आस्था और परंपरा का महासंगम समाप्त, जानें महाकुंभ 2025 की 10 खास बातें
Kaushiki | Mar 01, 2025, 12:41 IST
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अखाड़ों की भव्य परंपराImage credit : Kaushiki
महाकुंभ में 13 प्रमुख अखाड़ों ने भाग लिया, जिनमें नागा साधु और अन्य संतों ने शाही स्नान किया। अखाड़ों की परंपरा आदि शंकराचार्य द्वारा सनातन धर्म की रक्षा और प्रचार के लिए स्थापित की गई थी।
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महाकुंभ भगदड़Image credit : Kaushiki
महाकुंभ 2025 में भगदड़ की दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई, जिसमें कई श्रद्धालु घायल हुए। प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर हालात पर काबू पाया।
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अगला सिंहस्थ महाकुंभ 2028:Image credit : Kaushiki
अगला कुंभ मेला 2028 में उज्जैन में शिप्रा नदी के तट पर आयोजित किया जाएगा, जिसे सिंहस्थ महाकुंभ के नाम से जाना जाता है। उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग इसे और अधिक पवित्र बनाता है।
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देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुImage credit : Kaushiki
भारत के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं के अलावा, कई विदेशी भक्तों ने भी इस महायोजना में हिस्सा लिया। संतों, आध्यात्मिक गुरुओं, राजनेताओं और उद्योगपतियों ने आस्था की डुबकी लगाई।
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ऐतिहासिक महत्वImage credit : Kaushiki
यह कुंभ मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी ऐतिहासिक बन गया। इसमें लाखों साधु-संत, नागा बाबा, भक्त और पर्यटक शामिल हुए।
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राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी बने साक्षीImage credit : Kaushiki
इस दिव्य आयोजन का साक्षी बनने के लिए भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी प्रयागराज पहुंचे और संगम में स्नान किया।
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महाकुंभ 2025 का समापनImage credit : Kaushiki
45 दिनों तक चले इस विशाल आयोजन का समापन 26 फरवरी 2025 को हुआ। इस बार प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया।
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महाकुंभ में चर्चित हस्तियां:Image credit : Kaushiki
इस वर्ष महाकुंभ में कई चर्चित चेहरे नजर आए, जिनमें IIT बाबा (IIT मुंबई के पूर्व छात्र), माला बेचने वाली मोनालिसा जैसी चर्चित हस्तियां शामिल रहीं।
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महाशिवरात्रि पर भव्य समापनImage credit : Kaushiki
महाकुंभ का अंतिम दिन महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर पड़ा, जिसमें करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई और इस आयोजन को एक भव्य समापन मिला।
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शाही स्नान का महत्वImage credit : Kaushiki
इस महाकुंभ में कुल 6 शाही स्नान आयोजित किए गए, जिनमें मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी और माघ पूर्णिमा प्रमुख रहे। इन तिथियों पर संगम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।