आज देवशयनी एकादशी से योग निद्रा में जाएंगे भगवान विष्णु, भूलकर भी न करें ये गलतियां
Devshayani Ekadashi 2026: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बहुत बड़ा और खास महत्व माना जाता है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं। इस साल देवशयनी एकादशी आज 25 जुलाई को पड़ रही है। इसी पावन दिन से सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन से भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। भगवान विष्णु के साथ ही सभी देवी-देवता भी शयन करते हैं। इसके बाद भगवान सीधे कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी के दिन ही जागते हैं। देवउठनी एकादशी आने पर ही दोबारा सभी शुभ कार्य शुरू हो पाते हैं। आइए जानें देवशयनी एकादशी में क्या करें और क्या नहीं....
देवशयनी एकादशी की पौराणिक कथा
देवशयनी एकादशी को लेकर पुराणों में एक बहुत ही सुंदर कथा मिलती है। राजा बली ने अपने बल से तीनों लोकों पर अपना अधिकार कर लिया था। देवराज इंद्र ने घबराकर भगवान विष्णु से मदद की गुहार लगाई थी। तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बली से तीन पग भूमि दान में मांगी। भगवान ने दो पग में ही पूरी धरती और आकाश को नाप लिया था।
तीसरे पग के लिए राजा बली ने अपना सिर भगवान के आगे झुका दिया। राजा बली की इस दानवीरता से भगवान विष्णु बेहद प्रसन्न हुए थे। उन्होंने राजा बली को पाताल लोक का राजा बना दिया था। साथ ही भगवान ने बली को एक वरदान मांगने के लिए भी कहा था। राजा बली ने भगवान से हमेशा अपने सामने रहने का वरदान मांग लिया।
वरदान के कारण भगवान विष्णु को पाताल लोक में रुकना पड़ा था। इससे माता लक्ष्मी बहुत परेशान हुईं और वे पाताल लोक पहुंच गईं। माता लक्ष्मी ने राजा बली को राखी बांधकर अपना भाई बना लिया। उपहार में माता लक्ष्मी ने राजा बली से भगवान विष्णु को वापस मांग लिया। भगवान विष्णु ने अपने भक्त बली को निराश नहीं होने दिया।
उन्होंने बली को वचन दिया कि वे हर साल चार महीने पाताल में रहेंगे। इसीलिए देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक भगवान पाताल में रहते हैं। भगवान का एक रूप पाताल में और दूसरा क्षीर सागर में सोता है।
शिवजी संभालेंगे सृष्टि का कार्यभार
भगवान विष्णु के सोने के बाद चातुर्मास का नियम शुरू हो जाता है। इस साल चातुर्मास 25 जुलाई शनिवार से शुरू होने जा रहा है। चातुर्मास 20 नवंबर शुक्रवार को देवउठनी एकादशी तक चलेगा। इन चार महीनों में भगवान विष्णु सृष्टि का कार्यभार शिवजी को सौंप देते हैं।
इसलिए चातुर्मास के दौरान भगवान महादेव की पूजा का खास महत्व होता है। पूरे चार महीने तक भक्त भोलेनाथ की दिल से आराधना करते हैं। सावन के महीने की शुरुआत भी इसी दौरान 28 जुलाई से होने जा रही है। इस समय शिवजी की पूजा करने से हर मनोकामना पूरी होती है।
देवशयनी एकादशी व्रत का महत्व
देवशयनी एकादशी का व्रत सभी पापों का नाश करने वाला माना जाता है। जो मनुष्य इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजन करता है, उसे सुख मिलता है। कहा जाता है कि इस एकादशी की कथा पढ़ने से हजार गोदान का पुण्य मिलता है। जो लोग रात में भगवान का कीर्तन करते हैं, उन्हें मोक्ष मिलता है।
भक्तिपूर्वक इस माहात्म्य का श्रवण करने से ब्रह्महत्या जैसे पाप भी कट जाते हैं। एकादशी के समान पापनाशक व्रत ब्रह्मांड में दूसरा कोई नहीं है। इस पावन समय में किया गया थोड़ा सा जाप भी हजार गुना फल देता है। इसलिए इस समय का उपयोग भगवान की भक्ति में ही करना चाहिए।
चातुर्मास के कारण बंद रहेंगी शादियां
गुरु तारा अस्त होने और चातुर्मास के कारण शादियां बंद रहेंगी। अब शादियों की शहनाई सीधे नवंबर महीने में ही गूंजने वाली है। जब 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु जागेंगे, तब देवोत्थान होगा। इसके बाद से ही सभी मांगलिक कार्य दोबारा से शुरू हो पाएंगे।
नवंबर और दिसंबर के महीने में शादियों के कई शुभ मुहूर्त मिलेंगे। लोग अपने शुभ कार्यों के लिए अभी से तैयारियां शुरू कर सकते हैं। तब तक का यह चार महीने का समय आत्ममंथन और साधना का है। भगवान की भक्ति करके हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं।
चातुर्मास में क्या करें, क्या न करें
चातुर्मास में भक्तों को कुछ कड़े नियमों का पालन करना पड़ता है। इन चार महीनों में इंसान को अपनी जीवनशैली में बदलाव करना चाहिए।
चातुर्मास में क्या करें:
- रोजाना सुबह जल्दी उठकर भगवान शिव और विष्णु जी का ध्यान करें।
- इन चार महीनों में जमीन पर सोना बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है।
- हमेशा सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करें।
- इस समय दीपदान, अन्नदान और वस्त्रदान करने का बहुत महत्व है।
- रोज गीता का पाठ या विष्णु सहस्रनाम का जाप जरूर करना चाहिए।
चातुर्मास में क्या न करें:
- इन चार महीनों के दौरान शादी, मुंडन और गृह प्रवेश न करें।
- भोजन में लहसुन, प्याज और तामसिक चीजों का सेवन बिल्कुल बंद कर दें।
- चातुर्मास के दौरान बैंगन, हरी पत्तेदार सब्जियां और मूली खाना मना है।
- किसी भी व्यक्ति की बुराई या झूठ बोलने से बचना चाहिए।
- शरीर पर तेल लगाने और कांसे के बर्तनों में खाने से बचें।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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