क्या सच में शादी और बच्चों से भाग रहे Gen Z और मिलेनियल्स? UNFPA सर्वे ने खोली हकीकत
आजकल अक्सर यह चर्चा सुनने को मिलती है कि जेन जी (Gen Z) और मिलेनियल्स शादी और बच्चों से दूरी बना रहे हैं। लोग मान बैठते हैं कि नई पीढ़ी पुराने रीति-रिवाजों और पारिवारिक बंधनों से कतराने लगी है।
वहीं यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड (UNFPA) की नई रिपोर्ट डेमोग्राफिक फ्यूचर्स सर्वे: चॉइस, लाइव्स एंड फ्यूचर्स इस बात से बिल्कुल अलग तस्वीर दिखाती है।
यह सर्वे 73 देशों के 18 से 39 साल के एक लाख 8 हजार 926 ऐसे युवाओं पर किया गया जो इंटरनेट से जुड़े हैं। इस सर्वे में युवाओं से उनके रिश्तों, पार्टनरशिप और माता-पिता बनने की सोच को करीब से समझा गया।
खास बात यह है कि ये आंकड़े 18 से 39 साल के पूरे समूह के हैं। इसलिए इसे सिर्फ जेन जी या मिलेनियल्स के माथे नहीं मढ़ा जा सकता। यह आज के हर उस युवा की आवाज है जो अपनी जिंदगी को संवारने की कोशिश कर रहा है।
शादी की चाहत आज भी बरकरार
रिपोर्ट से साफ पता चलता है कि दो-तिहाई से ज्यादा युवा शादी और साथ रहने वाले रिश्ते को ही अपना आदर्श मानते हैं। यानी युवाओं के दिल में घर बसाने की इच्छा पहले की तरह ही मजबूत है। फिर भी जमीन पर तस्वीर थोड़ी अलग दिखती है।
25 से 39 साल के जो युवा पार्टनर चाहते हैं, उनमें से करीब एक-चौथाई इस समय पूरी तरह सिंगल हैं और किसी को डेट भी नहीं कर रहे हैं। यहां उनकी चाहत और हकीकत के बीच एक बड़ा फर्क नजर आता है।
रिश्ते की राह में सबसे बड़ी रुकावटें क्या हैं?
आर्थिक और घर की तंगी: 57 फीसदी युवाओं ने माना कि पैसा और घर से जुड़ी दिक्कतें पार्टनर ढूंढने या रिश्ता आगे बढ़ाने में सबसे बड़ी बाधा बनती हैं।
पैसों की सुरक्षा की शर्त: 81 फीसदी युवाओं का कहना है कि किसी भी पार्टनरशिप या रिश्ते में बंधने से पहले आर्थिक सुरक्षा होना बहुत जरूरी है।
बच्चे नहीं चाहिए या सही समय का इंतजार?
परिवार बढ़ाने को लेकर भी बातें जैसी सुनाई देती हैं असलियत वैसी नहीं है। सर्वे के सात क्षेत्रीय ग्रुपों में से पांच में ज्यादातर युवाओं ने दो बच्चों वाले परिवार को सबसे अच्छा आकार बताया।
इसके अलावा करीब 80 फीसदी लोगों ने खुलकर कहा कि बच्चों से मिलने वाली खुशी और सुकून ही उनकी बच्चे चाहने की सबसे बड़ी वजह है।
वहीं आज का युवा केवल मन की इच्छा से बच्चे पैदा करने का जोखिम नहीं लेना चाहता। वे जिम्मेदारी को पूरी तरह समझते हैं।
माता-पिता बनने के लिए युवा क्या जरूरी मानते हैं?
आर्थिक सुरक्षा: 88 फीसदी युवाओं ने कहा कि बच्चे पैदा करने से पहले पैसे की मजबूती बेहद जरूरी है।
स्थिर नौकरी: 87 फीसदी लोगों ने सुरक्षित और पक्की नौकरी को माता-पिता बनने की अहम शर्त माना है।
भावनात्मक तैयारी: 85 फीसदी युवाओं का मानना है कि केवल पैसा ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से तैयार होना भी उतना ही आवश्यक है।
रास्ते की मुश्किलें: करीब 72 फीसदी युवाओं ने माना कि आर्थिक तंगी और रहने के लिए घर की परेशानी बच्चे पैदा करने के फैसले में सबसे बड़ा रोड़ा हैं।
आंख मूंदकर फैसला नहीं ले रहे युवा
इन सब मुश्किलों के बावजूद युवाओं ने हिम्मत नहीं हारी है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब दो-तिहाई लोगों ने कहा कि वे अपने भविष्य को लेकर काफी हद तक या पूरी तरह से आशावादी हैं।
इसका सीधा सा मतलब यह है कि युवाओं के मन से शादी, परिवार और बच्चों की इच्छा मिटी नहीं है। फर्क बस इतना आया है कि आज के नौजवान आंख मूंदकर कोई फैसला नहीं ले रहे हैं।
पैसा, स्थिर नौकरी, सिर पर पक्की छत, भावनात्मक समझ और सही जीवनसाथी का चुनाव, ये सब वो जरूरी बातें हैं जो उनके फैसलों की दिशा तय कर रही हैं।
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