चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि को प्रसन्न करने के लिए चढ़ाएं ये खास चीज
चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन (25 मार्च) महासप्तमी के नाम से जाना जाता है। ये दिन शक्ति की देवी मां कालरात्रि को पूरी तरह समर्पित है। मां का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक और उग्र लगता है।
उनके शरीर का रंग घने काले अंधकार की तरह गहरा है। उनकी साधना न केवल शत्रुओं पर विजय दिलाती है, बल्कि मन से हर प्रकार की नकारात्मकता और भय को मिटाकर असीम आत्मविश्वास और मानसिक बल का संचार करती है। आइए जानें....
मां कालरात्रि की पौराणिक कथा
प्राचीन समय में रक्तबीज नामक दैत्य ने भारी आतंक मचाया था। उस असुर को ब्रह्मा जी से एक बहुत विशेष वरदान मिला था। उसके खून की हर बूंद से नया रक्तबीज पैदा होता था।
देवताओं की रक्षा के लिए मां दुर्गा ने कालरात्रि स्वरूप लिया। युद्ध के दौरान मां ने अपना मुख बहुत विशाल कर लिया। माँ ने रक्तबीज का खून जमीन पर गिरने से पहले पी लिया। इस तरह माँ ने उस पापी दैत्य का अंत कर दिया।
मां कालरात्रि का स्वरूप
भले ही मां का रूप डरावना है पर वे बहुत दयालु हैं। मां को शुभंकरी भी कहा जाता है क्योंकि वे शुभ फल देती हैं। मां के चार हाथ हैं जो अलग-अलग संदेश देते हैं। ऊपर वाला दायां हाथ हमेशा भक्तों को वरदान प्रदान करता है।
नीचे वाला दायां हाथ भक्तों को निर्भय रहने का आशीर्वाद देता है। बाएं हाथों में लोहे का कांटा और खड्ग (तलवार) सुशोभित है। ये अस्त्र दुष्टों और आसुरी शक्तियों के विनाश के लिए हैं।
महासप्तमी की पूजा विधि
- सप्तमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
- इस दिन गहरे नीले या लाल रंग के कपड़े पहनना शुभ है।
- पूजा घर में मां कालरात्रि की प्रतिमा श्रद्धा से स्थापित करें।
- मां को रोली, कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाएं।
- लाल रंग के फूल मां को विशेष रूप से प्रिय होते हैं।
- मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाना बहुत मंगलकारी है।
- गुड़ के मालपुए चढ़ाने से मां बहुत जल्दी प्रसन्न होती हैं।
मां कालरात्रि का मंत्र
मां की पूजा के लिए "ॐ देवी कालरात्र्यै नमः" मंत्र जपें। इनकी आराधना से हर तरह का डर समाप्त हो जाता है। भूत, प्रेत और नकारात्मक शक्तियां पास भी नहीं फटकती हैं।
मां अपने भक्तों को अग्नि और जल के भय से बचाती हैं। शत्रुओं पर विजय पाने के लिए यह दिन सर्वोत्तम माना गया है। मां कालरात्रि आत्मविश्वास बढ़ाती हैं और मानसिक शक्ति प्रदान करती हैं। सच्चे मन से की गई पूजा कभी खाली नहीं जाती।
मां कालरात्रि आरती
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