केवल एक दिन की पूजा नहीं, पांच दिनों की साधना है दिवाली का पर्व, जानें इस 5 दिवसीय महाचक्र का पौराणिक रहस्य

Kaushiki | Oct 27, 2026, 14:45 IST
धनतेरस से भैया दूज का रहस्य, दिवाली का त्योहार में छिपा पूजा का महत्व
Diwali Ka Tyohar is not just a single-day festival. It spans five spiritual days from Dhanteras Se Bhaiya Dooj. Scriptures highlight the deep Pooja Ka Mahatva for each of these days.
Diwali 2026: भारत में दिवाली का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। ज्यादातर लोग इसे सिर्फ एक दिन की पूजा मानते हैं। शास्त्रों के मुताबिक, यह पांच दिनों का पावन पर्व है। यह महापर्व धनतेरस से भैया दूज तक लगातार चलता है। हर एक दिन की अपनी अलग मान्यता और परंपरा है।

हर दिन विशेष देवता की आराधना की जाती है। इस दौरान शास्त्रों में पूजा का महत्व बहुत अधिक बताया गया है। पहले दिन धनवंतरी और कुबेर देव की पूजा होती है। दूसरे दिन नरक चतुर्दशी पर रूप और स्वच्छता का ध्यान रखते हैं। तीसरे दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश का स्वागत करते हैं।



चौथे दिन गोवर्धन पर्वत और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा होती है। पांचवें दिन भाई और बहन के अटूट प्रेम का उत्सव मनाते हैं। इन पांच दिनों में घर की ऊर्जा पूरी तरह बदल जाती है। सकारात्मक सोच और खुशियों का माहौल चारों तरफ फैल जाता है। आइए इस पूरे चक्र को समझते हैं।



दिवाली 2026 का कैलेंडर

पहला दिन धनतेरस की महिमा

कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस मनाते हैं। इस दिन समुद्र मंथन से भगवान धनवंतरी प्रकट हुए थे। उनके हाथ में अमृत से भरा कलश मौजूद था। इसलिए धनतेरस के दिन आरोग्य की पूजा की जाती है।



इस दिन सोने, चांदी और बर्तन खरीदने की पुरानी परंपरा है। शाम को यमदेव के नाम का दीपक जलाया जाता है। इसे यम का दीया भी कहा जाता है। इससे अकाल मृत्यु का डर पूरी तरह समाप्त हो जाता है। घर के मुख्य द्वार पर दीया जलाना शुभ होता है।



दूसरा दिन रूप चौदस की कथा

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी या रूप चौदस कहते हैं। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था। उन्होंने हजारों बंदी महिलाओं को उसके चंगुल से छुड़ाया था।



इसी खुशी में यह दिन बड़े उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन उबटन लगाकर स्नान करने का नियम है। इससे शरीर को सुंदर और निरोगी काया प्राप्त होती है।



शाम के समय घर के कोनों में दीए जलाए जाते हैं। इससे नकारात्मक शक्तियां घर से तुरंत बाहर चली जाती हैं।



तीसरा दिन दिवाली की पूजा

कार्तिक अमावस्या को दिवाली का सबसे मुख्य पर्व आता है। इस दिन भगवान श्रीराम 14 वर्ष बाद अयोध्या लौटे थे। अयोध्या वासियों ने घी के दीए जलाकर उनका स्वागत किया था।



शास्त्रों में इस रात महालक्ष्मी की पूजा का महत्व है। इस दिन धन की देवी लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा होती है। व्यापारी अपने नए बही-खातों की शुरुआत भी करते हैं। पूरी रात घर के मुख्य द्वार को खुला रखा जाता है। दीपों की रोशनी से अंधकार पूरी तरह मिट जाता है।



चौथा दिन गोवर्धन पूजा का रहस्य

कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा का पावन दिन आता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का घमंड तोड़ा था। उन्होंने अपनी उंगली पर विशाल गोवर्धन पर्वत उठा लिया था।



उन्होंने गोकुल वासियों की भारी बारिश से रक्षा की थी। इस दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर पूजा की जाती है।



भगवान को 56 प्रकार के भोजन का भोग लगाते हैं। इसे अन्नकूट का त्योहार भी कहा जाता है। प्रकृति और पशुधन के प्रति आभार व्यक्त करने का यह अवसर है।



पांचवां दिन भैया दूज का पर्व

कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भैया दूज का त्योहार मनाया जाता है। इसे शास्त्रों में यम द्वितीया भी कहा गया है। इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे।



यमुना ने अपने भाई का बहुत आदर-सत्कार किया था। यमराज ने प्रसन्न होकर बहन को अमर वरदान दिया था।



इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं। वे अपने भाई की लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं। भाई भी अपनी बहन को रक्षा का वचन देते हैं।



तो दीपावली का यह पावन पांच दिवसीय चक्र केवल दीये जलाने का पर्व नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शुद्धता, समृद्धि, प्रकृति और पारिवारिक प्रेम का एक अद्भुत महासंगम है। धनतेरस से भैया दूज तक शास्त्रों के मुताबिक पूजा-अर्चना करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-शांति और प्रभु की असीम कृपा बनी रहती है।



डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।



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