बहस के कारण फिर AIB को अपना वीडियो यूट्यूब से हटाना पड़ा।
स्टैंड-अप कॉमेडी शो
अब भारत में स्टैंड-अप कॉमेडी ने अपनी एक अलग जगह बना ली है। पहले इसे एक हॉबी माना जाता था, लेकिन अब यह एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का एक बड़ा हिस्सा बन गया है। मुंबई, दिल्ली, बैंगलोर और चेन्नई जैसे शहरों में लाइव स्टैंड-अप शो का आयोजन बड़े पैमाने पर होता है। ज़ाकिर खान, अनुभव सिंह बस्सी, समय रैना और अभिषेक उपमन्यु आज देश के सबसे पॉपुलर स्टैंडअप कॉमेडियन्स में से एक बन गए हैं।
इंदौर से नाता रखने वाले जाकिर खान ने 2025 में न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भी परफॉर्म किया। उन्होंने 6,000 से ज्यादा लोगों के सामने हिंदी में स्टैंड-अप करने वाले पहले भारतीय बनकर इतिहास रच दिया था।
कॉमेडी और कॉन्ट्रोवर्सी
भारत में कॉमेडी और कॉन्ट्रोवर्सी का रिश्ता काफी पुराना और गहरा रहा है। चाहे वो स्टैंड-अप कॉमेडी हो, फिल्में हों या टीवी शो, कई बार हंसी-मजाक की सीमाएं धार्मिक, राजनीतिक या सामाजिक भावनाओं से टकराई हैं। कई बार कॉमेडी के नाम पर किए गए मजाक ने लोगों की भावनाओं को आहत भी किया।
'पीके' फिल्म में धर्म के नाम पर पाखंड दिखाने वाले कुछ कॉमेडी सीन पर दक्षिणपंथी संगठनों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया था। स्टैंड-अप कॉमेडियन्स मुनव्वर फारूकी और वीर दास भी अपने जोक्स के कारण हेटर्स के निशाने पर आ गए थे।
भारत में कॉमेडी ने बहुत लंबा सफर तय किया है—सर्कस जोकर से लेकर बॉलीवुड फिल्मों, टेलीविजन शो, और अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और स्टैंड-अप कॉमेडी शो तक। जैसे-जैसे प्लेटफॉर्म बढ़ रहे हैं और दर्शक नए अनुभवों की तलाश कर रहे हैं, भारतीय कॉमेडी का रूप और भी दिलचस्प हो जाएगा।
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