चलो किस्मत आजमा लेते हैं: योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव को दी अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती
दरअसल, 2024 लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को फैजाबाद सीट पर हार मिली थी। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह सीट फिर चर्चा में आ गई है।
अखिलेश की चुनौती पर योगी का जवाब
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) हाल ही में अयोध्या में आयोजित एक भागवत कथा में पहुंचे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन पूर्व विधायक और सपा नेता पवन पांडेय से जुड़ा था। कार्यक्रम के दौरान अखिलेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर कटाक्ष करते हुए अयोध्या से विधानसभा चुनाव लड़ने की चुनौती दी।
अखिलेश ने कहा कि मुख्यमंत्री को अपनी जीत का भरोसा है तो अयोध्या से चुनाव लड़ें। उनकी इसी चुनौती पर शनिवार, 11 अक्टूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जवाब दिया।
योगी बोले- आप भी आइए एक बार किस्मत आजमा लेते हैं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव की चुनौती स्वीकार करने जैसा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि चुनावी मुकाबला करना है तो दोनों नेताओं को आमने-सामने आना चाहिए।
योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने कहा, ''चलो एक बार किस्मत आजमा लेते हैं। तय हो जाए। आप भी आइए, मैं भी आता हूं।''
हालांकि मुख्यमंत्री ने अयोध्या से चुनाव लड़ने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अयोध्या उनके लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। उनके मुताबिक अयोध्या आने का उद्देश्य शहर के विकास कार्यों को आगे बढ़ाना है।
फिलहाल योगी आदित्यनाथ गोरखपुर शहर विधानसभा सीट से विधायक हैं। वहीं अखिलेश यादव वर्तमान में कन्नौज लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
अयोध्या सीट को लेकर माहौल गरम
उत्तर प्रदेश में अगले साल यानी 2027 में विधानसभा चुनाव (UP Election 2027) होना है। इससे पहले अयोध्या सीट को लेकर भाजपा और समाजवादी पार्टी सक्रिय दिखाई दे रही हैं। साल 2024 में फैजाबाद लोकसभा सीट पर बीजेपी को हार मिली थी। इसके बाद से अयोध्या के चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चा जारी है।
समाजवादी पार्टी ने पूर्व विधायक पवन पांडेय को अयोध्या से उम्मीदवार घोषित किया है। वहीं अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ को इसी सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती दी। योगी ने भी जवाब देते हुए अखिलेश को सीधे मुकाबले के लिए कहा है।
हालांकि दोनों बड़े नेताओं के अयोध्या से चुनाव लड़ने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अयोध्या सीट पर कब किसका दबदबा?
अयोध्या विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। यहां लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी (BJP) का मजबूत प्रभाव दिखाई दिया था। हालांकि अलग-अलग चुनावों में बीजेपी के वोट प्रतिशत और जीत के अंतर में बदलाव हुआ।
साल 1991 में राम जन्मभूमि आंदोलन का राजनीतिक प्रभाव काफी अधिक था। उस चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार लल्लू सिंह को 51.3 प्रतिशत वोट मिले थे। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 30 हजार 400 वोटों के अंतर से हराया था।
साल 1993 में हुए विधानसभा चुनाव में लल्लू सिंह ने दोबारा जीत हासिल की। हालांकि इस बार उनका वोट प्रतिशत घटकर 47.24 प्रतिशत रह गया था। बीजेपी की जीत का अंतर भी घटकर नौ हजार 238 वोटों पर पहुंच गया।
इस चुनाव में समाजवादी पार्टी करीब 40 प्रतिशत वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रही थी।
2012 में सपा ने बीजेपी को हराया
अयोध्या विधानसभा सीट (Ayodhya Assembly Seat) पर साल 2012 का चुनाव बीजेपी के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। समाजवादी पार्टी ने इस चुनाव में पवन पांडेय को अपना उम्मीदवार बनाया था।
पवन पांडेय ने बीजेपी के लल्लू सिंह को पांच हजार 404 वोटों से हरा दिया था। उन्हें कुल 28.74 प्रतिशत वोट मिले थे। वहीं बीजेपी का वोट प्रतिशत घटकर करीब 26 प्रतिशत रह गया था।
इस जीत के साथ समाजवादी पार्टी ने अयोध्या विधानसभा सीट पर कब्जा जमाया था।
इसके बाद साल 2017 में बीजेपी ने इस सीट पर दोबारा वापसी की। पार्टी के उम्मीदवार वेद प्रकाश गुप्ता ने पवन पांडेय को बड़े अंतर से हराया। वेद प्रकाश गुप्ता को उस चुनाव में 49.56 प्रतिशत वोट मिले थे। उनकी जीत का अंतर 50 हजार 440 वोट रहा था।
