November 2026 Festival List: धनतेरस, दिवाली और छठ पूजा, नवंबर में आ रहे हैं ये बड़े व्रत-त्योहार, यहां देखें पूरी कैलेंडर लिस्ट
वहीं दूसरी तरफ आस्था और नियम का महापर्व छठ होगा। हर घर में पूजा और उत्सव की तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं। व्रत और त्योहारों की सही जानकारी होना बहुत जरूरी होता है। इससे आप अपने सभी धार्मिक कार्य सही समय पर कर पाते हैं। आइए जानें कि इस महीने में कौन सा त्योहार किस दिन पड़ेगा।
महीने की शुरुआत के प्रमुख व्रत
1 नवंबर 2026 (रविवार): अहोई अष्टमी, राधा कुंड स्नान, कालाष्टमी
- इस दिन माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए कठिन व्रत रखती हैं। मथुरा के राधा कुंड में स्नान करने का भी इस दिन खास महत्व है।
5 नवंबर 2026 (गुरुवार): रमा एकादशी, कृष्ण पद्मनाभ द्वादशी, गोवत्स द्वादशी
- भगवान विष्णु की पूजा के लिए रमा एकादशी का दिन बहुत अच्छा माना जाता है। इस दिन गाय और बछड़े की पूजा करके पुण्य कमाया जाता है।
रोशनी और खुशियों का महापर्व
6 नवंबर 2026 (शुक्रवार): धनतेरस, धनत्रयोदशी, यम दीपम, शुक्र प्रदोष व्रत
- धनतेरस के दिन नए बर्तन और आभूषण खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। शाम को यमराज के नाम का दीपक जलाकर अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना होती है।
7 नवंबर 2026 (शनिवार): रूप चौदस, छोटी दिवाली, हनुमान पूजा, मासिक शिवरात्रि
- इस रात संकटमोचन हनुमान और मां काली की विशेष साधना की जाती है। तंत्र साधना और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए यह दिन खास है।
8 नवंबर 2026 (रविवार): दीपावली (लक्ष्मी पूजन)
- यह रोशनी का सबसे बड़ा पर्व है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करके सुख और समृद्धि मांगी जाती है।
10 नवंबर 2026 (मंगलवार): गोवर्धन पूजा, अन्नकूट
- इस दिन प्रकृति और गोधन यानी गायों के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण को कई तरह के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है।
11 नवंबर 2026 (बुधवार): भाई दूज (यम द्वितीया)
- यह दिन भाई और बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। बहनें अपने भाई का तिलक करती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं।
आस्था और नियम का कठिन समय
15 नवंबर 2026 (रविवार): वृश्चिक संक्रांति, छठ पूजा (आरंभ / डाला छठ), जैन अष्टाह्निका प्रारम्भ
- इस दिन से लोक आस्था के महापर्व छठ की शुरुआत होती है। इसके साथ ही सूर्य देव का वृश्चिक राशि में प्रवेश भी होता है।
16 नवंबर 2026 (सोमवार): गोपाष्टमी, मण्डला पूजा प्रारम्भ, मासिक दुर्गाष्टमी
- इस दिन गायों को नहलाकर उनका सुंदर श्रृंगार किया जाता है। साथ ही मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए व्रत भी रखा जाता है।
17 नवंबर 2026 (मंगलवार): अक्षय नवमी (आंवला नवमी), जगद्धात्री पूजा, सतयुग दिवस, कंस वध
- आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन पकाने और खाने का रिवाज है। इस दिन किया गया दान कभी समाप्त नहीं होता है।
देवताओं के जागने की शुभ घड़ी
19 नवंबर 2026 (गुरुवार): भीष्म पंचक प्रारम्भ, देवउठनी एकादशी (प्रबोधिनी एकादशी)
- चार महीने के विश्राम के बाद भगवान विष्णु इस दिन जागते हैं। इसी दिन से शादी-विवाह जैसे सभी शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं।
20 नवंबर 2026 (शुक्रवार): तुलसी विवाह, योगेश्वर द्वादशी, गुरुवायुर एकादशी, वैष्णव देवुत्थान एकादशी
- तुलसी माता का विवाह शालिग्राम रूप में भगवान विष्णु से कराया जाता है। इस विवाह को देखने और कराने से बड़ा पुण्य मिलता है।
21 नवंबर 2026 (शनिवार): विश्वेश्वर व्रत, रवि प्रदोष व्रत, वैकुण्ठ चतुर्दशी
- भगवान शिव और भगवान विष्णु की एक साथ पूजा का यह बहुत सुंदर दिन है। इस दिन व्रत रखने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
22 नवंबर 2026 (रविवार): मणिकर्णिका स्नान, कार्तिक चौमासी चौदस (जैन)
- काशी के पवित्र मणिकर्णिका घाट पर स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है। जैन धर्म के अनुयायी भी इस दिन विशेष नियम पालते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा और पवित्र समापन
23 नवंबर 2026 (सोमवार): देव दीपावली, भीष्म पंचक समाप्त, गुरु नानक जयंती, पुष्कर स्नान, कार्तिगाई दीपम्, कार्तिक पूर्णिमा
- माना जाता है कि इस दिन सभी देवता काशी के घाटों पर दिवाली मनाते हैं। इसी दिन सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी की जयंती भी है।
24 नवंबर 2026 (मंगलवार): मार्गशीर्ष मास प्रारम्भ, रोहिणी व्रत (जैन), इष्टि
- हिंदू पंचांग के अनुसार आज से नए पवित्र मार्गशीर्ष महीने की शुरुआत होती है। इस महीने में भगवान कृष्ण की पूजा का बहुत महत्व है।
26 नवंबर 2026 (गुरुवार): गणाधिप संकष्टी चतुर्थी
- भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए यह संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।