नवमी पर ऐसे करें मां सिद्धिदात्री की आराधना, सभी मनोकामना होंगी पूरी

Kaushiki | Apr 05, 2025, 17:14 IST
maa Siddhidatri
माता सिद्धिदात्री को प्रसाद, नवरस युक्त भोजन, नौ प्रकार के पुष्प और नौ प्रकार के ही फल अर्पित करने चाहिए। मां सिद्धिदात्री को मौसमी फल, चना, पूड़ी, खीर, नारियल और हलवा अतिप्रिय है।

नवरात्रि के अंतिम दिन, यानी नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री को सिद्धि देने वाली देवी माना जाता है, और उनका रूप अत्यधिक शक्तिशाली है।



मां सिद्धिदात्री की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या कर आठों सिद्धियों को प्राप्त किया था। मां सिद्धिदात्री की अनुकंपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी हो गया था और वह अर्धनारीश्वर कहलाएं। मां दुर्गा के नौ रूपों में यह रूप अत्यंत ही शक्तिशाली रूप है। कहा जाता है कि, मां दुर्गा का यह रूप सभी देवी-देवताओं के तेज से प्रकट हुआ है।



कथा में वर्णन है कि जब दैत्य महिषासुर के अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवतागण भगवान शिव और भगवान विष्णु के पास पहुंचे। तब वहां मौजूद सभी देवतागण से एक तेज उत्पन्न हुआ और उसी तेज से एक दिव्य शक्ति का निर्माण हुआ, जिसे मां सिद्धिदात्री कहा जाता है।



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मां की पूजन विधि

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मां का भोग

माता सिद्धिदात्री को प्रसाद, नवरस युक्त भोजन, नौ प्रकार के पुष्प और नौ प्रकार के ही फल अर्पित करने चाहिए।


मां सिद्धिदात्री को मौसमी फल, चना, पूड़ी, खीर, नारियल और हलवा अतिप्रिय है। कहते हैं कि मां को इन चीजों का भोग लगाने से वह प्रसन्न होती हैं। माना जाता है की मां को चना, पूड़ी, मौसमी फल, खीर हलवा और नारियल का भोग प्रिय है। ऐसे में नवमी के दिन इन चीजों का भोग जरूर लगाना चाहिए।



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मां सिद्धिदात्री की आरती

जय सिद्धिदात्री मां, तू सिद्धि की दाता।


तू भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता।


तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि।


तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि।


कठिन काम सिद्ध करती हो तुम।


जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम।


तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है।


तू जगदम्बे दाती तू सर्व सिद्धि है।


रविवार को तेरा सुमिरन करे जो।


तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो।


तू सब काज उसके करती है पूरे।


कभी काम उसके रहे ना अधूरे।


तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया।


रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया।


सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली।


जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली।


हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा।


महा नंदा मंदिर में है वास तेरा।


मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता।


भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता।



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