हिंदू नववर्ष की शुरुआत से लेकर गुड़ी पड़वा तक, भारत में एक ही दिन मनाए जाते हैं कई उत्सव
Kaushiki | Mar 19, 2026, 13:06 IST
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प्रकृति का नया और सुंदर श्रृंगारImage credit : Kaushiki
चैत्र माह में वसंत ऋतु अपने चरम पर होती है और पेड़ों पर नई कोपलें आती हैं। पुरानी पत्तियां गिरकर नए जीवन का संदेश देती हैं, जो नई फसल की कटाई का समय भी है।
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पूरे भारत में अलग नामImage credit : Kaushiki
महाराष्ट्र में इसे गुड़ी पड़वा, दक्षिण भारत में उगादी और सिंध में चेटी चंड कहते हैं। भले ही नाम अलग हों, पर सबके पीछे नई शुरुआत की भावना एक ही है।
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नीम और गुड़ का अनोखा स्वादImage credit : Kaushiki
इस दिन विशेष रूप से नीम की पत्तियों और गुड़ का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। ये परंपरा सिखाती है कि जीवन कड़वे और मीठे अनुभवों का संतुलित मिश्रण है, जो सेहत सुधारता है।
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छत्रपति शिवाजी महाराज की जीतImage credit : Kaushiki
महाराष्ट्र में, ये त्योहार शिवाजी महाराज द्वारा विदेशी घुसपैठियों को हराने और विजय ध्वज फहराने के उपलक्ष्य में भी मनाया जाता है। साथ ही, इसे नई फसल के आगमन और सृष्टि की रचना के उत्सव के रूप में घर-घर गुड़ी सजाकर मनाया जाता है।
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राजा विक्रमादित्य का इतिहासImage credit : Kaushiki
इसी दिन सम्राट विक्रमादित्य ने विदेशी आक्रमणकारियों को हराकर अपना नया विक्रम संवत चलाया था। ये दिन भारतीय स्वाभिमान और पराक्रम की जीत का सबसे बड़ा ऐतिहासिक प्रमाण माना जाता है।
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शक्ति की उपासनाImage credit : Kaushiki
इसी तिथि से मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना यानी चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ होता है। भक्त घटस्थापना कर नौ दिनों तक शक्ति की साधना करते हैं ताकि जीवन में सकारात्मकता आए।
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हिंदू नववर्ष की शुरूआतImage credit : Kaushiki
क्या आप जानते हैं कि 19 मार्च 2026 को भारत में एक साथ कई उत्सव मनाए जाते हैं। इस दिन न केवल हिंदू नववर्ष की शुरूआत होती है, बल्कि महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा और चैत्र नवरात्रि का भी मनाया जाता है। ये दिन हमारी संस्कृति में नई शुरुआत, जीत और भक्ति का एक अद्भुत संगम है।
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सृष्टि की रचना का पहला दिनImage credit : Kaushiki
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, ब्रह्मा जी ने इसी दिन से पूरी सृष्टि का निर्माण शुरू किया था। इसी कारण इस दिन को समय चक्र या संवत्सर की शुरुआत का पावन पर्व माना जाता है।