क्यों किया जाता है गणपति विसर्जन, स्थापना के कितने दिन बाद और कैसे करें विसर्जन?

Kaushiki | Sept 12, 2026, 15:30 IST
Ganesh Visarjan Rules
14 सितंबर 2026 से गणेश चतुर्थी का पावन पर्व शुरू हो चुका है। भक्त अपने घरों में गणपति की स्थापना करते हैं। लेकिन विसर्जन कब, क्यों और कैसे किया जाता है, इसके पीछे एक गहरी पौराणिक कथा और धार्मिक नियम छिपे हैं।

Ganesh Visarjan Rules: सनातन धर्म में गणेश चतुर्थी का त्योहार बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस साल 14 सितंबर से गणेश चतुर्थी का त्योहार शुरू हो चुका है। भक्त बड़ी श्रद्धा से प्रथम पूज्य देव की प्रतिमा स्थापित करते हैं। उत्सव के बाद बप्पा का विसर्जन किया जाता है।



बहुत से लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि बप्पा को जल में क्यों प्रवाहित करते हैं। इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण छुपा हुआ है। शास्त्रों में विसर्जन को एक पवित्र विदाई माना गया है। बप्पा अपने साथ भक्तों के सभी कष्ट और विघ्न ले जाते हैं। वे अपने लोक लौटकर फिर से आने का आशीर्वाद देते हैं।

Ganesh Visarjan Rules


गणपति विसर्जन की पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महर्षि वेद व्यास ने महाभारत लिखने का संकल्प लिया था। इसके लिए उन्होंने भगवान गणेश से सहायता मांगी थी। गणेश जी लिखने के लिए सहर्ष तैयार हो गए थे। वेद व्यास जी श्लोक बोलते थे और गणेश जी बिना रुके लिखते थे।



यह लेखन कार्य लगातार दस दिनों तक चलता रहा। दस दिनों तक गणेश जी एक ही जगह बैठे रहे। लगातार लिखने के कारण उनके शरीर का तापमान बहुत बढ़ गया। उनके शरीर पर धूल और मिट्टी की परत भी जम गई थी। उनका शरीर तपने लगा था।



जल में स्नान और शीतलता

10वें दिन यानी अनंत चतुर्दशी पर लेखन कार्य पूरा हुआ। वेद व्यास जी ने देखा कि बप्पा का शरीर काफी गर्म हो चुका है। शरीर को ठंडा करना बहुत जरूरी हो गया था। वेद व्यास जी ने गणेश जी को पास के कुंड में ले जाकर स्नान कराया।



शीतल जल में डुबकी लगाने से उनका शरीर ठंडा हुआ। उनका बढ़ा हुआ तापमान धीरे-धीरे सामान्य हो गया। तभी से 10 दिनों तक पूजा के बाद विसर्जन की परंपरा शुरू हुई। माना जाता है कि जल में जाने से बप्पा को शीतलता मिलती है। इसीलिए हर साल विसर्जन की परंपरा निभाई जाती है और अनंत चतुर्दशी को गणेश विसर्जन होता है।



Ganesh Visarjan Rules


स्थापना के कितने दिन बाद विसर्जन

शास्त्रों के मुताबिक, विसर्जन अलग-अलग दिनों में किया जा सकता है। लोग अपनी श्रद्धा और सुविधा के हिसाब से दिन चुनते हैं। सबसे ज्यादा डेढ़ दिन, तीन दिन या पांच दिन में विसर्जन होता है। कुछ लोग सातवें दिन भी गणपति का विसर्जन करते हैं।



वहीं सबसे बड़ा और मुख्य विसर्जन 10वें दिन यानी अनंत चतुर्दशी को होता है। दस दिनों तक बप्पा की पूर्ण सेवा की जाती है। आप जितने भी दिन बप्पा को घर में रखें, नियम से पूजा होनी चाहिए। हर दिन सुबह और शाम को आरती करना बहुत जरूरी होता है।



गणेश विसर्जन की सही विधि

विसर्जन के दिन सुबह बप्पा की विशेष पूजा-अर्चना करें। उन्हें मोदक, फल और दुर्वा घास अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर आरती उतारें। विसर्जन से पहले बप्पा से अपनी भूल-चूक की माफी मांगें।



परिवार की सुख-समृद्धि के लिए उनसे प्रार्थना करें। फिर प्रतिमा को अपनी जगह से थोड़ा खिसकाएं। प्रतिमा को खिसकाना इस बात का प्रतीक है कि पूजा पूरी हो चुकी है। अब बप्पा विसर्जन के लिए तैयार हैं। इसके बाद बप्पा के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ें।



मंत्रोच्चार और शुभ विदाई

बप्पा को ले जाते समय 'गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ' के नारे लगाएं। रास्ते भर खुशी और ढोल-नगाड़ों के साथ विदाई दें। विसर्जन स्थल पर पहुंचकर फिर से एक बार छोटी आरती करें।



उन्हें अक्षत और पुष्प अर्पित करें। इसके बाद बहुत आदर के साथ प्रतिमा को जल में विसर्जित करें। अगर आप घर में इको-फ्रेंडली मूर्ति लाते हैं तो बाल्टी में विसर्जन करें। उस पवित्र मिट्टी को बाद में गमले या पौधों में डाल दें।



विसर्जन में बरतें ये सावधानियां

गणपति विसर्जन करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है। प्रतिमा को कभी भी जल में फेंकना नहीं चाहिए। बहुत ही सम्मानपूर्वक धीरे-धीरे जल में डुबोएं। विसर्जन के समय चमड़े की चीजें जैसे बेल्ट या पर्स न पहनें।



मन में कोई भी नकारात्मक या बुरे विचार न लाएं। पूर्ण सात्विकता और स्वच्छता का पालन करें। प्लास्टिक या केमिकल वाली मूर्तियों का इस्तेमाल करने से बचें। केवल मिट्टी की मूर्तियों का ही प्रयोग करें। इससे नदियां और पर्यावरण भी पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।



बप्पा की विदाई का असली संदेश

गणपति विसर्जन हमें जीवन का एक बहुत बड़ा सीख और संदेश देता है। जो इस दुनिया में आया है, उसे एक दिन जाना ही है। सृष्टि का यह नियम अटल और शाश्वत है। विसर्जन से हमें मोह-माया से दूर रहने की प्रेरणा मिलती है।



बप्पा दस दिन हमारे घर में मेहमान बनकर रहते हैं। वे हमें खुशियां बांटना और दुख हरना सिखाते हैं। जब वे जाते हैं तो अपने साथ हमारे सारे कष्ट ले जाते हैं। इसीलिए विसर्जन के समय दुखी होने के बजाय अगले साल के इंतजार का उत्साह होना चाहिए।



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