भाई दूज पर भाई के माथे पर कैसे लगाएं तिलक? जानें यमराज-यमुना की कथा और सूखा नारियल देने की परंपरा

Kaushiki | Nov 08, 2026, 10:00 IST
भाई दूज पर तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त
Bhai Dooj 2026: A sister applies tilak on her brother's forehead and performs aarti while praying for his long life and happiness.
Bhai Dooj 2026: दिवाली के बाद भाई-बहन के प्यार का खास त्योहार भाई दूज मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाती हैं, आरती उतारती हैं और उनकी लंबी उम्र व खुशहाल जीवन की प्रार्थना करती हैं। कई परिवारों में भाई को मिठाई खिलाने और सूखा नारियल देने की भी परंपरा है।

ऐसे में क्या आप जानते हैं कि भाई दूज पर तिलक लगाने का सही तरीका क्या है? इस दिन यमराज और यमुना की पूजा क्यों की जाती है ? आइए भाई दूज की पूजा विधि और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को जानें।



भाई दूज पर तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त

साल 2026 में भाई दूज का त्योहार बुधवार, 11 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करेंगी। द्रिक पंचांग के मुताबिक, भाई दूज पर तिलक लगाने के लिए दोपहर में 2 घंटे 10 मिनट का शुभ समय है।



भाई दूज पर तिलक लगाने का मुहूर्त

भाई दूज पर भाई को तिलक लगाने की सही विधि

भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है। यह त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे। तभी से भाई-बहन के इस पवित्र रिश्ते को मनाने की परंपरा जुड़ी हुई है।



भाई दूज के दिन बहनें सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनती हैं। इसके बाद पूजा की थाली तैयार की जाती है। थाली में रोली, अक्षत यानी साबुत चावल, दीपक, मिठाई और फूल रख सकते हैं। कई परिवारों में तिलक के समय भाई को आसन पर बैठाया जाता है।



इसके बाद बहन भाई के माथे पर रोली या चंदन से तिलक लगाती है और उस पर अक्षत लगाती है। तिलक करने के बाद भाई की आरती उतारी जाती है। इसके बाद बहन भाई को मिठाई खिलाती है और उसकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती है।



भाई दूज पर अष्ट चिरंजीवी का क्या है महत्व?

हिंदू धार्मिक परंपराओं में अष्ट चिरंजीवी का विशेष महत्व बताया गया है। चिरंजीवी का अर्थ ऐसे व्यक्तित्वों से है जिन्हें धार्मिक मान्यताओं में अत्यंत दीर्घायु या अमर माना गया है। अष्ट चिरंजीवी परंपरा में अश्वत्थामा, राजा महाबलि, वेदव्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और मार्कण्डेय ऋषि के नाम लिए जाते हैं।



भाई दूज पर कुछ परिवार भाई की लंबी उम्र की कामना करते हुए इनका स्मरण करते हैं। धार्मिक विश्वास है कि अष्ट चिरंजीवी का स्मरण दीर्घायु, साहस और कल्याण की प्रार्थना का प्रतीक है।



भाई दूज पर यमराज और यमुना की पूजा क्यों होती है?

भाई दूज के पीछे यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है। कथा के मुताबिक, यमुना अपने भाई यमराज को बार-बार घर आने का निमंत्रण देती थीं, लेकिन व्यस्तता के कारण यमराज उनसे मिलने नहीं आ पाते थे।



एक दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे। भाई को देखकर यमुना बहुत प्रसन्न हुईं। उन्होंने अपने भाई का आदर-सत्कार किया, तिलक लगाया और भोजन कराया। बहन के प्रेम और स्वागत से प्रसन्न होकर यमराज ने उनसे वरदान मांगने को कहा।



यमुना ने इच्छा जताई कि हर साल इसी तिथि पर भाई अपनी बहन से मिलने आएं। साथ ही भाई-बहन के प्रेम और कल्याण से जुड़ा आशीर्वाद भी बना रहे। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, इसी कथा से भाई दूज पर बहन के घर भोजन करने और तिलक करवाने की परंपरा जुड़ी हुई है।



भाई दूज पर यमुना स्नान और यम तर्पण का क्या है महत्व?

