जानें क्यों हर महीने आने वाली एकादशी तिथि को ही प्रसन्न होते हैं भगवान विष्णु?

Kaushiki | Jul 01, 2026, 13:00 IST
Ekadashi Lord Vishnu Puja
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत बड़ा महत्व माना गया है। पौराणिक कथाओं और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। माना जाता है कि एकादशी तिथि की उत्पत्ति स्वयं भगवान विष्णु के शरीर से हुई थी।

Ekadashi Lord Vishnu Puja: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और व्रतों का एक अलग ही विशेष स्थान होता है। इनमें भी एकादशी के व्रत को सबसे बड़ा और उत्तम माना गया है। क्या आप जानते हैं कि इसी दिन विष्णु जी की पूजा क्यों होती है? इसके पीछे दिलचस्प पौराणिक कहानियां और गहरे वैज्ञानिक कारण छिपे हैं।



सनातन परंपरा में हर महीने दो बार एकादशी की तिथि आती है। एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में आती है। पूरे साल में कुल मिलाकर चौबीस एकादशी की तिथियां आती हैं। मलमास या अधिकमास आने पर इनकी संख्या बढ़कर छब्बीस हो जाती है। तो ऐसे में आइए आज जानें कि एकादशी व्रत क्या है और इस दिन क्यों कि जाती है विष्णु जी की पूजा।



Ekadashi Lord Vishnu Puja


एकादशी तिथि की पौराणिक कथा

पद्म पुराण में एकादशी तिथि के जन्म की एक बहुत सुंदर कथा मिलती है। सतयुग में मुर नाम का एक बहुत ही भयानक असुर हुआ करता था। उस असुर ने अपने बल से स्वर्ग पर अपना अधिकार कर लिया था। उसने सभी देवताओं को पीटकर स्वर्ग से बाहर खदेड़ दिया था। परेशान होकर सभी देवता मदद के लिए भगवान शिव के पास पहुंचे।



शिव जी ने देवताओं को भगवान विष्णु की शरण में जाने को कहा। देवताओं की करुण पुकार सुनकर भगवान विष्णु उस असुर से युद्ध करने निकल पड़े। भगवान विष्णु और मुर असुर के बीच लंबा युद्ध चला। यह भयंकर युद्ध कई सौ सालों तक लगातार चलता ही रहा। युद्ध करते-करते भगवान विष्णु बहुत ज्यादा थक गए थे।



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कैसे हुआ एकादशी देवी का जन्म

थकान मिटाने के लिए भगवान विष्णु बदरिकाश्रम की एक गुफा में चले गए। उस सुंदर गुफा का नाम सिंहवती रखा गया था। भगवान विष्णु वहां योग निद्रा में लीन होकर गहरे विश्राम में चले गए। मुर असुर भी भगवान का पीछा करते हुए उस गुफा तक पहुंच गया। भगवान को सोया हुआ देखकर असुर ने उन पर हमला करना चाहा।



उसी समय भगवान विष्णु के शरीर से एक सुंदर देवी प्रकट हुईं। वह देवी बहुत शक्तिशाली थीं और उनके पास अद्भुत अस्त्र-शस्त्र थे। उन्होंने तुरंत मुर असुर को युद्ध के लिए ललकारा। देवी और उस असुर के बीच भयंकर युद्ध शुरू हो गया। देवी ने अपने तेज से उस पापी असुर का वध कर दिया।



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भगवान विष्णु ने दिया था यह वरदान

जब भगवान विष्णु अपनी योग निद्रा से जागे तो सब हैरान रह गए। उन्होंने देखा कि वह भयानक असुर मरा हुआ जमीन पर पड़ा है। भगवान विष्णु ने खुश होकर उस देवी से उनका नाम पूछा। देवी ने कहा कि वे उनके शरीर से एकादशी तिथि को प्रकट हुई हैं। इसलिए उनका नाम एकादशी है और वे उनकी ही शक्ति हैं।



भगवान विष्णु ने देवी एकादशी की वीरता से खुश होकर वरदान दिया। उन्होंने कहा कि जो भी मनुष्य एकादशी को व्रत रखेगा वह सुखी रहेगा। उसके जीवन के सभी पाप और कष्ट पूरी तरह नष्ट हो जाएंगे। मृत्यु के बाद उस जीव को सीधे बैकुंठ धाम में स्थान मिलेगा। इसी वजह से इस दिन विष्णु जी की पूजा शुरू हुई।



Ekadashi Vrat Benefits


एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, एकादशी तिथि का हमारे मन और ग्यारह इंद्रियों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इस विशेष दिन ब्रह्मांड में चंद्रमा की स्थिति ऐसी होती है कि उसका असर मानव मस्तिष्क पर बहुत कम हो जाता है। यही कारण है कि एकादशी का व्रत रखने से मानसिक संतुलन बेहतर होता है, मन इधर-उधर भटकता नहीं है और एकाग्रता बढ़ती है।