2022 में कम हुआ बीजेपी की जीत का अंतर
साल 2022 के विधानसभा चुनाव (UP Assembly Elections 2022) में बीजेपी ने अयोध्या सीट फिर अपने नाम की। पार्टी ने वेद प्रकाश गुप्ता को दोबारा उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने सपा के पवन पांडेय को हराकर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की।
हालांकि इस चुनाव में दोनों उम्मीदवारों के बीच मुकाबला पहले से ज्यादा करीबी रहा। बीजेपी की जीत का अंतर घटकर 19 हजार 990 वोट रह गया था। वहीं समाजवादी पार्टी के पवन पांडेय का वोट प्रतिशत बढ़कर 40.4 प्रतिशत पहुंच गया। बीजेपी को करीब 49 प्रतिशत वोट मिले थे।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दोनों चुनावों में जीत का अंतर काफी बदला था।
2024 में फैजाबाद लोकसभा सीट हारी बीजेपी
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण (Ram Mandir Ayodhya) के बाद साल 2024 में लोकसभा चुनाव हुए थे। इस चुनाव में फैजाबाद लोकसभा सीट पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।
समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अवधेश प्रसाद ने बीजेपी के लल्लू सिंह को हराया था। अवधेश प्रसाद की जीत के बाद फैजाबाद सीट देशभर में चर्चा का विषय बनी।
फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र में कुल पांच विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें अयोध्या के अलावा दरियाबाद और रुदौली शामिल हैं। मिल्कीपुर और बीकापुर विधानसभा क्षेत्र भी इसी लोकसभा सीट का हिस्सा हैं।
लोकसभा चुनाव में बीजेपी को अयोध्या विधानसभा क्षेत्र में बढ़त मिली थी। यहां पार्टी सपा से चार हजार 667 वोट आगे रही थी।
हालांकि बाकी चार विधानसभा क्षेत्रों में समाजवादी पार्टी ने बढ़त हासिल की। इसी वजह से लोकसभा सीट का कुल परिणाम सपा के पक्ष में गया।
अयोध्या में जातीय समीकरण भी अहम
अयोध्या विधानसभा सीट पर अलग-अलग सामाजिक वर्गों के मतदाताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। यहां दलित और ब्राह्मण समुदाय के मतदाताओं को चुनावी दृष्टि से अहम माना जाता है।
समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) को परंपरागत रूप से यादव और मुस्लिम समुदायों का समर्थन मिलता रहा है। वहीं बीजेपी को सवर्ण और अन्य पिछड़ा वर्ग के विभिन्न समुदायों से समर्थन मिलता है।
इनमें कुर्मी और निषाद के साथ मौर्य तथा राजभर समुदाय भी शामिल हैं। हालांकि किसी समुदाय के सभी मतदाता एक ही पार्टी को वोट नहीं देते।
बीजेपी के एक नेता ने सामाजिक समीकरणों को पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण बताया है। उनके मुताबिक सपा का ब्राह्मण उम्मीदवार बीजेपी के कुछ पारंपरिक वोट प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने दलित मतदाताओं की भूमिका को भी चुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया।
अयोध्या में विकास भी चुनावी मुद्दा
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के साथ कई बड़े विकास कार्य शुरू किए गए थे। शहर में सड़कों और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।
हालांकि लोकसभा चुनाव के बाद कुछ स्थानीय समस्याएं भी चर्चा में आई थीं। इनमें पानी निकासी की व्यवस्था और अधूरी सड़कों से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
अधिकारियों के मुताबिक शहर की अधिकांश बड़ी विकास परियोजनाओं का काम पूरा हो चुका है। कुछ योजनाओं पर अभी भी काम जारी रहने की बात कही गई है।
स्थानीय सुविधाओं और विकास कार्यों को लेकर बीजेपी और समाजवादी पार्टी के अपने-अपने दावे हैं।
बीजेपी ने अखिलेश को दिया जवाब
भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने भी अखिलेश यादव की चुनावी चुनौती पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी प्रमुख अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव नहीं जीत सकते।
त्रिपाठी ने अयोध्या में करीब 50 हजार करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने शहर में आयोजित होने वाले दीपोत्सव और दूसरे विकास कार्यों को भी महत्वपूर्ण बताया।
बीजेपी प्रवक्ता ने अखिलेश यादव से अयोध्या से अपनी उम्मीदवारी घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अखिलेश को अपना बयान वापस लेना चाहिए या चुनाव लड़ने की घोषणा करनी चाहिए।
फिलहाल अयोध्या विधानसभा सीट पर दोनों प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी जारी है। साल 2027 के चुनाव में उम्मीदवार कौन होंगे इसका फैसला आने वाले समय में होगा।