जोमैटो की प्लेटफॉर्म फीस 7 महीने में दूसरी बार बढ़ी, अब हर ऑर्डर पर देने होंगे 14.90 रुपए
News In Short
- जोमैटो ने प्लेटफॉर्म फीस 14.90 रुपए की बढ़ोतरी की।
- बढ़ोतरी का कारण कच्चे तेल की कीमतों का असर।
- 7 महीने में दूसरी बार प्लेटफॉर्म फीस बढ़ी।
- जोमैटो और स्विगी के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी।
- जोमैटो ने अपना मुनाफा सुधारने के लिए कदम उठाया।
News In Detail
जोमैटो ने 7 महीने में दूसरी बार प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाई है। अब हर ऑर्डर पर 14.90 रुपए की फीस देनी होगी। इस वृद्धि का कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और कंपनी के ऑपरेशनल खर्चों का बढ़ना बताया जा रहा है। जोमैटो ने पहले 2 रुपए का प्लेटफॉर्म शुल्क शुरू किया था और अब यह 14.90 रुपए हो गया है।
जोमैटो ने बढ़ाई प्लेटफॉर्म फीस
जोमैटो ने 7 महीने के भीतर दूसरी बार प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी की है। इससे पहले सितंबर-2025 में 20% का इजाफा किया था। अगस्त 2023 में जोमैटो ने अपना मार्जिन बढ़ाने और प्रॉफिटेबल बनने के लिए पहली बार 2 रुपए का प्लेटफॉर्म शुल्क शुरू किया था।
अब हर ऑर्डर पर प्लेटफॉर्म फीस 14.90 रुपए देनी होगी, जो पहले 12.50 रुपए थी। इस वृद्धि का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी है, जिससे डिलीवरी पार्टनर्स और कंपनी के लॉजिस्टिक ऑपरेशन्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। इससे डिलीवरी शुल्क भी बढ़ जाएगा।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें जोमैटो की प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाने का प्रमुख कारण बनी हैं। बढ़ती कीमतों के कारण ऑनलाइन फूड डिलीवरी पार्टनर्स का खर्च बढ़ गया है, जिससे कंपनी को अपनी फीस में वृद्धि करनी पड़ी। इसके अलावा, कंपनी अपनी प्रॉफिटेबिलिटी सुधारने के लिए समय-समय पर फीस में बदलाव करती रहती है।
स्विगी और जोमैटो में प्रतियोगिता
जोमैटो की मुख्य प्रतिद्वंदी स्विगी है, जो अब तक ₹14.99 तक प्लेटफॉर्म फीस वसूल रही है। दोनों कंपनियों के बीच एक अनौपचारिक प्रतिस्पर्धा बनी रहती है, जहां एक कंपनी द्वारा शुल्क बढ़ाने पर दूसरी भी इसके बाद अपनी फीस बढ़ा देती है। यही वजह है कि हाल ही में जोमैटो ने फीस बढ़ाई है।
जोमैटो का मुनाफा बढ़ाने की कोशिश
जोमैटो ने पहले 2 रुपए की प्लेटफॉर्म शुल्क शुरू किया था और अब इसे 14.90 रुपए कर दिया है। यह कदम कंपनी के मुनाफे को बढ़ाने और प्रॉफिटेबल बनने के लिए उठाया गया है।
जोमैटो अपनी प्रॉफिटेबिलिटी सुधारने के लिए समय-समय पर प्लेटफॉर्म फीस में बदलाव करती रहती है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो।
जोमैटो का इतिहास
दीपिंदर गोयल और पंकज चड्ढा ने 2008 में फूडीबे के नाम से अपनी फूड डायरेक्टरी वेबसाइट लॉन्च की थी। 2010 में इसका नाम बदलकर जोमैटो किया गया। यह कंपनी धीरे-धीरे देशभर और विदेशों में भी फैल गई। 2012 तक जोमैटो ने अपनी सर्विसेज श्रीलंका, यूएई, दक्षिण अफ्रीका और फिलीपींस में बढ़ा दी थीं।
FAQ
- जोमैटो ने प्लेटफॉर्म फीस क्यों बढ़ाई?
जोमैटो ने कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और डिलीवरी पार्टनर्स के खर्च में इजाफे के कारण प्लेटफॉर्म फीस 14.90 रुपए तक बढ़ाई है। - जोमैटो और स्विगी के प्लेटफॉर्म फीस में क्या अंतर है?
जोमैटो ने 14.90 रुपए प्लेटफॉर्म फीस वसूली है, जबकि स्विगी 14.99 रुपए प्लेटफॉर्म फीस वसूल रही है। दोनों कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा है। - जोमैटो का मुनाफा कैसे बढ़ रहा है?
जोमैटो ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाकर अपनी प्रॉफिटेबिलिटी सुधारने की कोशिश की है। इसके जरिए कंपनी का मुनाफा बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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