कार्तिक और अगहन मास में भव्य होंगी भगवान महाकाल की सवारियां, जानें महाकाल की सवारी का शेड्यूल

Kaushiki | Oct 07, 2026, 14:02 IST
छह बार नगर भ्रमण पर निकलेंगे बाबा महाकाल
भगवान महाकाल अगले तीन महीनों में छह बार नगर भ्रमण पर निकलेंगे। आश्विन से मार्गशीर्ष तक चांदी की पालकी में सवार होकर प्रजा का हाल जानेंगे। विजयादशमी पर 20 अक्टूबर को दशहरा मैदान पहुंचकर शमी वृक्ष का पूजन करेंगे। वैकुंठ चतुर्दशी की रात 23 नवंबर को गोपाल मंदिर में हरि-हर मिलन होगा। कार्तिक और अगहन मास में शिप्रा तट पर तीर्थपूजन की परंपरा निभाई जाएगी। जानें महाकाल की सवारी का शेड्यूल

मध्य प्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन में उत्सव का माहौल बनने जा रहा है। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर की पूजन परंपरा बेहद खास मानी जाती है। आने वाले तीन महीने श्रद्धालुओं के लिए बहुत ही पावन रहने वाले हैं।



अश्विन मास से लेकर मार्गशीर्ष मास तक भगवान महाकाल छह बार नगर भ्रमण पर निकलेंगे।भगवान महाकाल चांदी की सुंदर पालकी में सवार होकर प्रजा का हाल जानने निकलेंगे। उज्जैन में महाकाल को केवल भगवान नहीं बल्कि यहां का राजा माना जाता है। इसी वजह से राजाधिराज के नगर भ्रमण की परंपरा सदियों से चली आ रही है।



सावन और भादवा मास की सवारियों के बारे में तो सब जानते हैं। लेकिन इसके बाद भी धार्मिक पर्वों पर भगवान महाकाल नगर भ्रमण पर निकलते हैं। विजयादशमी, कार्तिक मास और अगहन मास में भव्य सवारियां निकाली जाती हैं।



इस दौरान पूरी उज्जैन नगरी बाबा महाकाल के जयकारों से गूंज उठती है। लाखों श्रद्धालु अपने राजा के दर्शन करने के लिए सड़कों पर उमड़ पड़ते हैं। आइए जानते हैं कि आने वाले महीनों में भगवान महाकाल कब-कब दर्शन देंगे।



उमा-सांझी उत्सव का समापन

महाकाल की सवारियों की शुरुआत से पहले उमा माता की सवारी निकाली जाती है। मंदिर में 12 अक्टूबर को अश्विन शुक्ल द्वितीया पर उमा माता नगर भ्रमण पर निकलेंगी। माता पार्वती चांदी की पालकी में सवार होकर रामघाट की ओर प्रस्थान करेंगी।



रामघाट पर उमा-सांझी उत्सव के समापन के अवसर पर सांझी का विसर्जन होगा। भगवान महाकाल भी नंदी पर मनमहेश रूप में सवार होकर माता के साथ चलेंगे। वर्ष में केवल एक बार माता उमा की यह दिव्य सवारी निकाली जाती है। इस दौरान पूरा मार्ग शिव और शक्ति के जयकारों से गूंज उठता है।



वैकुंठ चतुर्दशी पर होगा हरि-हर मिलन

कार्तिक मास में सवारी का सबसे अद्भुत और भावुक प्रसंग वैकुंठ चतुर्दशी का होता है। इस बार 23 नवंबर की रात भगवान महाकाल की सवारी गोपाल मंदिर पहुंचेगी। रात ठीक 12 बजे गोपाल मंदिर में हरि-हर मिलन का दिव्य दृश्य दिखेगा। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, देवशयनी एकादशी पर विष्णु जी पाताल लोक चले जाते हैं।



उस समय भगवान विष्णु सृष्टि का पूरा भार भगवान शिव को सौंप देते हैं। देवप्रबोधिनी एकादशी पर जागने के बाद वैकुंठ चतुर्दशी पर हरि-हर का मिलन होता है। महाकाल स्वयं गोपाल मंदिर जाकर श्रीहरि विष्णु को पुनः सृष्टि का भार सौंपते हैं। इस पावन प्रसंग को देखने के लिए आधी रात को भारी भीड़ जुटती है।



कार्तिक और अगहन मास में शिप्रा तट पर तीर्थपूजन

कार्तिक और मार्गशीर्ष मास को स्नान-दान के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। भगवान महाकाल उज्जैन के राजा हैं, इसलिए वे स्वयं तीर्थपूजन की परंपरा निभाते हैं। इन महीनों में निकलने वाली सवारियों में महाकाल शिप्रा नदी के तट पहुंचेंगे।



शिप्रा तट पर राजा महाकाल अपनी प्रजा के साथ जल और तीर्थ का पूजन करेंगे। यह परंपरा प्रकृति, जल और नदियों के प्रति आभार व्यक्त करने का संदेश देती है। राजा और प्रजा का यह सामूहिक पूजन उज्जैन की संस्कृति की पहचान है।



कार्तिक और अगहन की सवारियों का शेड्यूल

भगवान महाकाल की आगामी सवारियों की तिथियां तय कर ली गई हैं। कार्तिक मास की पहली सवारी 16 नवंबर 2026 को धूमधाम से निकाली जाएगी। कार्तिक मास की दूसरी सवारी 23 नवंबर 2026 को नगर भ्रमण पर निकलेगी।



23 नवंबर की ही रात 11 बजे हरि-हर मिलन की विशेष सवारी निकलेगी। इसके बाद मार्गशीर्ष यानी अगहन मास की पहली सवारी 30 नवंबर को निकलेगी। अगहन मास की दूसरी और अंतिम सवारी 7 दिसंबर 2026 को निकाली जाएगी। भक्त इन तिथियों पर बाबा महाकाल के दिव्य रूपों का दर्शन कर सकेंगे।



महाकाल की राजसी परंपरा

उज्जैन में भगवान महाकाल को केवल ईश्वर नहीं, बल्कि राजा माना जाता है। यही वजह है कि उनकी सवारियों में राजसी ठाट-बाट और लश्कर शामिल होता है। पुलिस बल, बैंड-बाजे और ध्वज पताकाओं के साथ राजा का जुलूस निकलता है।



नगर भ्रमण के दौरान भक्त अपने राजा का भव्य स्वागत और पूजन करते हैं। यह परंपरा सदियों से अवंतिका नगरी की धार्मिक पहचान बनी हुई है। अगर आप भी दर्शन की योजना बना रहे हैं तो समय पर उज्जैन पहुंचे।



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