आध्यात्मिक रूप से इस दिन पूजा, ध्यान और मंत्र जाप करने से कई गुना अधिक फल मिलता है। इसके साथ ही, उपवास या हल्का भोजन करने से शरीर की शुद्धि होती है और पाचन तंत्र पूरी तरह स्वस्थ रहता है।



मन और शरीर पर पड़ता है सीधा असर

ज्योतिष शास्त्र में एकादशी तिथि का संबंध हमारे मन से जोड़ा गया है। हमारी ग्यारह इंद्रियों पर इस तिथि का सीधा असर पड़ता है। इन ग्यारह इंद्रियों में पांच ज्ञानेंद्रियां और पांच कर्मेंद्रियां शामिल होती हैं। ग्यारहवां और सबसे मुख्य तत्व हमारा मन माना जाता है। एकादशी के दिन हमारा मन बहुत ज्यादा चंचल और अशांत रहता है।



उपवास रखने से हमारी इंद्रियों पर हमारा नियंत्रण मजबूत होता है। इस दिन अन्न का त्याग करने का नियम बनाया गया है। अन्न न खाने से शरीर में आलस्य और तामसिक विचार नहीं आते। सात्विक विचार रहने से भगवान की भक्ति में मन आसानी से लगता है। यही वजह है कि ऋषि-मुनियों ने इस दिन व्रत की सलाह दी।



इस दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं

एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना बहुत शुभ होता है। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर भगवान विष्णु का ध्यान करें। भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें। उन्हें पीले फूल, फल और तुलसी दल जरूर अर्पित करें। विष्णु जी की पूजा में तुलसी का महत्व सबसे ज्यादा माना गया है।



बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते हैं। इस दिन भूलकर भी चावल का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन चावल खाना वर्जित माना गया है। रात के समय जमीन पर सोएं और भगवान के भजनों का कीर्तन करें। अगले दिन सुबह शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें।



एकादशी के दिन चावल न खाने की वजह

पौराणिक कथा के मुताबिक, जब भगवान विष्णु के पसीने से एकादशी देवी प्रकट हो रही थीं, तब उस समय उनके क्रोध से बचने के लिए महर्षि मेधा ने अपने शरीर का त्याग कर दिया था। बाद में महर्षि मेधा का अंश धरती के अंदर समा गया और वे जौ तथा चावल के पौधे के रूप में उत्पन्न हुए। इसी कारण एकादशी के दिन चावल को जीव के समान माना जाता है। शास्त्रों में इस दिन चावल खाना महर्षि मेधा के मांस के सेवन के बराबर माना गया है।



वैज्ञानिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, चावल में जल तत्व की मात्रा बहुत अधिक होती है। एकादशी के दिन चंद्रमा का प्रभाव वैसे भी मन पर अधिक रहता है। जल तत्व के सेवन से मन की चंचलता बढ़ जाती है, जिससे व्रत और ध्यान लगाने में बाधा आती है। इसलिए इस दिन चावल खाना पूरी तरह वर्जित है।



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जीवन में सुख और शांति लाता है यह व्रत

धार्मिक दृष्टिकोण से एकादशी का व्रत (Ekadashi Tithi) रखने से मानसिक शांति मिलती है। घर का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से पूरी तरह भर जाता है। यह व्रत व्यक्ति को अनुशासन और संयम का बहुत बड़ा पाठ सिखाता है। इससे व्यक्ति के भीतर दया और करुणा की भावना जागती है।



आज के समय में भी लोग शांति के लिए उपवास (एकादशी पर पूजा) रखते हैं। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि उपवास से शरीर डिटॉक्स हो जाता है। यदि आप भी जीवन में सुख-समृद्धि और शांति चाहते हैं तो इस व्रत को पूरे नियम और सच्ची श्रद्धा के साथ जरूर करें।



FAQ

  1. एकादशी के दिन केवल भगवान विष्णु की ही पूजा क्यों की जाती है?
    पौराणिक कथा के अनुसार एकादशी देवी का जन्म भगवान विष्णु के शरीर से हुआ था। उन्होंने मुर असुर का वध किया था। तब प्रसन्न होकर श्री हरि विष्णु ने वरदान दिया था कि जो भी एकादशी को व्रत और मेरी पूजा करेगा, उसे मोक्ष मिलेगा।
  2. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एकादशी व्रत रखने का क्या महत्व है?
    ज्योतिष के अनुसार एकादशी का संबंध ग्यारह इंद्रियों और मन से है। इस दिन चंद्रमा के प्रभाव से मन विचलित रहता है। व्रत रखने से मन शांत होता है, मानसिक संतुलन बेहतर होता है और इंद्रियों पर नियंत्रण बढ़ता है।
  3. एकादशी व्रत के दौरान किन मुख्य बातों का ध्यान रखना चाहिए?
    एकादशी व्रत में सात्विकता का पालन करना सबसे जरूरी है। इस दिन चावल, लहसुन और प्याज का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। भगवान विष्णु को पूजा में तुलसी दल जरूर चढ़ाएं और शांत मन से मंत्रों का जाप करें।

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