11 या 21 नहीं, दिवाली की रात जलाएं 14 दीये, पद्म पुराण के मुताबिक जानें घर के किन 14 स्थानों पर दीया रखना है जरूरी

Kaushiki | Oct 30, 2026, 15:04 IST
दिवाली पूजन की रात 14 दीपक का रहस्य खोलता है पद्म पुराण
The secret of the 14 lamps holds profound divine significance during Diwali worship. According to the Padma Purana, placing oil lamps at fourteen specific locations brings boundless prosperity.
दिवाली का त्योहार हर साल हमारे जीवन में ढेर सारी खुशियां लेकर आता है। रोशनी के इस पावन पर्व पर पूरा देश दीयों की जगमगाहट से नहा उठता है। हम सब अपने घरों को सुंदर दीयों से सजाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों में दीये जलाने का एक विशेष विधान है? लोग अक्सर अपनी पसंद से 11 या 21 दीये जला लेते हैं।

लेकिन शास्त्रों के मुताबिक दिवाली पूजन की रात 14 दीये जलाने का विशेष विधान माना गया है। सनातन परंपरा में 14 दीपक का रहस्य बहुत गहरा माना गया है। पद्म पुराण में इन 14 स्थानों के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलती है।



इन खास जगहों पर दीया रखने से घर की दरिद्रता दूर भागती है। मां लक्ष्मी का वास हमेशा आपके घर में बना रहता है। आइए जानें वे 14 स्थान कौन से हैं जहां आपको दीपक जरूर रखना चाहिए।



14 दीपक का रहस्य और दीपदान का महत्व

सनातन धर्म में दिवाली का पर्व केवल रोशनी का उत्सव नहीं है, बल्कि यह अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक माना जाता है। कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाए जाने वाले इस महापर्व पर दीपदान करने का विशेष आध्यात्मिक महत्व है।



पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, दिवाली की रात्रि को विधि-विधान से दीये जलाने पर साधक के जीवन से दरिद्रता, दुख और सभी मानसिक व शारीरिक कष्ट मिट जाते हैं।



सनातन धर्म ग्रंथों और शास्त्रों में हर धार्मिक अनुष्ठान के सटीक नियम तय किए गए हैं। इसी परंपरा में पद्म पुराण के मुताबिक दिवाली पूजन की रात 14 विशेष स्थानों पर दीपक जलाने का विधान बताया गया है।



पुराणों के मुताबिक वो 14 स्थान कौन-कौन से हैं ?

पहला दीपक: तुलसी का पौधा



  • पहला दीया तुलसी के पौधे के पास रखा जाता है। तुलसी में लक्ष्मी जी का वास माना जाता है।

दूसरा दीपक: घर का मुख्य द्वार



  • दूसरा दीया घर के मुख्य दरवाजे पर रखें। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं करती है।

तीसरा दीपक: पूजा घर का स्थान



  • तीसरा दीया अपने घर के मंदिर में जलाएं। इससे इष्टदेव का आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है।

चौथा दीपक: पीने के पानी का स्थान



  • चौथा दीया जल रखने वाले स्थान पर रखें। ऐसा करने से पितृदेव प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं।

पांचवां दीपक: पीपल का पवित्र पेड़



  • पांचवां दीया पीपल के पेड़ के नीचे जलाएं। पीपल में त्रिदेवों का वास माना गया है।

छठा दीपक: बिलपत्र का पेड़



  • छठा दीया बेलपत्र के पेड़ के नीचे रखें। इससे भगवान शिव की कृपा परिवार पर रहती है।

सातवां दीपक: घर की रसोई



  • सातवां दीया रसोई घर में जलाकर रखें। इससे घर में अन्नपूर्णा माता की कृपा रहती है।

आठवां दीपक: शौचालय के पास



  • आठवां दीया शौचालय के बाहर दूर रखें। इससे घर की नकारात्मक तरंगे पूरी तरह नष्ट होती हैं।

नौवां दीपक: घर की छत



  • नौवां दीया घर की छत पर रखें। यह आकाश दीप के रूप में माना जाता है।

दसवां दीपक: चौराहे पर रखें



  • दसवां दीया पास के किसी चौराहे पर रखें। इससे चारों दिशाओं से शुभ समाचार मिलते हैं।

ग्यारहवां दीपक: घर की तिजोरी



  • ग्यारहवां दीया धन रखने वाली जगह रखें। इससे कारोबार में धन की वृद्धि होती है।

बारहवां दीपक: कूड़ेदान के पास



  • बारहवां दीया कूड़ेदान से थोड़ी दूरी पर रखें। इससे घर में कभी अलक्ष्मी नहीं आती हैं।

तेरहवां दीपक: पीपल या बरगद



  • तेरहवां दीया किसी बड़े वृक्ष की जड़ में रखें। इससे पर्यावरण और प्रकृति का आशीर्वाद मिलता है।

चौदहवां दीपक: घर की बाउंड्री



  • चौदहवां दीया घर के बाहरी कोने में रखें। इससे पूरा घर सुरक्षा कवच से ढक जाता है।

दीवाली के दिन सही विधि से जलाएं सभी दीये

सरसों का तेल और घी



  • दीये जलाने के लिए शुद्ध सरसों तेल या देसी घी का उपयोग करें। तेल का दीया बहुत शुभ माना जाता है।

रुई की सही बाती



  • हर दीये में साफ रुई की बाती का प्रयोग करें। लाल धागे की बाती भी बहुत अच्छी मानी जाती है।

दिशा का रखें ध्यान



  • दीये की ज्योति हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में होनी चाहिए। दक्षिण दिशा में मुख रखना वर्जित माना गया है।

अक्षत और रोली का प्रयोग



  • दीया जलाने से पहले उस पर थोड़ा अक्षत जरूर चढ़ाएं। रोली से दीये पर छोटा तिलक लगाएं।

दिवाली पूजन में रखें सावधानी

खंडित दीये न जलाएं



  • पूजन के लिए कभी भी टूटे दीये का उपयोग न करें। खंडित दीया पूजा में अशुभ माना जाता है।

स्वच्छता का विशेष ध्यान



  • दीया रखने वाली जगह को पहले साफ कर लें। गंदे स्थान पर दीया कभी न रखें।

समय का रखें ध्यान



  • प्रदोष काल में ही दीये जलाना सबसे उत्तम होता है। शाम ढलते ही दीपदान शुरू कर दें।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।



FAQs:



  1. दिवाली पर 14 दीपक जलाने का महत्व क्या है?
    दिवाली पर 14 दीपक जलाने का महत्व घर की दरिद्रता को दूर करने और मां लक्ष्मी का वास सुनिश्चित करने में है। पद्म पुराण के अनुसार, इन दीपकों को विशेष स्थानों पर जलाने से साधक के जीवन से दुख और मानसिक-शारीरिक कष्ट समाप्त होते हैं।
  2. दिवाली की रात किस-किस स्थान पर दीपक जलाने चाहिए?
    दिवाली की रात 14 विशेष स्थानों पर दीपक जलाना चाहिए, जैसे कि तुलसी का पौधा, घर का मुख्य द्वार, पूजा घर, पीने के पानी का स्थान, पीपल का पेड़, रसोई, और घर की छत समेत अन्य स्थान।
  3. दीप जलाने के लिए कौन सा तेल और बाती का उपयोग करना चाहिए?
    दीप जलाने के लिए शुद्ध सरसों का तेल या देसी घी का उपयोग करना चाहिए। बाती के लिए साफ रुई या लाल धागे की बाती का प्रयोग करना सुप्रसिद्ध माना जाता है।
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