भाई दूज को यम द्वितीया कहने का एक कारण इस दिन यमराज और यमुना से जुड़ी धार्मिक परंपराएं हैं। पौराणिक मान्यताओं में कार्तिक शुक्ल द्वितीया पर यमुना स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। कुछ धार्मिक परंपराओं में भाई-बहन के साथ यमुना स्नान करने को शुभ माना जाता है।



Yam Dwitiya Rituals में यमराज के स्मरण और तर्पण की परंपरा का भी उल्लेख मिलता है। तर्पण का सामान्य अर्थ जल अर्पित करना है। यमराज को जल अर्पित करने की विधि क्षेत्रीय परंपराओं के मुताबिक अलग हो सकती है। स्कंद पुराण से जुड़ी प्रचलित धार्मिक मान्यताओं में यम द्वितीया और यमुना स्नान के पुण्य का वर्णन किया जाता है।



भाई दूज पर बहन के हाथों तिलक करवाने और यमराज-यमुना का स्मरण करने से भाई को दीर्घायु और कल्याण का आशीर्वाद मिलता है। कुछ प्रचलित कथाओं में इस दिन यमुना स्नान और बहन के घर भोजन करने को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति की कामना से जोड़ा गया है।



सूखा नारियल क्यों दिया जाता है?

भाई दूज पर कई जगहों पर बहनें अपने भाई को सूखा नारियल यानी गोला देती हैं। नारियल को हिंदू पूजा-पाठ में शुभ और पवित्र माना जाता है। कुछ परिवारों में नारियल को भाई की सुख-समृद्धि और रिश्ते की मजबूती का प्रतीक समझा जाता है। इसलिए तिलक और आरती के बाद भाई को नारियल भेंट किया जाता है।



भाई दूज पर किन बातों का रखें ध्यान?

भाई दूज पर पूजा करने से पहले पूजा स्थल की साफ-सफाई कर लें। तिलक के लिए स्वच्छ रोली या चंदन और साबुत चावल का इस्तेमाल करें। दीपक जलाते समय सावधानी रखें। छोटे बच्चों को जलते दीपक से दूर रखें और मिठाई और प्रसाद भी साफ-सुथरे तरीके से तैयार करें। भाई दूज का त्योहार केवल धार्मिक पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि भाई-बहन के आपसी प्रेम और सम्मान को भी दर्शाता है।



Bhai Dooj 2026 पर बहनें अपनी पारिवारिक परंपरा मुताबिक तिलक और आरती कर सकती हैं। इस दिन भाई-बहन एक-दूसरे के सुख, सुरक्षा और खुशहाल जीवन की कामना करते हैं। यही इस पर्व की सबसे महत्वपूर्ण भावना है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की अपनी परंपराएं भी होती हैं। कहीं तिलक से पहले भाई के हाथ में नारियल दिया जाता है, तो कहीं पूजा पूरी होने के बाद नारियल और मिठाई भेंट की जाती है।



डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।



FAQs:



  1. भाई दूज पर तिलक लगाने का सही तरीका क्या है?
    भाई दूज पर बहनें स्नान कर साफ कपड़े पहनकर पूजा की थाली तैयार करती हैं जिसमें रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और फूल होते हैं। फिर भाई को आसन पर बैठाकर बहन उसके माथे पर रोली या चंदन से तिलक लगाती है और अक्षत लगाती है। इसके बाद भाई की आरती उतारी जाती है और मिठाई खिलाई जाती है।
  2. भाई दूज पर यमराज और यमुना की पूजा क्यों की जाती है?
    भाई दूज पर यमराज और यमुना की पूजा की जाती है क्योंकि इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर आए थे। यमराज ने यमुना से वरदान मांगा था कि हर साल इसी तिथि पर भाई अपनी बहन से मिलने आएं, जिससे भाई-बहन के प्रेम और कल्याण का आशीर्वाद बना रहे।
  3. भाई दूज पर अष्ट चिरंजीवी का क्या महत्व है?
    भाई दूज पर अष्ट चिरंजीवी का स्मरण करना दीर्घायु, साहस और कल्याण की प्रार्थना का प्रतीक माना जाता है। अष्ट चिरंजीवी में अश्वत्थामा, राजा महाबलि, एवं हनुमान आदि शामिल हैं, जिनका स्मरण भाई की लंबी उम्र के लिए किया जाता है।
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