इस दिन से शुरू होगा चातुर्मास 2026, चार महीनों तक नहीं होंगे मांगलिक काम
Chaturmas 2026 Start Date: सनातन धर्म में चातुर्मास का बहुत अधिक महत्व माना गया है। यह समय आत्मिक शुद्धि, तप और साधना के लिए सबसे उत्तम होता है। चातुर्मास का सीधा सा मतलब होता है चार महीने की विशेष अवधि। यह समय हर साल आषाढ़ महीने से शुरू होकर कार्तिक महीने तक चलता है।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इन चार महीनों में भगवान विष्णु शयन करते हैं। वे क्षीर सागर में शेषनाग की शय्या पर योग निद्रा में चले जाते हैं। भगवान के सोने के कारण सभी तरह के मांगलिक कार्य रोक दिए जाते हैं। हालांकि यह समय भगवान की भक्ति के लिए सबसे श्रेष्ठ होता है।
पंचांग के मुताबिक, साल 2026 में चातुर्मास 25 जुलाई से शुरू होगा। इस दिन शनिवार है और देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इसके बाद 20 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी पर इसका समापन होगा। इसके बाद ही सारे शुभ कार्य दोबारा शुरू हो सकेंगे।
कब शुरू होगा चातुर्मास
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, यह समय अपनी इंद्रियों को वश में करने का है। इन चार महीनों में किए गए दान और तप का फल कई गुना मिलता है। जब भगवान विष्णु सोते हैं, तब महादेव सृष्टि का संचालन करते हैं। यही वजह है कि इसमें सावन के महीने का विशेष महत्व होता है।
सावन में भगवान शिव की पूजा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसके बाद भाद्रपद के महीने में श्री कृष्ण और गणेश जी की पूजा की जाती है। पुराणों के मुताबिक भगवान विष्णु ने योगनिद्रा को अपने नेत्रों में स्थान दिया था। तभी से इस पावन काल को चातुर्मास कहा जाता है। पंचांग के मुताबिक, साल 2026 में चातुर्मास 25 जुलाई से शुरू होगा।
सेहत और विज्ञान का खास कनेक्शन
चातुर्मास का पूरा समय देश में वर्षा ऋतु यानी मानसून का होता है। वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो इस मौसम में सूर्य की रोशनी कम मिलती है। वातावरण में नमी बहुत बढ़ जाती है। नमी के कारण हवा में बैक्टीरिया और कीड़े-मकोड़े तेजी से पनपते हैं।
इस मौसम में इंसानों की पाचन शक्ति भी काफी कमजोर हो जाती है। इसलिए हमारे ऋषियों ने चातुर्मास में सात्विक भोजन करने का नियम बनाया था। उपवास रखने से हमारा शरीर कई तरह की बीमारियों और इंफेक्शन से सुरक्षित रहता है।
चातुर्मास में खान-पान के नियम
- सावन का नियम: चातुर्मास के पहले महीने यानी सावन में हरी पत्तेदार सब्जियां नहीं खानी चाहिए।
- भाद्रपद का नियम: दूसरे महीने यानी भाद्रपद में दही और उससे बनी चीजों का त्याग करें।
- आश्विन का नियम: तीसरे महीने यानी आश्विन में दूध का सेवन पूरी तरह बंद या कम कर दें।
- कार्तिक का नियम: चौथे महीने यानी कार्तिक में उड़द, चना दाल और राई खाना वर्जित होता है।
- तामसिक भोजन पर रोक: इस पूरे समय में प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा से पूरी तरह दूर रहें।
इस दौरान क्या करें और क्या न करें
- चातुर्मास के दौरान जमीन पर चटाई बिछाकर सोना बहुत शुभ माना जाता है।
- इसे तपस्या का ही एक मुख्य हिस्सा माना गया है।
- इन चार महीनों में शारीरिक और मानसिक रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- हमेशा सच बोलें, किसी की बुराई न करें और मौन रहने का प्रयास करें।
- भगवान के शयन काल में शादी-ब्याह पूरी तरह से वर्जित होते हैं।
- माना जाता है कि इस दौरान देवताओं का आशीर्वाद नहीं मिल पाता।
- नए मकान की नींव रखना या गृह प्रवेश करना भी अशुभ माना जाता है।
- इसके अलावा बच्चों का मुंडन और जनेऊ संस्कार भी नहीं किया जाता है।
शादी के बचे हैं सिर्फ 7 शुभ मुहूर्त
पंचांग के मुताबिक, इस विवाह सीजन में अब बहुत कम समय बचा है। पंचांग के मुताबिक, जुलाई में शादी के सिर्फ 7 मुहूर्त बचे हैं। आप 1, 2, 6, 7, 8, 11 और 12 जुलाई को ही शुभ कार्य कर सकते हैं। इसके बाद चार महीने के लिए शहनाइयों की गूंज बंद हो जाएगी।
धर्माचार्यों के मुताबिक, जिन परिवारों में शादी का प्लान है, वे जल्द फैसला लें। इन बचे हुए 7 दिनों का लाभ उठाकर शुभ कार्य संपन्न करा लें। इसके बाद 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु को जगाया जाएगा। शंख और डमरू बजाकर भगवान का जागरण कराया जाएगा।
चातुर्मास खत्म होने के बाद साल 2026 में शादी के 16 मुहूर्त मिलेंगे। इसमें नवंबर के महीने में 6 और दिसंबर में 10 शुभ मुहूर्त शामिल हैं। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है, चातुर्मास खत्म होते ही मांगलिक कार्य फिर शुरू होंगे। तब तक आप भगवान की भक्ति में लीन रह सकते हैं। चातुर्मास में भगवान करेंगे विश्राम।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQ
- साल 2026 में चातुर्मास कब से शुरू और कब समाप्त होगा?
साल 2026 में चातुर्मास 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी से शुरू होगा। इसका समापन 20 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के जागने के साथ होगा। - चातुर्मास के दौरान कौन से कार्य पूरी तरह वर्जित होते हैं?
चातुर्मास में विवाह संस्कार, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार, भूमि पूजन और नया बिजनेस शुरू करना वर्जित माना जाता है। इस दौरान कोई भी नया मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है। - चातुर्मास में खान-पान को लेकर क्या नियम बताए गए हैं?
चातुर्मास में सावन में हरी सब्जियां, भाद्रपद में दही, आश्विन में दूध और कार्तिक में दालों का त्याग करना चाहिए। इसके साथ ही प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए।
ये खबरें भी पढ़ें...
पुरी जगन्नाथ मंदिर में बिना कुकर कैसे बनता है महाप्रसाद, एक चूल्हे पर रखे जाते हैं 7 बर्तन
4 जुलाई से शुक्र का सिंह राशि में प्रवेश, जानें अपनी राशि का हाल और ज्योतिषीय उपाय
एमपी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की ओंकारेश्वर में पूजा-अर्चना, मोहन सरकार के काम को सराहा
आखिर क्यों दूर्वा के बिना अधूरी है बप्पा की पूजा, कश्यप ऋषि से जुड़ा है राज