गीता जयंती 2024 : इस दिन भगवान के श्रीमुख से हुआ था भगवद्गीता का जन्म
श्रीमद्भगवद्गीता जयंती हिंदू धर्म के श्रद्धालुओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण त्यौहार माना जाता है। भारतीय संस्कृति और शास्त्रों में सबसे पवित्रम ग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता को ही माना जाता है और यह एकमात्र ऐसा ग्रंथ जिसकी जयंती भी मनाई जाती है।
शुक्ल पक्ष की एकादशी को है गीता जयंती
5157 वीं श्रीमद्भगवद्गीता जयंती
श्रीमद्भगवद्गीता में बताया गया है कि मनुष्य के जीवन में जब दुख लालच या अज्ञानताप्रवेश कर जाती है तब उन विपरीत परिस्थितियों में मनुष्य को धैर्य बनाए रखना चाहिए। भारतीय संस्कृति में इस पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता को केवल एक पुस्तक ना मानकर अपने आप में श्री भगवान का स्वरूप माना जाता है। इस धार्मिकग्रंथ में कुल 700 श्लोक है जो श्री भगवान के मुख से निकली है इसलिए इस दिन श्रीमद्भगवद्गीता की जन्म जयंती मनाई जाती है कहां जाता है इसी दिन श्रीमद्भगवद्गीता का जन्म श्री भगवान के मुख से हुआ था। श्री भगवान कृष्ण ने कुरुक्षेत्र में कुंती पुत्र अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान दिया था तभी से इस गीता जयंती के पर्व को हिंदू धर्म मोक्षदा एकादशी के रूप में भी मानते हैं। श्रीमद्भगवद्गीता एक ऐसा पवित्र ग्रंथ है जिसमें कुल 18 अध्याय है, जिनमें से 6 अध्यायों में कर्म योग का संदेश, 6 अध्यायों में ज्ञान योग का संदेश तथा अंतिम के 6 अध्यायों में भक्ति योग का संदेश दिया गया है। धर्मशास्त्र मान्यताओं के अनुसार इस वर्ष 2024 में श्रीमद्भगवद्गीता जयंती पर्व की 5157 वीं जयंती मनाई जा रही है।
गीता जयंती शुभ तिथि पूजा का मुहूर्त
इस साल 2024 में श्रीमद्भगवद्गीता जयंती 11 दिसंबर, बुधवार को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि 11 दिसंबर को सुबह 3 बजकर 42 मिनट पर प्रारंभ हो जाएगी और इस एकादशी तिथि का समापन अगले दिन यानी 12 दिसंबर को सुबह 1 बजकर 9 मिनट पर होगा।
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