जानिए अमृत कलश के साथ समुद्र मंथन से प्रकट हुए भगवान धन्वंतरि को समर्पित धनतेरस की कहानी
Aman Vaishnav | Oct 16, 2025, 18:01 IST
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भगवान धनवंतरि का आगमनImage credit : Aman Vaishnav
मंथन के अंत में, भगवान धनवंतरि हाथों में अमृत का पात्र और आयुर्वेद की पुस्तक लेकर प्रकट हुए। ( जानें धनतेरस का महत्व ) उनके आने की तिथि को ही धनतेरस कहा जाने लगा।
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देवताओं पर श्रापImage credit : Aman Vaishnav
पौराणिक कथा के अनुसार, ऋषि दुर्वासा के श्राप से देवताओं की सारी शक्तियां चली गईं। इससे असुरों ने देवताओं को हरा दिया और पूरे ब्रह्मांड में अंधेरा छा गया।
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समुद्र मंथन से संबंधImage credit : Aman Vaishnav
Dhanteras Puja का संबंध पौराणिक समुद्र मंथन की कथा से है। यह कथा बताती है कि कैसे देवताओं ने अमृत पाने के लिए समुद्र मंथन किया था।
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मंदार पर्वत बना मथनीImage credit : Aman Vaishnav
भगवान विष्णु ने देवताओं को अमृत के लिए असुरों का सहयोग लेने को कहा। भगवान विष्णु की सलाह पर देवताओं और असुरों ने मिलकर मंथन शुरू किया। मंदार पर्वत को मथने की छड़ी बनाया गया, जिसे भगवान विष्णु ने कछुआ अवतार लेकर अपनी पीठ पर धारण किया।
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धनतेरस की कहानीImage credit : Aman Vaishnav
हर साल कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि पर धनतेरस मनाई जाती है, धनतेरस पर हम माता लक्ष्मी, कुबेर और आरोग्य के देवता धनवंतरि की पूजा करते हैं। (धनतेरस संदेश) आइए, जानते हैं कि धनतेरस क्यों मनाते हैं?
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विष्णु जी की शरणImage credit : Aman Vaishnav
असुरों के अत्याचार बढ़ने पर सभी देवता जगत के पालनहार भगवान विष्णु के पास मदद के लिए पहुंचे। भगवान विष्णु ने ही उन्हें अमृत के लिए समुद्र मंथन करने की सलाह दी थी।
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सबसे पहले आया विषImage credit : Aman Vaishnav
मंथन शुरू होते ही सबसे पहले घातक विष निकला, जिसने सृष्टि को खतरे में डाल दिया। इस विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण कर पूरी दुनिया को बचा लिया।
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मां लक्ष्मी हुई प्रकटImage credit : Aman Vaishnav
विष के बाद समुद्र मंथन से कई दिव्य निधियां (खजाने) बाहर आईं। इसी क्रम में, धन और समृद्धि की देवी, मां लक्ष्मी, स्वयं प्रकट हुईं।